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रिम्सः डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर निगरानी करेगी डिटेक्टिव एजेंसी

Ranchi :  राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में सोमवार को गवर्निंग बॉडी की बैठक हुई. रिम्स में डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने के लिए डिटेक्टिव एजेंसी के सलेक्शन पर सहमति बनी. एजेंसी बतायेगी कि रिम्स के कौन-कौन से डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं. इसके बाद उन पर करवाई की जायेगी. इतना ही नहीं मैनपावर बढ़ाने के प्रस्ताव पर भी निर्णय लिया गया. इसके अलावा रिम्स की पुराने बिल्डिंग के मेंटेनेंस का डीपीआर तैयार करने को लेकर निर्णय लिया गया. वहीं पांच फ्लोर का ओपीडी ब्लॉक बनाया जायेगा. ये बातें गवर्निंग बॉडी की बैठक के बाद स्वास्थ्य मंत्री बनना गुप्ता ने कहीं.

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रिम्स गवर्निंग बॉडी के मेंबर सांसद संजय सेठ ने कहा कि डॉक्टरों की डिटेक्टिव एजेंसी से निगरानी कराना गलत है. वो कोई चोर या अपराधी नहीं हैं. वो पढ़ लिख कर आये हैं तो ऐसा तो नहीं होना चाहिए. प्रबंधन को चाहिए कि उन्हें सारी सुविधाएं दे जिससे उन्हें प्राइवेट प्रैक्टिस करने की जरूरत ही न पड़े. साथ ही कहा कि इसके लिए कोई और कदम उठाया जा सकता है.

न्यूरो वार्ड में जमीन पर मरीजों के इलाज पर उन्होंने कहा कि देश के किसी भी हॉस्पिटल में ऐसी व्यवस्था नहीं है. इसलिए प्रबंधन मरीजों के लिए व्यवस्था करे. वहीं ट्रॉमा सेंटर में सीटी स्कैन मशीन चालू करने पर उन्होंने कहा कि बिल्डिंग में काफी मरीज आते हैं. इसलिए यहां भी मशीन को चालू करें. जिससे मरीजों को दौड़ न लगानी पड़े.

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ये हुआ निर्णय

  • इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किये जायेंगे 1300 करोड़
  • रिम्स में खरीदी जायेगी एकमो मशीन
  • कैंसर पेशेंट की इलाज के लिए मशीन की खरीदारी
  • प्रोफ़ेसरों को रोटेशन के आधार पर 3 साल के लिए मिलेगी विभागाध्यक्ष  की जिम्मेवारी
  • 4th ग्रेड स्टाफ का होगा समायोजन
  • Rio बिल्डिंग का फिर से होगा टेंडर
  • 20 डायलिसिस मशीन पीपीपी मोड पर चलेगी
  • डॉक्टर्स के इंश्योरेंस पर किया जा रहा विचार
  • पेट स्कैन मशीन की भी खरीदारी
  • जिनके पास कोई कार्ड नहीं उनका भी फ्री इलाज

रिम्स में बढ़ाये जायेंगे 1 हजार बेड

रिम्स में एक हजार बेड बढ़ाने को लेकर भी जीबी ने मंजूरी दे दी है. जिसके तहत मैटरनिटी और चाइल्ड वार्ड के लिए 250-300 बेड होंगे. वहीं सुपरस्पेशियलिटी वार्ड में 700 बेड लगाये जायेंगे. जिससे कि इलाज के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी नहीं होगी. वहीं उन्हें जमीन पर इलाज नहीं कराना होगा.

बर्लिन हॉस्पिटल से टाइअप करेगा रिम्स

बर्लिन हॉस्पिटल में कैंसर के मरीजों के लिए पेट स्कैन मशीन उपलब्ध है. ऐसे में जबतक रिम्स में मशीन की खरीदारी नहीं होती तबतक यहां के मरीजों को थेरेपी के लिए बर्लिन हॉस्पिटल भेजा जायेगा. इसके लिए रिम्स बर्लिन हॉस्पिटल से टाई अप करेगा. जहां आयुष्मान कार्ड व सीजीएचएस रेट पर ट्रीटमेंट किया जायेगा.

हॉस्पिटल का होगा अपना इंजीनियरिंग सेल

फिलहाल रिम्स में भवन निर्माण विभाग, पीएचइडी, बिजली विभाग की शाखाएं काम कर रही हैं. इसके लिए रिम्स उन्हें बड़ी रकम का भुगतान करता है. लेकिन अब रिम्स का अपना इंजीनियरिंग सेल होगा. जिसमें हर विभाग एक साथ काम करेगा. वहीं इंजीनियरों को रिम्स रखेगा. इससे विभागों पर रिम्स की निर्भरता खत्म हो जायेगी. वहीं हॉस्पिटल की व्यवस्था दुरुस्त हो सकेगी.

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