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रांची में हो रही भूईंहरी जमीन की रजिस्ट्री, टॉउन रजिस्ट्री ऑफिस में सबसे ज्यादा केस

Ranchi: रांची की पहचान अब जमीन मामलो में हेराफेरी से हो रही है. मामला पल्स अस्पताल का हो या पूर्व सीएम हेमंत सोरेन से जुड़ा बड़गाई अंचल की जमीन. सभी ज़मीन भूईंहरी नेचर की है. रांची जिले में जमीन से जुड़े अधिकांश मामले इसी नेचर के होते हैं. राज्य में अलग-अलग जमीन की प्रकृति है. आदिवासीयों की जमीन संरक्षित करने के लिए कई कानून बने हैं. लेकिन इसके बावजूद आदिवासी परिवारों के हाथ से जमीन का हस्तांतरण और अवैध कब्जा होता जा रहा है. और इसका जीता-जगता प्रमाण राज्य की राजधानी रांची के कई प्रखंड हैं. रांची सभी प्रखंडों में भूईंहरी नेचर की जमीन की खरीद-बिक्री धड़ल्ले से हो रही है.

केस स्टडी 1– नगड़ी अंचल क्षेत्र के सपारोम मौजा में 86 डिसमिल, होटवासी में 1 एकड़ 11 डिसमिल और गुटवा मौजा की 1 एकड़ 64 भूईंहरी जमीन की रजिस्ट्री रजिस्ट्रार ने कर दी है.

केस स्टडी 2– कांके अंचल क्षेत्र में जमीन खरीद-बिक्री का मामला हमेशा सुर्खियों में रहता है. इस अंचल क्षेत्र के रुदिया मौजा में 1 एकड़ 5 डिसमिल, गागी में 3 एकड़, नगड़ी 4 एकड़ 2 डिसमिल, चामा 3 एकड़, बुकरु 43 डिसमिल और नेवारी मौजा में 65 डिसमिल भूईंहरी जमीन की रजिस्ट्री हुई है.

केस स्टडी 3– नामकूम अंचल के मल्टी मौजा में 33 डिसमिल और हेथु मौजा में 8.3 डिसमिल भूईंहरी जमीन की रजिस्ट्री कर दी गयी है.

भूईंहरी जमीन को जानें

झारखंड में अलग-अलग तरह की जमीन की प्रकृति है. आदिवासियों की जमीन संरक्षित करने के लिए कई कानून भी मौजूद हैं. इसके बाद भी आदिवासी परिवारों के हाथ से जमीन का हस्तांतरण एवं गैरकानूनी कब्जा होता रहा है. इसके कई उदहारण रांची में देखने को मिलते हैं. रांची शहर में इन दिनों कुछ बड़े निर्माणाधीन और तैयार हो चुके भवन विवादों में घिरते नजर जा रहे हैं. बरियातू रोड स्थित प्रेमसंस बल्डिंग अपार्टमेंट, राम प्यारी अस्पताल और पल्स अस्पताल पर सवाल उठे हैं. जानकारों का कहना है कि भुईंहरी जमीन का हस्तांतरण आदिवासियों के बीच भी नहीं हो सकता, न ही हस्तांतरण की कोई नियमावली बनी हुई है. सीएनटी एक्ट की धारा 48 में भुईंहरी जमीन की बिक्री पर रोक लगी हुई है. भुईंहरी जमीन पर अगर किसी व्यक्ति उपायुक्त की स्वीकृति के बाद विशेष प्रयोजन से लेता भी है, तो इसके बाद भी भुईंहरी जमीन की प्रजा का उस जमीन पर सीमित अधिकार है. इस जमीन का वह (उपायुक्त के परमिशन से जिसे मिला है- प्रजा) खरीद बिक्री नहीं कर सकता. चूंकि उपायुक्त के परमिशन से विशेष कार्य के लिए भुईंहरी जमीन ली गयी है ऐसे में अगर वह उस कार्य को नहीं करता, तब उस व्यक्ति का अधिकार स्वत: खत्म हो जाता है. इस जमीन की किसी भी सूरत में खरीद बिक्री नहीं की जा सकती.

इसे भी पढ़ें: किसी भी भुईंहरी जमीन का पूर्ण अधिकार का पट्टा नहीं हो सकता, न ही जमीन का स्वामित्व बदला जा सकता हैः रश्मि कात्यायन

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