
Khunti : खूंटी जिला में नक्सल विरोधी अभियान चलाने के लिए एक दर्जन से अधिक सुरक्षा बलों का कैंप है. जबकि नक्सल प्रभावित इलाके में सुरक्षा बलो की गोली का शिकार निर्दोष भी होते रहे हैं.
नक्सलियों के खिलाफ चलाये जानेवाले ऑपरेशन के दौरान ऑपरेटिंग स्टैंडर्ड प्रोसिजर (एसओपी) कहता है कि बिना हथियार देखे किसी पर गोली नहीं चलानी है.
लेकिन सीआरपीएफ के जवान ने रोशन के पास हथियार देखे बिना सुबह के उजाले में गोली कैसे चला दी? यह बड़ा सवाल पुलिस पर खड़ा होता है.
शुक्रवार की सुबह उजाले में पुलिस की गोली से हुई निर्दोष आदिवासी युवक रोशन होरो की मृत्यु के बाद शव को गांव नही लाया जा सका है. शव को परिजन गांव ले जाएं, इस कवायद में पुलिस जुटी है. इसके लिए कुछ लोगो के द्वारा प्रयास भी किया जा रहा है. खबर लिखे जाने तक रविवार को दिन के दो बजे तक रोशन होरो का शव गांव नहीं पहुंचा है.
रोशन होरो के गांव शनिवार को देर शाम तक चली कुम्हारडीह ग्रामसभा की बैठक में 10 सूत्री मांग पत्र तैयार किया गया था.
साथ ही ग्रामसभा के द्वारा प्रथामिकी भी दर्ज करने की सूचना मिल रही है.
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ग्रामसभा में तैयार किया गया 10 सूत्री मांगपत्र
ग्रामसभा में सर्वसम्मति से 10 सूत्री मांगपत्र तैयार किया गया. मांगपत्र में मृतक रोशन होरो के परिजनों को तीन करोड़ रुपये मुआवजा देने, मृतक के तीन आश्रितों को उनकी इच्छानुसार सरकारी नौकरी देने, पूरे घटनाक्रम की सीबीआइ से जांच कराने, दोषी पुलिसकर्मी को बर्खास्त करने, मृतक के बच्चों को रोजगार मिलने तक निजी शिक्षण संस्थान में शिक्षा दिलाने एवं पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में ग्रामसभा की अनुमति के बिना पुलिस प्रशासन प्रवेश न करे सहित अन्य मांगें शामिल हैं. इसके साथ ही ग्रामसभा में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए आवेदन भी तैयार किया गया.
एक जवान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज
रोशन होरो की मौत के मामले में एक कांस्टेबल के खिलाफ मुरहू थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है. मामले की उच्चस्तरीय जांच करायी जायेगी और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जायेगी.
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