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बालाकोट एयर स्‍ट्राइक से माहौल बदला,  मोदी विरोधी पस्त, सुर बदल रहे हैं खरी खोटी सुनाने वाले

NewDelhi :  पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायु सेना द्वारा किये गये एयर स्ट्राइक के बाद पीएम मोदी के समर्थन में आते लोगों को लेकर कूमी कपूर ने इंडियन एक्सप्रेस में छपे अपने साप्ताहिक लेख में राजनीति के बदलते परिदृश़्य का वर्णन किया है.  उगते सूरज को सब कोई सलाम करता है. कूमी कपूर ने लिखा है कि  बालाकोट में भारतीय वायु सेना द्वारा की गयी एयर स्ट्राइक के बाद 2019 लोकसभा चुनाव के लिए पीएम मोदी की चर्चा जोरों पर है. वह लोकसभा चुनाव की होड़ में सबसे आगे हैं. लेख के अनुसार पुलावामा हमले के बाद पीएम मोदी को खरी खोटी सुनाने वाले लोगों के सुर बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद बदल गये हैं.   हाल ही में पीएम मोदी के आलोचक रहे एक गुजराती अखबार ने भी अपने सुर बदल लिये. पुलवामा हमले के बाद इस अखबार ने एक कार्टुन छापा था, जिसमें मोदी के कार्टून के साथ 56 इंच की कायरता नामक कैप्शन दिया गया था, लेकिन बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद इस कार्टून में तब्दीली आ गयी और इसी अखबार ने ऐसा ही कार्टून बनाते हुए लिखा 56 इंच का साहस.

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विपक्ष को लगता है कि मोदी ने मुद्दे ही खत्म कर दिये हैं

लेख में कहा गया कि संघ की पृष्ठभूमि वाले एक वरिष्ठ स्तंभकार ने कुछ दिन पूर्व लिखा था कि पीएम मोदी और अमित शाह देश को गर्त में ले जा रहे हैं.  लेकिन अब इस स्तंभकार ने लिखा है कि विपक्ष के वरिष्ठ नेता पानीपत की तीसरी लड़ाई लड़ेगे और मोदी इस बार लोकसभा चुनाव में 300 सीट जीत जायेंगे. विपक्ष को लगता है कि मोदी ने मुद्दे ही खत्म कर दिये हैं. विपक्ष के पास ऐसा लग रहा है मुद्दा ही नहीं है. इसलिए विपक्ष ने पीएम मोदी से पाकिस्तान के मुद्दे पर राजनीति नहीं करने की अपील भी की है. कहा कि कांग्रेस के सारे आयोजन असफल साबित हो रहे हैं. मसलन जिस दिन प्रियंका गांधी को अपने पहली प्रेस कॉफ्रेंस करनी थी उस दिन पुलवामा में हमला हुआ जिसकी वजह से उन्हें यह कॉफ्रेंस टालनी पड़ी. वह आकर कुछ क्षण का मौन रहकर चली गयीं. गुजरात में भी कांग्रेस कमेटी की बैठक एयर स्ट्राइक की वजह से टाल दी गयी.

इस क्रम में कांग्रेस पार्टी ने जयराम रमेश से राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर पार्टी के प्रस्ताव में कुछ बदलाव भी करने को भी कहा था.  वहीं, विपक्ष के नेताओं को संबोधित करने के लिए पीएम मोदी का सुषमा स्वराज को बुलाना खुद को सबसे अलग स्थापित करने की कोशिश थी. लेख का लब्बेालुआब यह कि राजनीति में हालात एक रात में बदल जाते हैं. चुनावों की तारीखों की घोषणा होनी अभी बाकी है.

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