
Ranchi : झारखंड में सीएनटी-एसपीटी एक्ट का मुद्दा हमेशा से सुर्खियों में रहता है. सड़क से लेकर सदन तक ये मुद्दा गरमाया रहता है. सीएनटी-एसपीटी एक्ट के लागू होते ही जमीन की गड़गड़ी के कई मामले सामने आये थे. सीएनटी जमीन को गैर सीएनटी बनाकर बेचने के भी कई मामले सूबे में सामने आ चुके हैं.
इसके लिए जमीन के रिकॉक में भी छेड़छाड़ किये जाते रहे हैं. विधानसभा के बजट सत्र में मांडर विधायक बंधु तिर्की के सवाल के जबाब में जमीन संबंधी ऑनलाइन रिकॉर्ड में विसंगतियां को राजस्व,निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग ने स्वीकार किया.
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बंधु के सवाल पर दिया विभाग ने जवाब
दरअसल विधायक बंधु तिर्की ने रांची जिला के नामकुम अंचल के मौजा टोनको का मामला सदन में उठाया था. बंधु तिर्की ने सरकार से सवाल किया था कि, शनिचरवा उरांव,पिता स्व चूमना उरांव, जिला रांची,अंचल नामकुम जिसका खाता संख्या 97, प्लांट नं-694, 714, 716, 701, 771 कुल रकबा -3.5 एकड़ है. जो सीएनटी अधिनियम के अंतर्गत आता है. जिसे अवैध तरीके से गैर आदिवासी को हस्तान्तरित कर दी गयी है.
इसके जवाब में भू राजस्व विभाग की ओर से दिये जवाब में कहा गया कि, उक्त जमीन शनीचरवा उरांव जोतकर्ता के रूप में दर्ज है. यह भूमि शनीचरवा उरांव के नाम से खतियान में दर्ज नहीं है. और ना ही पंजी टू में जमाबंदी ही कायम है.
विभाग की ओर से बताया गया है यह जमीन मूल पंजी टू के आधार पर आदिवासी खाता सीएनटी एक्ट से बाहर का है. हालांकि जबकि विभाग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन पंजी टू में विसंगतियां है. जिसे एक माह के अंदर सुधार कर लेने की बात कही गयी.
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