
New Delhi: छत्तीसगढ़ में 2000 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी जांच पर सुप्रीम कोर्ट ने एजेंसी को संयम बनाए रखने को कहा है. जस्टिस एस के कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की बेंच ने छत्तीसगढ़ के दो व्यक्तियों की तरफ से दायर की गई एक याचिका समेत अन्य याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. दायर याचिका में ईडी की तरफ से उनके खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को चुनौती दी है. मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बीते 16 मई को सुनवाई के दौरान ईडी से कहा था कि वह ‘डर का माहौल’ पैदा न करे.
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से कपिल सिब्बल और सुमीर सोढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा, ईडी राज्य के अधिकारियों को परेशान कर रही है. अधिकारियों को अब अपनी संपत्तियों का खुलासा करने के लिए नोटिस मिला है ताकि उसे कुर्क किया जा सके. सरकार की ओर से एक याचिका में पक्षकार बनाने का अनुरोध करते हुए एक अर्जी दायर की है, जिसमें दावा किया गया है कि आबकारी विभाग के 52 अधिकारियों ने जांच के दौरान ईडी अधिकारियों की तरफ से मानसिक और शारीरिक यातना का आरोप लगाते हुए लिखित रूप से शिकायत की है. सरकार ने यह भी आरोप लगाया था कि जांच एजेंसी ‘अनियमित तरीके से काम कर रही है’ और राज्य में शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को फंसाने की कोशिश कर रही है.
वहीं मामले को लेकर पीठ ने ईडी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू से मौखिक टिप्पणी में कहा, ‘तब तक संयम बनाए रखें, हम अंतिम विचार नहीं रख रहे हैं.’
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