
Chakradharpur : चक्रधरपुर के टोकलो रोड स्थित पवन बिस्किट फैक्टरी की करोड़ों की जमीन को बेच दी गयी, जबकि वर्तमान में बिजली विभाग का उस जमीन पर 78 लाख 88 हजार रुपया बकाया है. इस कारण से उस जमीन को खरीद कर मकान बनानेवालों को बिजली विभाग नया कनेक्शन नहीं दे रहा है. इस मामले को लेकर जमीन खरीदार ऋषभ छाबड़ा ने जमीन बेचने वालों के खिलाफ अनुमंडल पदाधिकारी और चक्रधरपुर थाना में लिखित शिकायत दर्ज करायी है. छाबड़ा ने दर्ज मामले में फर्जी जानकारी देकर जमीन बेचने का भी आरोप लगाया है.
बिजली विभाग केस कर बकाया वसूलेगा :कार्यपालक अभियंता
बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता अमित खलको ने बताया कि विभाग इस मामले में गंभीर है. सर्टिफिकेट केस कर बकाया बिजली राशि को वसूलने की तैयारी की जा रही है. जरूरत पड़ेगी तो कोर्ट से कुर्की-जब्ती का आदेश भी लिया जाएगा.
एक दर्जन से अधिक लोगों ने खरीदी है जमीन
पवन बिस्किट कंपनी की जमीन के खऱीदारों में ऋषभ छाबड़ा सहित दर्जनों लोग शामिल हैं. जब ऋषभ ने बिजली विभाग में आवेदन दिया, तो पता चला कि जमीन पर 78 लाख 88 हजार रुपया से अधिक बिजली बिल बकाया है, जिसका भुगतान नही हुआ है. इस कारण उनका आवेदन खारिज कर दिया गया. जबकि डीड में साफ-साफ लिखा गया है कि उस जमीन पर किसी प्रकार का कोई बकाया नहीं है. ऋषभ के आवेदन में कहा गया है कि उन्होंने मौजा चक्रधरपुर, वार्ड नंबर-6 के अंतर्गत खाता संख्या 88, 87, खेसरा संख्या 168 ,290 बीसी में कुल रकबा 13 डिसमिल 120 वर्गकड़ी जमीन पवन कुमार अग्रवाल तथा श्रद्धानंद अग्रवाल, दोनों वर्तमान निवासी 11 अब्दुल रसूल एवेन्यू कालीघाट कोलकाता एवं रामअवतार अग्रवाल सभी के पिता स्वर्ग पूरनचंद्र अग्रवाल सभी स्थाई निवासी वार्ड संख्या 6 पुराना रांची रोड से जमीन खरीदी है. जानकार सूत्रों के अनुसार अब तक 47 रजिस्ट्री हुई है, जिसमें करोड़ों रुपये की जमीन बिक्री हुई है.
बिजली विभाग की भी है काफी लापरवाही
झारखंड में 5 हजार रुपये से अधिक बिल बकाया होने पर बिजली विभाग तत्काल उसकी बिजली सप्लाई काट दी जा रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि पवन बिस्कुट फैक्ट्री पर 78 लाख 88 हजार रुपया का बकाया था, उस समय विभाग द्वारा तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की. यह लोगों में चर्चा का विषय है. बता दें कि पवन बिस्कुट फैक्ट्री में ब्रिटानिया का बिस्कुट बनता था, जहां सैकड़ों मजदूर काम करते थे. लेकिन राजनीतिक कारणों और मजदूरों का हवाला देकर 2008 में फैक्ट्री को बंद करके रायपुर ले जाया गया. इस कारण से हजारों मजदूर रातोंरात बेकार हो गये.
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