JharkhandLead NewsRanchiTOP SLIDER

रामगढ़ उपचुनाव : सुनीता चौधरी ने NDA की करायी दमदार वापसी, कांग्रेस चारों खाने चित्त, 23 साल में हुए 6 चुनावों में आजसू पार्टी की रिकॉर्ड चौथी बार जीत

Ranchi:  रामगढ़ की जनता पिछले 23 सालों से बार-बार आजसू पार्टी का साथ पसंद करती दिखी है. अभी 27 फरवरी को हुए उपचुनाव और गुरुवार की काउंटिंग में भी यह साबित हुआ है. एनडीए समर्थित आजसू पार्टी की सुनीता चौधरी की जीत ने इसे फिर दोहराया है. अलग राज्य (नवंबर 2000) बनने के बाद से रामगढ़ में दो बार उपचुनाव हुए हैं. 2001 के उपचुनाव में पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी को कामयाबी मिली. इसके बाद फरवरी 2023 में हुए चुनाव से सुनीता पहली दफा विधानसभा पहुंची हैं. केवल यही नहीं, 2001 के बाद 2005, 2009, 2014 के चुनाव में भी रामगढ़ की जनता ने आजसू पार्टी के लिए ही प्रेम जताया था. इसके बाद 2019 में भले कांग्रेस की ममता देवी को लोगों का भरोसा मिला पर उपचुनाव में अंततः लोगों ने रामगढ़ की बागडोर आजसू पार्टी को थमायी है.

बार बार आजसू पार्टी पर ही दांव

रामगढ़ के 40 साल के राजनीतिक इतिहास को देखें. बिहार विभाजन के पहले इस सीट के जरिये कांग्रेस, बीजेपी और सीपीआई प्रत्याशी विधानसभा पहुंचते रहे. झारखंड गठन के बाद भी एक बार बीजेपी को यहां से सफलता मिली. लेकिन उसके बाद से यहां से लगातार आजसू पार्टी ने ही अपना दबदबा बरकरार रखा है. हालांकि 2019 में आजसू के हाथ से भी यह सीट छिन गई. कांग्रेस की ममता देवी ने बाजी मारी.

झारखंड का गठन 2000 में हुआ था. 2001 में यहां पहला उपचुनाव हुआ. इसमें बीजेपी के बाबूलाल मरांडी को सफलता मिली. चूंकि राज्य अलग गठन होते समय बाबूलाल मरांडी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने थे. साथ ही वे दुमका से सांसद थे. ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री बने रहने के लिए विधायक बनना जरूरी था. 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में यह सीट सीपीआई के खाते में गई थी. पार्टी की ओर से शब्बीर अहमद कुरैशी ने यहां से जीत दर्ज की थी. उनके निधन पर 2001 में रामगढ़ में उपचुनाव कराना पड़ा था. राज्य गठन के बाद यह पहला उपचुनाव था. इसमें बाबूलाल ने जीत का परचम लहराया.

2005 में यहां हुए विधानसभा चुनाव में आजसू पार्टी ने यह सीट जीत ली. 2014 तक इस सीट पर पार्टी के दिग्गज नेता और वर्तमान में गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी यहां से लगातार जीतते रहे. 2019 में वे गिरिडीह से सांसद चुने गए. इसके बाद 2019 में हुए चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस ने कब्जा जमा लिया. कांग्रेस की ममता देवी ने यहां से जीत दर्ज की थी. पर एक आपराधिक मामले में सजा होने के चलते उनकी विधायकी चली गई. यह सीट फिर खाली हो गई. इसके बाद उपचुनाव में सीपी चौधरी की पत्नी सुनीता चौधरी ने 21 हजार से अधिक अंतर से जीत हासिल की.

सुनीता ने शुरू से बनाये रखी बढ़त

गौरतलब है कि रामगढ़ उपचुनाव के लिए आज काउंटिंग हुई. 11 राउंड की काउंटिंग में एनडीए प्रत्याशी सुनीता चौधरी यूपीए प्रत्याशी बजरंग महतो से लगातार आगे बनी रही. अंतत: सुनीता को 115595 वोट मिले. जबकि बजरंग को 93653 वोट प्राप्त हुए. जीत का अंंतर 21970 वोटों का रहा. इसके अलावे सात प्रत्याशी ऐसे रहे जिन्हें 2965 से 1340 वोट मिले.

हार पर क्या कहा राजेश ठाकुर ने

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, इस हार के पीछे का कारणों की हम समीक्षा कर रहे हैं. कहाँ कमी रह गई है उसे दूर करने का काम किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इसे 2024 के चुनाव के रुझान की तरह नहीं देखा जा सकता क्योंकि इससे पहले ना सिर्फ झारखंड में बल्कि देश के कई राज्यों में हमने जीत हासिल की है. उन्होंने कहा कि हार के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तार से आंकड़े का इंतजार करना है, कहां किस बूथ से हमें कितने वोट पड़े हैं.

इसे भी पढ़ें: रामगढ़ का रण: सुनीता चौधरी की जीत में पोस्टल बैलेट की भी रही भूमिका, कुल पोस्टल बैलेट वोट का 54.1 फीसदी मिला वोट 

Related Articles

Back to top button