
Ranchi: राज्य के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल रिम्स में मरीजों को सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सेंट्रल लैब को हाईटेक बनाया गया. वहीं उसमें डोनेट की गई पांच करोड़ रुपए की छह तरह की मशीनें लगाई गई. साथ ही कहा गया कि अब रिम्स में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को टेस्ट कराने के लिए प्राइवेट लैब की दौड़ नहीं लगानी होगी. इतना ही नहीं मरीजों के सभी तरह के टेस्ट एक ही छत के नीचे किए जाएंगे. लेकिन प्रबंधन इस मशीन का 10 परसेंट भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है. अब प्रबंधन ने 50 करोड़ रुपए की अलग-अलग टेस्ट मशीन खरीदने के लिए टेंडर निकाला है जो पहले से लगी इस मशीन की जगह लेगी. ऐसे में सवाल यह उठता है कि इस मशीन के रहते नई मशीनों की खरीदारी क्यों की जा रही है. इस मामले में जब रिम्स प्रबंधन से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.
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कैपेसिटी 10 हजार की, टेस्ट मात्र 900
डोनेशन में आई लेटेस्ट मशीन की कैपेसिटी एक दिन में 10 हजार सैंपल टेस्ट करने की है. इसके बावजूद लैब में मात्र 800-900 ही टेस्ट किए जा रहे है. जिससे समझा जा सकता है कि कैसे रिम्स प्रबंधन हॉस्पिटल में आने वाले मरीजों के ब्लड सैंपल टेस्ट को लेकर कितना गंभीर है. और प्रबंधन की इसी अनदेखी का फायदा दलाल और प्राइवेट लैब वाले उठा रहे है. जबकि डोनेशन में आई मशीन के लिए प्रबंधन को केवल टेस्ट में इस्तेमाल किया जाने वाला रीएजेंट (केमिकल) उपलब्ध कराना है.
2 हजार मरीज आते है ओपीडी में
हॉस्पिटल के ओपीडी में हर दिन 2000 से अधिक मरीज आ रहे है. जो इलाज के लिए अलग-अलग विभागों में जाते है. डॉक्टर मरीजों को टेस्ट भी लिखते है. लेकिन सभी मरीज टेस्ट के लिए सेंट्रल लैब के कलेक्शन सेंटर नहीं पहुंच पाते. प्राइवेट लैब के दलाल वहीं से टारगेट कर लेते है. और जल्दी टेस्ट कराने के नाम पर उन्हें अपने लैब में ले जा रहे है. वहीं इनडोर में भी हमेशा 1500 से अधिक मरीज इलाजरत रहते है. अगर सभी का ब्लड टेस्ट रिम्स में हो जाए तो मरीजों को बड़ी राहत मिल जाएगी.




