Opinion

वुहान के उस लैब का दर्शन जहां #CoronaVirus पर चल रहा था खतरनाक रिसर्च

Dr. Sunil Kumar Verma

चलिए आज आपको वुहान की उस P4 लैब के मानसिक दर्शन करवाते हैं जिसमें कोरोना वायरस पर खतरनाक रिसर्च चल रहा था. बायोलॉजिकल लैब चार प्रकार की होते हैं – P1 से लेकर P4 तक

जिन लैब्स में हमने पंतनगर यूनिवर्सिटी में MSc थीसिस की वह तो बहुत सिंपल सी लैब थी. उसको आप P1 से भी नीचे की लैब कह सकते हैं जिसका कोई नाम नहीं होता.

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भारत में ज्यादातर लैब यही P1 से नीचे वाली ही हैं – ज्यादातर हॉस्पिटल में जहां आप ब्लड सैंपल देने जाते हो यही बेचारी सी P1 से भी नीचे वाली लैब होती हैं. हालत खराब है…

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अब आते हैं P1 पर

P1 लैब आप उन लैब्स को कह सकते हो जिनमें मैं अभी रूटीन काम करता हूं CCMB जैसे संस्थान में. ज्यादातर बड़े-बड़े संस्थानों में P1 लैब ही होती है जिनमें भारत के विद्यार्थी पीएचडी करते हैं.

ऑक्सफोर्ड में जहां मैंने पीएचडी की वह लैब P2 लैब थी

P2 लैब भारत में अक्सर नहीं पायी जाती. CCMB जैसे संस्थान में भी एक दस बाई दस के रूम को P2 लैब कहा जाता है उसमें मैं आज तक अन्दर नहीं गया क्योंकि वो बंद रहता है और मैं अब P2 वाला काम भी नहीं करता.

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अब आते हैं P3 लैब पर

आप सोच सकते हैं जब P2 ही इतनी रेयर लैब है कि उसमें काम करने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग लेनी पड़े और जो भारत के बड़े-बड़े संस्थानों में नहीं है तो P3 कैसी लैब होती होगी.

भारत देश में उंगलियों पर गिनकर P3 लैब्स हैं – होंगी चार पांच जिनमें से एक CCMB में भी है. भारत देश में P3 trained वैज्ञानिकों की संख्या आप उंगलियों पर गिन सकते हैं. मैंने P3 लैब की ट्रेनिंग और सर्टिफिकेशन जर्मनी में लिया था और मैं भारत देश के P3 trained वैज्ञानिकों में से एक हूं.

P3 लैब में TB जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पर काम होता है. इस लैब के अंदर जाता बहुत कुछ है किन्तु बाहर कुछ नहीं आता हवा भी नहीं. मैं P3 trained researcher हूं, किन्तु मैं इस लैब का फोटो तक आपको नहीं दिखा सकता क्योकि इसके अंदर मोबाइल नहीं जाता ! मेरे पास है ही नहीं इसका फोटो ! किसी के पास इसका फोटो है तो वह फर्जी P3 लैब होगी !

भारत में फर्जी P3 लैब भी देखी हैं मैंने. नाम लिख दूंगा तो बवाल हो जाएगा सरकारी लैब थी. मैं उस लैब का भ्रमण करने गया था तो डायरेक्टर ने कहा कि चलिए डाक्टर साहब, आपको अपनी P3 दिखाते हैं.

P3 क्या, P1 भी नहीं थी वो लैब और वो भारत की एक रिफरेन्स लैब थी-भारत की शान !! अंदर एक लड़का काम कर रहा था जो शीशे की दीवार से बहार से ही दिख रहा था. वो लड़का डायरेक्टर के साथ मुझे देख कर थोड़ा सहमा और दरवाजा खोल कर बोला, आइये सर अंदर से देखिये.

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मेरी तो बुद्धि खराब हो गयी !! अरे मुर्ख की औलाद, P3 लैब में भी किसी को ऐसे बुलाया जाता है !! हमने डायरेक्टर से सवाल किया कि ये क्या नाटक है !! यही है आपकी रिफरेन्स P3 लैब !! डायरेक्टर साहब हकला गये और बोले, मैं तो दो महीने बाद रिटायर हो रहा हूं !!

उस दिन मुझे इस देश पर बहुत दया आई !! बड़ी-बड़ी बात करने वाला यह देश कितना गरीब है!!

ज्वालामुखी पर रखा हुआ है यह देश. जिस दिन यह ज्वालामुखी फट जायेगा कहर बरस पड़ेगा!

P3 लैब का सूट लगभग वैसा ही होता है जैसा आजकल आप चायनीज अस्पतालों के विडियो में देख रहें है TV पर. ऊपर से नीचे तक सूट में कवर्ड डॉक्टर्स और नर्स. सब के सब P3 सूट में हैं.

कहने का मतलब यह है कि जिस देश की सरकारी रिफरेन्स P3 लैब का यह बुरा हाल मैंने स्वयं अपनी आंखों से देखा, उस देश में कोरोना जैसी बीमारी फैल गयी तो क्या होगा !!

चाइना ने तो अपने डाक्टरों को P3 सूट पहना-पहना कर मरीजों का इलाज करवा डाला – यहां P3 वालों को ही P3 में काम करने की अकल नहीं है !! क्या रक्षा कर पायेंगे ये लोग दूसरों की !! ऐसा हाहाकार ऐसी अफरा-तफरी मच जायेगी, जिसका वर्णन मैं नहीं कर सकता !!

अब आते हैं P4 लैब पर जिसमें वुहान में परीक्षण चल रहे थे !!

P4 लैब में वैज्ञानिक सांस भी अपने-अपने हिस्से की लेते और छोड़ते हैं. इस लैब के अंदर वैज्ञानिक लगभग एक कैप्सूल के अंदर रहते हैं और उसी में रहकर पूरा काम करते हैं.

भारत में सिर्फ दो P4 लैब हैं: एक पुणे में एक भोपाल में. वो लैब अंदर से कैसी होती होंगी, मुझे नहीं पता क्योंकि मैंने P4 ट्रेनिंग नहीं ली है. और बिना ट्रेनिंग तो कोई P3 में भी कदम नहीं रख सकता, P4 की तो बात ही छोड़िये.

जिस देश में P3 लैब के बाहर डायरेक्टर को देख कर अंदर काम करता हुआ researcher विज्ञान छोड़कर चमचागिरी करने के लिए दुम हिलाने लगे, उस देश का भगवान ही मालिक हो सकता है !!

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और यह पोस्ट पढ़कर वैज्ञानिको को बुरा भला कहने की जरुरत नहीं है. तुम आम लोग भी कम नहीं हो !! फालतू लोगों के साथ राजनीति दिन भर करवा लो तुमसे किन्तु अपने देश के विद्वान लोगों को तब तक नहीं पूछते, जब तक कि उसके सर पर अनपढ़ ही सही, धूर्त ही सही, किन्तु कोई नेता हाथ नही रख देता.

पोस्ट लंबी हो गयी

खुश रहो और अपने अपने भगवान से प्रार्थना करो कि भारत में कोरोना ना फैले और प्रार्थना करके तब तक नजारा देखो जब तक जिंदा हो.

रही बात मेरी, तो मैं तो सिंहासन से बंधा हूं, भीष्म की तरह. जो भी है जैसा भी है, इसी देश की जय बोलूंगा, बोलता रहूंगा.

( ये पोस्ट डा.सुनील कुमार वर्मा जी के फेसबुक वाल से ली गयी है और यह बिना किसी काट-छांट के है)

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