
Ranchi: झारखंड में आरटीआई मजाक बनकर रह गया है. सूचना के अधिकार को लेकर आए कई मामले सामने आते रहते हैं जिसमें इसके तहत मांगी गई सूचनाएं न तो समय पर दी जाती हैं और न ही इसे लेकर अधिकारी या जनसूचना पदाधिकारी ही सजग नजर आते हैं. अब राज्य में एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है जिसमें आवेदक से पहले सूचना देने के नाम पर 74 हजार पन्नों के नाम पर लगभग डेढ़ लाख रूपए अंचल कार्यालय में जमा कराए जाते हैं. बाद में जब जानकारी देने का समय आया तो केवल 48 हजार पन्नों में सूचना देकर 50 हजार से अधिक रूपए की गड़बड़ी कर ली गई.
मामला रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड का
मामला बिनु कुमार महतो से जुड़ा हुआ है. बिनु कुमार महतो आरटीआई (RTI) के मामले में ठगी के शिकार हो गये हैं. उन्होंने गोला के बीडीओ सह जन सूचना पदाधिकारी से 6 मई 2023 को 14वीं और 15वीं वित्त से गोला प्रखंड में कराये गये कार्यों के लिए सूचना की मांग की थी. इसके बाद बीडीओ के पत्र के आधार पर आवेदक ने 74 हजार 500 पृष्ठों के एवज में 1.49 लाख रुपये (प्रति पृष्ठ 2 रुपए) प्रखंड नजारत कार्यालय में जमा कराया.
65 दिनों बाद उन्हें 11 जुलाई को जब इससे संबंधित सूचनाएं उपलब्ध करायी गयी. तो उन्हें 74500 पन्नों की जगह जवाब केवल 48207 पन्नों में ही मिले. जबाब सौंपे जाने के दौरान ब्लॉकर्मियों ने कम पन्नों में सूचनाएं देने से संबंधित न तो कोई जानकारी दी और न ही बकाए पैसे वापस करने के संबंध में ही कुछ कहा. अब बिनु महतो निराश हैं. कहा है कि यदि उनके द्वारा जमा राशि 1.49 लाख रुपये वापस नहीं किये गये और प्रावधान के मुताबिक निःशुल्क संपूर्ण सूचनाएं नहीं दी जाती हैं तो वे सक्षम प्राधिकार में बीडीओ के खिलाफ शिकायत दर्ज करेंगे.
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क्या कहते हैं आवेदक बिनु महतो
बिनु महतो के मुताबिक 6 मई को सूचना का अधिकार आवेदन के मामले में उन्होंने 74500 पृष्ठों की सूचना के लिए करीब डेढ़ लाख रुपये जमा कराए. पर पैसे जमा कराने पर भी समय रहते सूचना नहीं मिली. आवेदन करने के करीब 65 दिनों बाद 11 जुलाई को गोला प्रखंड से छ: सदस्यीय टीम उनके पास पास ब्लॉक के एक चारपहिया गाड़ी से आयी. जबरन अधूरी सूचना के बंडल को थमा दिया. जबरदस्ती टंकित रिसिविंग कागजात में हस्ताक्षर ले लिया गया.
प्रखंड के छ: सदस्यीय टीम में लिपिक ब्रजेश कुमार, जेई प्रियंका कुमारी, लेखा सहायक विनय कुमार, प्रखंड समन्वयक अशोक कुमार, अनुसेवक विजेन्द्र कुमार तथा जीप चालक मंटू कुमार थे. उन्होंने बगैर सूचना के पृष्ठों की गणना किये ही आधी-अधूरी सूचनाएं उन्हें जबरन थमा दी. हालांकि रिसिविंग में सूचना के पृष्ठों का उल्लेख नहीं किया गया. इस वारदात के बाद जब उन्होंने सूचना के पृष्ठों की गणना की तो 74,500 की जगह मात्र 48,207 पृष्ठ ही मिले जिनमें सूचनाएं अधूरी हैं. 14वें एवं 15वें वित आयोग मद का वर्ष 2020 से 2023 की सूचना की मांग की थी. पर इसकी बजाये सन् 2017 से 2019 तक की पूरानी सूचनाओं को उन्हें दिया गया.




