
Ranchi: झारखंड सचिवालय सेवा संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सहमति के आठ माह बाद भी अब तक सचिवालय सेवा के उप सचिव व संयुक्त सचिव के अतिरिक्त पदों का सृजन नहीं किए जाने पर रोष जताया है. अतिरिक्त पदों के सृजन का प्रस्ताव विगत आठ माह से प्रशासी पदवर्ग समिति के पास लंबित है, ऐसे में सचिवालय कर्मियों ने इस पर रोष जताते हुए कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो को ज्ञापन सौंपा है.
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सचिवालय सेवा के अध्यक्ष ध्रुव प्रसाद ने बताया कि राज्य सरकार अपने सेवी वर्ग को केंद्रीय सेवाशर्त के हुबहु वेतनमान एवं अन्य सुविधा प्रदान करने के लिए सैंद्धांतिक रूप से सहमत है. इसके साथ ही छठे केंद्रीय वेतनमान के परिप्र्रेक्ष्य में वित्त विभाग ने 28. फरवरी 2009 को एक आदेश निकाला था, जिसमें केद्रीय सेवाशर्त के अनुष्प नियमावली गठित करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है. उक्त निर्देश के 13 साल बाद झारखंड सचिवालय सेवा अंतर्गत पदों के पिरामीड स्ट्रक्चर को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार के सभी विभागों से आवश्यकता आधारित प्रतिवेदन प्राप्त कर समीक्षा के बाद उप सचिव एवं संयुक्त सचिव के अतिरिक्त पदों के सृजन के लिए मुख्यमंत्री से अनुमोदन लिया गया था.
इसके बाद वित्त विभाग के अंतर्गत प्रशासी पदवर्ग समिति की अनुशंसा व सहमति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन इसके आठ माह बाद भी अब तक कोई निर्णय नहीं आया है. संघ की ओर से यह भी बताया गया कि हर चार वर्षो में कैडर का पुनर्गठन किया जाना है, जो अभी तक नहीं हुआ है. ऐसे में पांच साल से लंबित इस मामले को अविलंब निपटारा करके विचाराधीन प्रस्ताव पर सहमति दिलायी जाये. कार्मिक सचिव प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यान से सुना और अविलंब कार्रवाई का आश्वासन दिया है. इस अवसर पर संघ के महासचिव सिद्वार्थ शंकर बेसरा सहित सचिवालय सेवा के कई अधिकारी मौजूद थे.




