
Ranchi : राज्य में जारी बिजली संकट पर पूर्व सीएम रघुवर दास ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर चिंता जतायी है. बुधवार को लिखे पत्र में कहा कि झारखंड में बिजली संकट गहराता जा रहा है. इसका जल्द निदान हो. राज्य के सभी चौबीसों जिले में 6-8 घंटे और गांवों में 4-5 घंटे ही बिजली मिल रही है. यह सरकार की निष्क्रियता और निकम्मेपन को दिखाता है. ऐसे में सरकार इस मसले पर गंभीरता दिखाये. आगे की रणनीति बनाते हुए जनता को जल्द से जल्द निजात दिलायें.
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कोयला भंडार के बावजूद संकट
रघुवर ने कहा कि देश का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य झारखंड है. यहां से कोयला दूसरे राज्यों में जाता था और हम बिजली खरीदते थे. यहां से कोयला नहीं, बिजली दूसरे राज्यों में जाये, इसे देखते उनकी सरकार के समय पीटीपीएस, पतरातू और एनटीपीसी के बीच एमओयू हुआ था.
इसके तहत 2024 तक 4000 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू हो जाना था. पीएम नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था. पहले चरण में 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू होना था. पर सरकार की निष्क्रियता इसमें दिखती है.
अटल बिहारी वाजपेयी के समय एनटीपीसी के नॉर्थ कर्णपुरा का शिलान्यस हुआ था. पर 10 सालों तक सत्ता में रहते UPA की सरकार ने इस पर काम रोक दिया था.
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अब मोदीजी ने इसे फिर से शुरू कराया. अब यह पावर प्लांट बनकर तैयार है पर राज्य सरकार से फॉरेस्ट क्लियरेंस नहीं मिलने से मामला दो साल से लंबित है. इससे भी 800 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता.
गोड्डा में निजी कंपनी अडाणी के साथ 400 मेगावाट बिजली उपलब्ध कराने को एमओयू किया गया था. इससे राज्य की बिजली जरूरत पूरी करने में मदद मिलती. पर पिछले दो साल से कंपनी के अधिकारी पीपीए करने के लिये सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं पर सरकार को इसके लिये फुर्सत नहीं है.
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