
Amit Jha
Ranchi: मंगलवार को प्रदेश के कांग्रेसी नेता राहुल गांधी के पास हाजिरी लगाने गये थे. गिला शिकवा उनके पास रखा. 12वें मंत्री के बर्थ पर भी बात की. इसके बाद राहुल ने साफ साफ कहा कि कोई भी समझौता पार्टी के घोषणा पत्र के ऊपर नहीं है. इसके मुताबिक लोक कल्याण, लोगों के हित को सुनिश्चित करने पर काम हो. आलम यह है कि हेमंत सरकार में कांग्रेस के पास चार अहम मंत्रालय हैं. रामेश्वर उरांव के पास वित्त और खाद्य आपूर्ति, आलमगीर आलम के पास ग्रामीण विकास और पंचायती राज, बादल के पास कृषि, पशुपालन और सहकारिता तथा बन्ना गुप्ता के पास स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन मंत्रालय का जिम्मा है. हालांकि स्थिति यह है कि अपने अपने विभागों में ही पार्टी के जन घोषणा पत्र को लागू कराने में कांग्रेसी मंत्रियों का परफॉर्मेंश उम्मीदों से पीछे ही है. कहा जाये कि अब तक वे फिसड्डी ही साबित हुए हैं.
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आइये आज पहली कड़ी में देखें खाद्य आपूर्ति विभाग का क्या है हाल
राशन में जारी है कमीशनखोरी
अब भी करीब 60 लाख कार्डधारकों को नियमतः 35 किलो चावल नसीब नहीं हो रहा जबकि इसके लिये वादा था. इसमें 2-3 किलो तक कटौती हो ही रही है. घोषणा पत्र के विपरीत कार्डधारकों को दाल, तेल मिल ही नहीं रहा है. केवल जून 2020 में ही कुछ समय के लिये दाल मिली थी. केवल अंत्योदय कार्ड वालों को चीनी मिलती है वह भी समय पर और गारंटी के साथ नहीं. रेगुलर राशन दिये जाने की गारंटी दो सालों में भी तय नहीं पायी है. पिछले साल अक्टूबर- नवंबर (2021) के दौरान कार्डधारकों को राशन मिल ही नहीं पाया था.
पार्टी ने घोषणा की थी कि राशन वितरण की समस्या दूर करने को वह चलती फिरती राशन दुकान सेवा शुरू करेगी. पर यह अब तक शुरू नहीं हो सकी है. डाकिया योजना के तहत चौबीसों जिलों में आदिम जनजाति परिवारों के घर राशन पहुंचाने की व्यवस्था को दुरूस्त करने की बात थी. पर हकीकत यह है कि 35 किलो के पैकेट की बजाये 30-32 किलो का ही पैकेट उन तक पहुंच रहा. वह भी रेगुलर नहीं. मिड डे मील के तहत वित्तीय राशि बढ़ायी जायेगी पर इसमें भी बदलाव नहीं हुआ है.
स्थानीय स्तर पर उत्पादित होने वाले अनाजों (मडुआ, मकई, मोटा अनाज व अन्य) को शामिल करने की बात थी. इससे स्थानीय उत्पादन और उत्पादों को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद थी पर इस दिशा में भी पहल अब तक नहीं की जा सकी है.
पीएम मातृ वंदना में सुधार की दरकार
आधार से लिंक ना होने से करीब 12 लाख सदस्यों का कार्ड अक्टूबर 2020 में रद्द कर दिया गया था. अब भी फिर से सबों को पुरानी स्थिति में नहीं लाया जा सका है. फिर से सबों को नया राशन कार्ड नहीं मिल पाया है. अधिक से अधिक लोगों को पीडीएस से जोड़ने की मुहिम भी कागजी कोरम वाली है. पीएम मातृ वंदना का लाभ सभी लाभार्थियों को दिलाने का मसला भी कमजोर है. बल्कि देश भर में झारखंड में सबसे बुरी हालत है. योजना का लाभ केवल सिंगल चाइल्ड के लिये मिलता है. लंबा चौड़ा फॉर्मेट है जिसे भरना मुश्किल है. ऐसे में इसके जरिये 5000 रुपये तक का लाभ ले पाना ग्रामीण माताओं के लिये आसान नहीं.
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