
Ranchi : स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और उनके मंत्री कोषांग के 59 कर्मियों को कोविड प्रोत्साहन राशि देने के मामले में सरयू राय ने एक और खुलासा किया है. राय ने कहा है कि मंत्री ने प्रोत्साहन राशि नहीं लेने की घोषणा मजबूरी में की है, क्योंकि वे चाहकर भी भुगतान नहीं ले सकते. सरयू राय ने कहा है कि भुगतान संबंधी समस्त वित्तीय एवं विभागीय प्रक्रियाओं में संबंधित संचिकाओं, प्रोत्साहन राशि के विपत्र भुगतान हेतु कोषागार भेजे जाने वाली स्वास्थ्य विभाग की संचिका पर पर बन्ना गुप्ता के हस्ताक्षर हैं. मंत्री ने इसे संपुष्ट किया है. इसलिए इस मामले में उनका आपराधिक षड्यंत्र साबित हो जाता है. वे चाहकर भी इस वित्तीय अपराध से बच नहीं सकते. सरयू राय ने स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता को सलाह दी है कि वे बन्ना जी को चाहिए कि वे अपना अपराध स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री को इसकी सजा निर्धारित करने के लिए कहें और सजा स्वीकार करने की मानसिकता बनायें. सरयू राय ने मुख्यमंत्री को फिर सलाह दी है कि वे बन्ना गुप्ता को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त करें और उनके विरुद्ध एसीबी से जांच करायें.
सरयू ने बतायी फाइल की चाल
31 मार्च 2022 – कोषागार से मंजूरी के बाद PMU पहुंचा भुगतान
“स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और उनके मंत्री कोषांग के अन्य 59 कर्मियों के कोविड प्रोत्साहन राशि का विपत्र स्वास्थ्य विभाग से सरकार के “प्रोजेक्ट बिल्डिंग कोषागार” में 31 मार्च 2022 को रात 9 बजे भुगतान करने के लिए पहुंचा. कोषागार ने भुगतान की स्वीकृति दे दी. यह भुगतान मंत्री एवं अन्य कर्मियों के बैंक खाता में भेजने के लिए झारखंड सरकार के वित्त विभाग के कम्प्यूटराइज्ड पीएमयू (प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट) के पास चला गया.”
31 मार्च की 11 बजे बंद हुआ RBI का सर्वर, PMU नहीं भेज सका भुगतान और पैसा लैप्स हो गया
“मार्च लूट पर अंकुश लगाने के लिए भारत के रिजर्व बैंक ने सख़्त हिदायत दी थी कि रात के 11 बजे के बाद वह कोई भी भुगतान करने की इजाजत नहीं देगा और रिजर्व बैंक ने अपना सर्वर 31 मार्च 2022 की रात 11 बजे बंद कर दिया. इस बीच राज्य भर से आने वाले भुगतेय विपत्रों की अधिकता के कारण झारखंड सरकार के पीएमयु पर बोझ बढ़ जाने के कारण उसका सर्वर धीमा हो गया और पीएमयू का सर्वर मंत्री एवं उनके कोषांग के कर्मियों का भुगतान रिजर्व बैंक के सर्वर में रात 11 बजे तक नहीं भेज पाया. रात के ठीक 11 बजे रिजर्व बैंक ने अपना लेनदेन सर्वर बंद कर दिया, जिस कारण प्रोत्साहन राशि का पैसा सरकार के कोषागार से मंत्री बन्ना गुप्ता और उनके कोषांग के अन्य कर्मियों के बैंक खाते में स्थानांतरित नहीं हो पाया, और लैप्स (व्ययगत) हो गया.”
सरकारी तिजोरी से चोरी करने की मंत्री का प्रयास कामयाब नहीं हो पाया
“मजबूरी का नाम महात्मा गांधी वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए बन्ना गुप्ता अब कह रहे हैं कि नैतिक आधार पर वे प्रोत्साहन राशि का भुगतान नहीं लेंगे. चूंकि गत 31 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त हो गया और बन्ना गुप्ता एवं अन्य के बैंक खाते में स्वास्थ्य विभाग द्वारा भेजी गयी प्रोत्साहन राशि लैप्स हो गयी, इसलिए बन्ना जी अब सिर पटक कर रह जायें, तब भी प्रोत्साहन राशि का यह पैसा उनके बैंक खाता में नहीं पहुंच पायेगा. इस प्रकार अपना पहले का आदेश रद्द करने की उनकी घोषणा भी लफ्फाजी है. उन्होंने प्रोत्साहन राशि लेने का जी-तोड़ प्रयास किया. उनके अधिकारी कोषागार कर्मियों के सामने नाक रगड़ते रह गये. पर विलंब से विपत्र भेजे जाने, राज्य सरकार का सर्वर धीमा हो जाने, रात 11 बजे के बाद रिजर्व बैंक का सर्वर बंद हो जाने के कारण प्रोत्साहन राशि इनके बैंक खाते में नहीं जा पायी. 1 अप्रैल 2022 से से वित्तीय वर्ष बदल जाने के कारण यह राशि लैप्स हो गयी. सरकारी तिजोरी से चोरी करने की मंत्री का प्रयास कामयाब नहीं हो पाया.”
षडयंत्र के साक्ष्य हैं, छटपटाहट और गलतबयानी सजा से छुटकारा नहीं दिला सकती
“भुगतान संबंधी समस्त वित्तीय एवं विभागीय प्रक्रियाओं में स्वास्थ्य विभाग की संबंधित संचिका पर स्वास्थ्य मंत्री के नाते बन्ना जी के हस्ताक्षर हैं. प्रोत्साहन राशि के विपत्र भुगतान हेतु कोषागार भेजे जाने वाली स्वास्थ्य विभाग की संचिका पर भी इनके हस्ताक्षर हैं, इन्होंने इसे संपुष्ट किया है. इसलिए इस मामले में उनका अपराधिक षड्यंत्र साबित हो जाता है. वे चाहकर भी इस वित्तीय अपराध से बच नहीं सकते, मुक्त नहीं हो सकते. उनकी छटपटाहट और ग़लतबयानी उन्हें सजा से छुटकारा नहीं दिला सकती.”
कोषागार से विपत्र की प्रतियां गायब करा सकते हैं लेकिन PMU जाने के प्रमाण नहीं मिटा सकते
सरयू राय ने कहा है कि एक षड्यंत्र ये लोग कर सकते हैं कि सरकार के वित्त विभाग पर दबाव बनाकर कोषागार से विपत्र की प्रतियां गायब करायें. गत 14 अप्रैल को छुट्टी के दिन स्वास्थ्य विभाग का कार्यालय खोलकर संचिका में छेड़छाड़ की नीयत से इन्होंने प्रयास किया है कि विभाग से राजकीय कोषागार में विपत्र भेजने के प्रमाण ये स्वास्थ्य विभाग की संचिका से गायब करा दें. पर ऐसा कर वे एक और अक्षम्य अपराध कर रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग से प्रोत्साहन राशि के भुगतान के विपत्र प्रोजेक्ट बिल्डिंग कोषागार भेजने, कोषागार में विपत्र पास होने तथा भुगतान के लिए पीएमयू जाने के प्रमाण को ये चाहकर भी मिटा नहीं सकते. केवल कोषागार पदाधिकारी पर दबाव बनाने से यह संभव नहीं है. भुगतान कराने के इस निष्फल प्रयास के प्रमाण पूर्णतः सुरक्षित हैं. स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा लेखा महानिरीक्षक कार्यालय को इस संबंध में भेजा गया एक परिपत्र मैं कल सार्वजनिक कर चुका हूं.
बन्ना गुप्ता को बर्खास्त कर एसीबी जांच करायें मुख्यमंत्री
सरयू राय ने आगे कहा है – “मैं समझता हूं कि कल शाम रांची में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित कर बन्ना गुप्ता ने जो सवाल मेरी ओर उछाला है, उपर्युक्त विवरण से उसका जवाब उन्हें मिल गया है. नैतिकता की बात करते हैं, तो बन्ना जी को चाहिए कि वे अपना अपराध स्वीकार कर लें, मुख्यमंत्री को इसकी सजा निर्धारित करने के लिए कहें और सजा स्वीकार करने की मानसिकता बनायें. मुख्यमंत्री बन्ना गुप्ता को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त करें और इनके विरुद्ध एसीबी से जांच करायें.




