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साइड लाइन हुए प्रदेश कांग्रेस के सीनियर लीडर, प्रदेश प्रभारी के नेतृत्व पर उठ रहे सवाल

  • राज्यसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने से नाराज फुरकान अंसारी का आरपीएन सिंह पर पार्टी बेचने का आरोप.
  • सुबोधकांत सहाय सहित कई वरिष्ठ नेताओं को प्रदेश राजनीति से किया जा रहा साइट लाइन.

Ranchi: 26 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 14 से अधिक विधायकों ने पूर्व सांसद फुरकान अंसारी को टिकट देने की मांग की थी. इस बाबत इनके मांग को नजरअंदाज कर निचले स्तर के एक कार्यकर्ता शाहजादा अनवर को टिकट दिया गया है. मांग नहीं माने जाने के बाद पार्टी मुख्यालय में बैठने वाले कई कार्यकर्ता एक बार फिर गुटबाजी में फंसते हुए प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह पर सवाल उठा रहे है.

विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि आरपीएन सिंह को प्रदेश प्रभारी बनाये जाने के बाद से ही प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस लीडर को पूरी तरह से साइड लाइन किया जाने लगा है. इनके नेतृत्व रहते प्रदेश स्तर के कई अध्यक्ष पार्टी छोड़ चुके हैं. कई नेता प्रदेश राजनीति से खुद को दूर कर रहे हैं. कई वरिष्ठ नेताओं को मंत्रिमंडल विस्तार में उचित स्थान नहीं दिया गया है.

अब उसी परिपाटी को आगे बढ़ाते हुए पार्टी के कहने पर गोड्डा सीट छोड़ने वाले फुरकान अंसारी को राजनीति से दूर करने की राजनीति दिख रही है. इसी नाराजगी को जाहिर करते हुए फुरकान अंसारी ने आरपीएन पर प्रदेश में कांग्रेस को बेचने का आरोप तक लगा दिया है.

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तीन अध्यक्षों ने पार्टी छोड़ा, प्रदेश राजनीति से दूर दिख रहे सुबोधकांत

आरपीएन सिंह के प्रदेश प्रभारी बनने के बाद से कांग्रेस के अंदर अध्यक्षों का पार्टी छोड़ने का एक रिकॉर्ड बन चुका है. 13 जुलाई 2017 को प्रदेश प्रभारी बने आरपीएन सिंह के नेतृत्व में भले ही पार्टी सत्ता तक पहुंची. लेकिन इन्हीं के प्रभारी रहते डॉ अजय कुमार, सुखदेव भगत, प्रदीप बलमुचू जैसे नेतांओं ने पार्टी छोड़ दी.

सिलसिला यही तक नहीं रूका है. यूपीए गठबंधन में दो बार केंद्रीय मंत्री रह चुके सुबोधकांत सहाय को भी एक तरह से प्रदेश राजनीति से पूरी तरह से साइड लाइन कर दिया गया है. कई बार उनके और प्रदेश प्रभारी के बीच के टकराव वाले संबंध देखे जा चुके हैं.

विधानसभा चुनाव के पहले सुबोधकांत सहाय ने मीडिया को कई बार बयान भी दिया है कि दिल्ली के हाकिम (सुबोधकांत आरपीएन सिंह को कहते है) बिना प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से सलाह किये ही गठबंधन को लेकर सहयोगी दलों से बात करते हैं.

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खुद को दरकिनार होने से नाराज फुरकान ने लगाया पार्टी बेचने का आरोप

लोकसभा चुनाव के ठीक पहले गठबंधन के तहत अल्पसंख्यक कोटे से किसी एक को राज्यसभा भेजे जाने की बात की गयी थी. उस समय पार्टी के कहने पर गठबंधन धर्म का पालन करते हुए पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने गोड्डा सीट छोड़ी थी. माना जा रहा था कि राज्यसभा का टिकट अल्पसंख्यक होने के नाते उन्हीं को मिलेगा. लेकिन हुआ इसका उलटा.

प्रदेश प्रभारी की सलाह के बाद शीर्ष नेतृत्व ने अल्पसंख्यक कोटे से ही शहजादा अनवर को टिकट दिलाकर फुरकान अंसारी के राजनीतिक पर एक तरह से ग्रहण लगा दिया. इससे नाराज होकर उन्होंने आरपीएन पर पार्टी बेचने तक का आरोप लगा दिया. उन्होंने कहा कि आरपीएन दो नंबर के आदमी हैं और प्रदेश में कांग्रेस को बेचने का काम कर रहे हैं.

उन्होंने साफ कहा कि झारखंड को उन्होंने पैसे कमाने का अड्डा बना लिया है. शहजादा से कोई नाराजगी नहीं है, लेकिन कोई पार्टी को अपनी जागीर समझे तो हमारे जैसे पुराने कांग्रेसी बर्दाश्त नहीं करेंगे.

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2013 में प्रमुख भूमिका निभा चुके राजेंद्र सिंह को भी नहीं मिला सम्मान

उसी तरह 2013 के हेमंत मंत्रिमंडल में दूसरे स्तर के नेता की भूमिका निभा चुके वरिष्ठ नेता सह बेरमो विधायक राजेंद्र सिंह को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं कराया गया.

बताया जा रहा है कि प्रदेश प्रभारी के ही विरोध के बाद बेरमो विधायक का नाम शीर्ष नेतृत्व के पास नहीं भेजा गया. जबकि कांग्रेस के वर्तमान 16 विधायकों में राजेंद्र सिंह ही ऐसे विधायक हैं, जो रिकॉर्ड सबसे अधिक बार (6ठीं बार) विधायक बने हैं.

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