
Ranchi: राज्य में सीएनटी एक्ट (छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908) के तहत चयनित क्लास के लोगों को ही विभिन्न तरह का लाभ दिए जाने का प्रावधान है. आरटीआई एक्टिविस्ट सुनील खंडेलवाल ने इस संबंध में राज्य सरकार से जानकारी मांगी थी कि यहां किन्हें सीएनटी एक्ट के दायरे में शामिल किया गया है.
इससे संबंधित जवाब पिछले दिनों उन्हें भेजे गये. इसमें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, झारखंड की ओर से सूचना दी गयी है कि बिहार शिड्यूल्ड एरियाज रेगुलेशन में लिस्ट ऑफ बैकवर्ड क्लासेज के संदर्भ में जून 1962 में निर्गत नोटिफिकेशन (नो सं-ए/टि-3043/61-5423-आर) में अंकित जातियां ही प्रवर्तनीय हैं. इस सूची में शामिल जातियों के अलावा किसी अन्य पर यह लागू नहीं होता है.
लिस्ट में शामिल जातियां जो सीएनटी के दायरे में आती हैं
शिड्यूल ट्राइब- असुर, बैगा, बंजारा, बटहुडी, बिंझिया, बिरहोर, बेदिया, बिरिजिया, चिरो, चिक-बराईक, गोंड, गोरैत, हो, करमाली, खैरा, खीवार, खोनल, किसन, कोरा, करवा, लोहारा या लोहार, महली, माल पहाड़िया, मुंडा, उरांव, पहाड़िया, संथाल, सौरिया पहाड़िया, सावर इसके अलावा रांची, साहेबगंज, हजारीबाग और संथाल परगना में रहनेवाले भूमिज को भी इसमें जगह दी गयी है.
शिड्यूल कास्ट (एससी)- बाउरी, बनतार, भोगता, चमार या मोची, चौपाल, धोबी, डोम या ढांगर, दुसाध, धारी या धाती, घारी, हलाल खोर, हरि, मेहतार या वांगी, कंजर, कुरियार, लालबेगी, दावपर, मुसहर, नट, पान या खवासी, पासी, रजवाड़, तूरी. इसके अलावा पलामू जिले के भूमिज या भूईयां को भी इस श्रेणी में माना गया है.
बैकवर्ड क्लासेज (बीसी)- इस लिस्ट में 4 दर्जन से अधिक जाति समूहों को शामिल किया गया है. मुख्य रूप से बारी, बानापार, बेलदार, भटियारा, बिंद, चिंक (मुस्लिम), डफाली (मुस्लिम), धानुक, धोबी (मुस्लिम), गोरही, हजाम, कहार, कसाब (कसाई मुस्लिम), केवट, खटिक, माली, धुनिया (मुस्लिम), मेहतर, शिकारा, गुलगुलिया, कवार, भूईयां, मझवार, तांती व अन्य को रखा गया है.




