
Palamu: पलामू जिले में समाज कल्याण विभाग द्वारा सरकारी नियमों को ताक पर रखकर सेविका-सहायिका का चयन किया जा रहा है. प्रभारी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी शत्रुंजय कुमार स्वयं नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं तो फिर कनीय पदाधिकारियों की बात ही कुछ और है. सूत्रों के अनुसार सेविका-सहायिका चयन हेतु समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग के पत्रांक 585 दिनांक 02 जून 2006 के जिन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने का आदेश चयन समिति को दिया जाता है, उस नियम का अनुपालन वरीय अधिकारी ही नहीं करते हैं. इसका ताजा उदाहरण जिला समाज कल्याण पदाधिकारी द्वारा 21 फरवरी 2019 को निर्गत वह पत्र है, जिसके अनुसार एक सप्ताह की सूचना देकर रिक्त पदों पर सेविका-सहायिका का चयन करने का आदेश सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को दिया गया है. गौरतलब तो यह है कि चयन के आदेश के बाद भी 23 फरवरी को कई सेविका-सहायिका के चयन का अनुमोदन किया गया.
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15 दिनों में की जानी आमसभा
विभागीय नियमानुसार कम से कम पन्द्रह दिनों की अग्रिम सूचना देकर लाभान्वितों की आमसभा की बैठक आहूत की जानी है. इसका प्रचार-प्रसार अन्य माध्यमों के अलावे समाचार पत्र के माध्यम से भी कराने का प्रावधान है, जिसका अनुपालन नहीं किया गया है. आम सभा की बैठक के समय भी चयन समिति के लिए 30 माताओं का कोरम अनिवार्य है, जो 80 प्रतिशत आम सभाओं में नहीं किया गया है. चयन में स्वयंसेवी संस्थाओं की भी सहायता लेने का निर्देश है, जिसका अनुपालन 2008 से लेकर अब तक नहीं किया गया है. चयनित सेविका-सहायिका की सूची जिला समाज कल्याण पदाधिकारी के माध्यम से उपविकास आयुक्त को अनुमोदन हेतु भेजी जायेगी, जिसे प्राप्ति की तिथि से 15 दिनों के अंदर उसका अनुमोदन उपविकास आयुक्त निश्चित रूप से कर देंगें. बताया जाता है कि चयनित सूची को छह माह से सालभर तक भी जिला समाज कल्याण कार्यालय से उपविकास आयुक्त को भेजा ही नहीं जाता है.
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इस तरह बरती गयी अनियमितता
जब रंजना कुमारी प्रभारी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी थी तो शिवेन्दु नामक एक दलाल के माध्यम से अनुचित राशि की उगाही के पश्चात ही अनुमोदन के लिए सूची भेजी जाती थी. अन्यथा उसे रद्द कर दिया जाता था. पांकी हरिजन टोला के लिये उच्च योग्यताधारी (एमए उत्तीर्ण) सेविका का चयन किया गया था. इसके बावजूद उसे रद्द कर दिया गया. जब प्रशिक्षु आइएएस रोनीटा रम्मैया जिला समाज कल्याण पदाधिकारी के प्रभार में थी तो छह माह से लेकर सालभर तक लंबित कई चयनित सेविका-सहायिका की सूची उपविकास आयुक्त से अनुमोदित करायी थीं. नियमानुसार अगर 15 दिनों के अंदर उपविकास आयुक्त द्वारा अनुमोदित नहीं की जाती है तो बाल विकास परियोजना पदाधिकारी उक्त चयनित सूची को समाज कल्याण विभाग के निदेशक को अनुमोदन के लिये भेजेंगें, लेकिन इस नियम का अनुपालन अब तक किसी भी मामले में नहीं किया गया.
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सेविका चयन में पांकी बीडीओ एवं ग्रामीण भिड़े, मामला दर्ज
जिले में चल रहे सेविका चयन अभियान के तहत पांकी बाल विकास परियोजना के सरईडीह गांव में आंगनबाड़ी सेविका चयन को लेकर शुक्रवार को आमसभा बुलाई गई थी. आमसभा में बीडीओ सह प्रभारी सीडीपीओ इंद्रलाल ओहदार चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में आमसभा में पहुंचे थे, जबकि संयोजिका के तौर पर महिला पर्यवेक्षिका रंजना उपस्थित थी. चयन की कारवाई प्रारम्भ हुई तो कई आवेदिकाओं ने सेविका पद के लिए आवेदन दिया.
बीडीओ के खिलाफ हुए ग्रामीण
आमसभा के निर्णय के विरुद्ध बीडीओ अपनी मर्जी के अनुसार सेविका का चयन करना चाह रहे थे. इसका ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया और आमसभा रद्द करने की मांग करने लगे. किन्तु बीडीओ श्री ओहदार ग्रामीणों को झूठा केस में फंसाने की धमकी देने लगे और कार्यवाही पुस्तिका लेकर भागना चाहे. तब क्रोधित ग्रामीणों और बीडीओ के बीच झड़प होने लगी. इस बीच ग्रामीणों ने कार्यवाही पुस्तिका फाड़ दी.
पर्यवेक्षिका की जगह बड़ा बाबू को प्राथमिकता
आश्चर्य की बात तो यह है कि आम सभा में बीडीओ परियोजना कार्यालय के बड़ा बाबू को भी साथ ले गए थे, जबकि चयन समिति में महिला पर्यवेक्षिका संयोजिका के रूप में रहती है तथा कार्यवाही पुस्तिका की सारी जिम्मेवारी उसी के अधीन रहती है. किन्तु बीडीओ की मनमानी के आगे कार्यालय सहायक की एक न चली. बताया जाता है कि सभी आमसभा में बीडीओ कार्यालय के बड़ा बाबू को लेकर ही जाते हैं जो नियमविरुद्ध है.
पांकी थाना में मामला दर्ज
बीडीओ ने बड़ा बाबू गोपाल चैधरी के माध्यम से सरकारी कार्य में बाधा डालने, दुर्व्यवहार करने एवं सरकारी कागजात फाड़ने के आरोप में पांकी थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है. पांकी थाना प्रभारी पीके यादव ने इसकी पुष्टि की है और कहा कि पूरे मामले की जांच की जायेगी.
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