
Ranchi: प्रदेश कांग्रेस सोमवार को अध्यक्ष राजेश ठाकुर की अगुवाई में एसबीआई और एलआईसी कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. मौके पर राजेश ठाकुर ने केंद्र सरकार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि एक-एक भारतवासी के पसीने से कमाई धनराशि अब खतरे में पड़ गई है. 40 करोड़ के लगभग निवेशक जिन्होंने अपनी जमा पूंजी एलआईसी में लगाई थी, उनके भविष्य का सवाल है और एलआईसी में जो अडानी एंटरप्राईसेस हैं, 1 प्रतिशत से बढ़ा कर एलआईसी ने 4.23 प्रतिशत अपना निवेश कर दिया उसमें किसके इशारे पर किया, क्यों किया? प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने कहा कि करोड़ों भारतीयों की जमा पूंजी डुबाने में साहेब ने कोई कसर नहीं छोड़ी है, हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में जो अडाणी पर आरोप लगे हैं उसकी जांच कब होगी ?
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क्या कहा कांग्रेस नेताओं ने:
मौके पर कार्यकारी अध्यक्ष बन्धु तिर्की ने कहा कि प्रधानमंत्री उक्त मामले की जेपीसी गठन कर जांच करायें. अपने चूंनिदा मित्रों को देश की संपति लूटने का अधिकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दे दिया है. लेकिन कांग्रेस देश के सजग प्रहरी के रूप में ऐसा नहीं होने देगी.
पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुबोधकात सहाय ने कहा कि मोदी सरकार ने हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट पर ऐसे चुप्पी साधी हुई हैए जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं है. प्रधानमंत्री मोदी से हम कहना चाहते हैं कि आप अपने परम मित्र को धोखा दीजियेए हमें उससे कोई मतलब नहीं है. कम से कम भारत के निवेशकोंए स्प्ब् के 29 करोड़ पॉलिसी होल्डर और बैंक के 45 करोड़ खाताधारकों को तो धोखा मत दीजिये.
रांची महानगर कांग्रेस अध्यक्ष कुमार राजा ने कहा कि करोड़ोंए 40 करोड़ केलगभग निवेशक जिन्होंने अपनी जमा पूंजी एलआईसी में लगाई थीए उनके भविष्य का सवाल है और एलआईसी में जो अडानी इंटरप्राईजेज हैं. 1 प्रतिशत से बढ़ा कर एलआईसी ने 4.23 प्रतिशत अपना निवेश कर दिया उसमें किसके इशारे पर कियाए क्यों किया.
धरना प्रदर्शन में जितेन्द्र त्रिवेदी, दिलावर खान, शहबाज अहमद, प्रदीप सिंह, राजकुमार नागवंशी, तारिक मुंजिबी, आसिफ खान, सुदीप उरांव, समीर कुरैशी, फ्रांसिस तिर्की, अनिल सिंह, प्रकाश सोनी, विक्की ठाकुर, राखी प्रियदर्शी, राजकुमार, सदाब खान, संतोष सोनी, दीपू सिन्हा, जियाउल हक, सहित सैकड़ो की संख्या में शामिल थे.
कांग्रेस पार्टी मोदी सरकार से ये 3 ज़रूरी मांग करती है–
-सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के देख-रेख में एक निष्पक्ष जांच हो, जिसकी रिपोर्ट दिन-प्रतिदिन सार्वजनिक हो.
-हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट की विस्तार से जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन किया जाना चाहिए.
-LIC, SBI और अन्य राष्ट्रीय बैंकों में जो अडाणी का जोख़िम भरा निवेश है उसपर संसद में गहन रूप से चर्चा की जाये और निवेशकों को सुरक्षित करने के लिए उचित क़दम उठाये जाएं.




