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सरयू बोले पणिक्कर कंबल घोटाला को लेकर जांच के लिए हुईं थीं तैयार, इसी शर्त पर गया था खूंटी, पणिक्कर ने कहा-हां, हो निष्पक्ष जांच

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Akshay/Guarav

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Ranchi: सात जनवरी को राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने खूंटी में रंगीला फाउंडेशन के फूड ऑन व्हील्स का उद्घाटन किया था. रंगीला फाउंडेशन की चेयरपर्सन रेणु गोपीनाथ पणिक्कर हैं. इन्हीं के कार्यकाल में झारक्राफ्ट में कंबल घोटाला हुआ था. मामले को सबसे पहले न्यूज विंग ने सामने लाया था. इसके बाद दूसरे मीडिया हाउस ने भी कंबल घोटाला के बारे में खूब लिखा. इसी क्रम में खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने 26 अप्रैल 2018 को मुख्यमंत्री रघुवर दास को एक चिट्ठी लिखी. चिट्ठी में उन्होंने पूरे मामले को गंभीरता से लेने और किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने को कहा था. एजी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा है कि मामले में करीब 19 करोड़ का घोटाला हुआ है. बहरहाल, सरयू राय के खूंटी जाने और पणिक्कर की संस्था के आयोजन में बतौर चीफ गेस्ट पहुंचने पर सरयू राय ने न्यूज विंग से बात की.

जांच के लिए हुईं थीं तैयार, तभी गया उद्घाटन समारोह मेंः सरयू राय

मंत्री सरयू राय ने न्यूज विंग से एक्सक्लूसिव बात के दौरान कहा कि मेरे खूंटी जाने और रंगीला फाउंडेशन के कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट पहुंचने पर मीडिया ने आश्चर्य व्यक्त किया है. क्योंकि कंबल घोटाला में निष्पक्ष जांच हो इसके लिए मैंने हस्तक्षेप किया था. रेणु पणिक्कर मेरे पास दो बार आयी थीं. मैंने यह शर्त रखी थी कि यदि यह स्वीकार करेंगी कि वो घोटाले की जांच कराने के लिए तैयार हैं, तो मैं जाऊंगा. उन्होंने मेरी इस शर्त पर सहमति जतायी थी. उनका कहना था कि मेरी इसमें कोई भागीदारी नहीं है. मैंने काम किया है और मुझे लोगों ने बदनाम करने के लिए, वहां से बाहर करने के लिए एक साजिश रची थी. तो मेरा कहना है कि अगर साजिश हुई है तो साजिश की जांच होनी चाहिए. सीएजी मानता है कि पानीपत से कंबल के लिए धागा आने-जाने में गड़बड़ी हुई है. ट्रांस्पोर्टिंग का कोई प्रमाण नहीं मिल रहा है.

आखिर कंबल खरीदा किसने और कहां से

आगे उन्होंने कहा कि सीएजी को जितना ऑडिट करना था उतना किया. लेकिन बात इससे आगे जाती है. कंबल बंटा है. डीसी लोगों के पास कंबल गया है. तो कंबल आया कहां से. सरकार अगर सीएजी की रिपोर्ट को स्वीकार करती है. तो उसको मानना पड़ेगा कि गड़बड़झाला हुआ है. सीएजी की रिपोर्ट के हिसाब से कंबल बना नहीं है. झारक्राफ्ट का कहना है कि कंबल बना है. तो सवाल यह है कि जो कंबल बंटा है वो आया कहां से. सीएजी की रिपोर्ट से संकेत यह मिलता है कि बाजार से कंबल खरीद कर बांट दिया गया. तो कहां से कंबल खरीदा गया. किसने खरीदा. इतने बड़े पैमाने पर लाखों कंबल कहां से खरीदे गए. यह जांच का एक बिंदु है, इसपर जांच होनी चाहिए.

अमित खरे की चिट्ठी को रद्दी में किसने डाली

किसी भी राज्य में मुख्य सचिव के बाद विकास आयुक्त का स्थान आता है. अमित खरे विकास आयुक्त थे. उन्होंने सारी जांच रिपोर्ट देखी और निगरानी से जांच कराने को कहा. उस समय उद्योग सचिव फिलहाल मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव हैं. उद्योग सचिव ने उनके आदेश को नहीं माना. विकास आयुक्त के आदेश का उल्लंघन अगर उद्योग सचिव ने किया तो इसके पीछे तर्क क्या है. इस आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल कर उद्योग सचिव ने घोषित किया कि 28 लोगों की कमेटी बन गयी, हर प्रमंडल में जांच करने के लिए सात ग्रुप बने हैं. सभी में चार-चार लोग हैं. इसका आदेश किसने दिया. जिस व्यक्ति ने आदेश दिया उस व्यक्ति ने कोई तर्क देखा या सुना कि नहीं. अगर आदेश तर्कपूर्ण था, विधिसमत्त था, कानून पर आधारित था, तो आदेश को नहीं माने जाने का तो कोई कारण नहीं था. एसीबी जांच कर लेती तो आज पर्दा उठ जाता.

के रविकुमार कहते हैं कर दिया मुकदमा, पणिक्कर कहती हैं कोई केस नहीं हुआ

के रविकुमार उस वक्त झारक्राफ्ट के एमडी थे. उद्योग विभाग में निदेशक थे. आज उद्योग विभाग के सचिव हैं. वो भी निदेशक के ही पे स्केल पर. उन्होंने अखबार में बयान दिया था कि रेणु पणिक्कर ने जो मेरे ऊपर आरोप लगाया है, मैं उसके बारे में मानहानि का मुकदना कोर्ट में दर्ज कराऊंगा. मैंने भी उनसे दो-तीन बार पूछा कि क्या हुआ मुकदमा का उन्होंने कहा कि प्रक्रिया चल रही है. अखबार में यह भी आया कि मानहानि के मुकदमे के लिए अनुमति मांगी है. मुझे के रविकुमार ने कहा है कि मैंने मुकदमा दायर कर दिया है. वहीं रेणु पणिक्कर कह रही हैं कि मेरे ऊपर कोई मुकदमा दायर ही नहीं हुआ है. इनमें कौन सही है. यह भी सामने आना चाहिए. एक बड़ा अधिकारी जो कह रहा है, वो हो नहीं रहा है. मुझे लगता है कि कंबल घोटाला की जांच अगर होती है, तो वो जांच मोमेंटम झारखंड की तह तक जाएगी. मोमेंटम झारखंड में जैसी गतिविधियां हुईं हैं. जो लोग शामिल रहे हैं अगर जांच में उन लोगों की भी सहभागिता है और वो लोग आनाकानी कर रहे हैं. इसका मतलब कि दबाव दो जगह से है. शंका अगर है तो जांच कराने में क्या हर्ज है.

पणिक्कर ने पहले कहा, मैं कंबल के बारे बात नहीं करूंगी, फिर कहा- हां हो निष्पक्ष जांच

न्यूज विंग से बात करते हुए झारक्राफ्ट की तत्कालीन सीईओ रेणु गोपीनाथ पणिक्कर ने कहा कि मैं कंबल घोटला के बारे में कोई बात नहीं करुंगी. I am not ready to talk on blanket. कहा कि जांच हो रही है, जो रिपोर्ट आएगी उसी के अनुसार जो उनको करना होगा वो करेंगे. मेरा इस चीज से कोई संबंध नहीं है. मेरे आने से पहले कंबल का प्रोडक्शन चालू हुआ था. मेरा झारक्राफ्ट में चेक साइन करने का कोई अधिकार नहीं था. जो चेक साइन करते थे वो कोई और अधिकारी थे. मेरा झारक्राफ्ट से कोई संबंध नहीं है, और किसी भी कीमत पर कंबल के बारे में कोई बात करने के लिए तैयार भी नहीं हूं. मैंने अपना एनजीओ चालू किया है आपको इसके बारे में कोई बात करनी है तो करें. आप खुद जाओ, खुद पता करो. जो जांच हो रही है उस टीम से आप बात करो. मैं रिजाइन कर चुकी हूं. चार महीने हो चुके हैं.  I have no idea about Jharcraft. जांच हो रही होगी, किसी से भी जांच कराएं मैं तैयार हूं. ये तो मैंने आज नहीं छह महीने पहले कहा था. सरयू राय जी ने मेरे बारे में कोई चिट्ठी नहीं लिखी है, उन्होंने चिट्ठी ये लिखी है कि उसकी जांच हो. निष्पक्ष जांच हो. सारे अधिकारीगण चाहते हैं कि निष्पक्ष जांच हो. ये मेरे अकेले का स्टेटमेंट नहीं है. मैं यह चाहती हूं निष्पक्ष जांच हो. और मेरा इससे कोई कनेक्शन नहीं है. ये मीडिया का बनाया हुआ एक हव्वा है. एजी की रिपोर्ट में भी कहीं नहीं लिखा है कि सीइओ ने घोटाला किया है ऐसा. झारक्राफ्ट में एक रुपये का भी डीसिजन सीईओ, सीएफओ नहीं लेते. सारा एमडी लेते हैं. मैंने रिजाइन बस इसलिए किया कि उस समय के जो एमडी थे, मेरा और उनका काम करने का तरीका आपस में मेल नहीं खा रहा था.

कमीशनखोरीवाले झारखंड को मैं अकेली महिला नहीं सुधार सकती

आगे बात करते हुए उन्होंने कहा कि जो झारखंड कई सालों से कमीशनखोरी में पला-बढ़ा स्टेट है, मैं अकेली महिला कहां से चेंज कर पाऊंगी. एक पैसा भी रिलीज नहीं हुआ है झारक्राफट को. लेबर डिपार्टमेंट से जाकर पूछिए जिन्होंने कंबल का ऑर्डर दिया था. आपने झारक्राफट को कितना पेमेंट किया है.

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