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#JantaCurfew: तमाम एहतियात के बाद रांची रेलवे लापरवाह, 600 मजदूरों को एलेप्पी से उतरते ही भगाया,देखें वीडियो

NewsWing Team

Ranchi: देशभर में लोग जनता कर्फ्यू का पालन कर रहे हैं. अपने घरों में कैद होकर ना सिर्फ देश के जिम्मेवार नागरिक की भूमिका अदा कर रहे हैं. बल्कि कोरोना को हराने के लिए हर संभव प्रयास भी कर रहे हैं. जिला प्रशासन को भी कोई चूक ना हो इसके लिए निर्देश जारी किये गये हैं और कोरोना से जुड़ा कोई भी मामला दिखते ही तुरंत एक्शन लेने को कहा गया है. लेकिन रांची में जिला प्रशासन कोरोना को लेकर कितनी अलर्ट है,इसकी बानगी रविवार को रेलवे स्टेशन पर देखने को मिली.

रांची स्टेशन पर एलेप्पी ट्रेन के पहुंचते ही तकरीबन 600 की संख्या में मजदूर उतरे. सभी मजदूर अलग-अलग स्टेशन से चढ़े थे और ट्रेन पर चढ़ने से पहले भी ज्यादातर का COVID-19 का चेकअप नहीं किया गया था. उनसे कहा गया था कि रांची स्टेशन पर उतरते ही उनका चेकअप किया जायेगा.

वहीं रांची स्टेशन पर उतरकर सभी मजदूर वहीं बैठ गये और इंतजार में थे कि उनका कोरोना को लेकर चेकअप किया जायेगा. सभी मजदूर कुछ देर तक स्टेशन पर ही बैठे रहे और इंतजार करने लगे. लेकिन काफी देर तक ना तो उन्हें कोई पूछने आया और ना ही कुछ कहने ही आया.

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आरपीएफ ने सभी मजदूरों को भगाया 

कुछ देऱ बाद आरपीएफ के कुछ जवानों ने सभी मजदूरों को स्टेशन से भगा दिया. सभी मजदूर स्टेशन की पार्किंग में बैठ गये और इस इंतजार में थे कि उनका कोरोना चेकअप होगा. लेकिन वहां भी ना तो कोई व्यवस्था थी और ना ही कोई टीम मौजूद थी. ये तो बात पार्किंग की थी. लेकिन जब मजदूरों से बात की गयी तो पता चला कि स्टेशन पर भी ना तो कोई जांच टीम मौजूद थी और ना ही कोई स्वास्थ्यकर्मी.

#JantaCurfew: तमाम एहतियात के बाद रांची रेलवे लापरवाह, 600 मजदूरों को एलेप्पी से उतरते ही भगाया
एलेप्पी ट्रेन से आये मजदूरों को आरपीएफ द्वारा भगाये जाने के बाद खादगढ़ा के बस स्टैंड पर बस के लिए इंतजार में सभी मजदूर

वहीं स्टेशन की पार्किंग में बैठे मजदूरों ने बताया कि शाम 4.50 बजे मौर्य एक्सप्रेस ट्रेन से सभी अपने घर जायेंगे. लेकिन जब उन्हें पता चला कि सभी ट्रेनें रद्द् हैं तो वे सोच में पड़ गये. इसी बीच आरपीएफ के जवानों ने उन्हें पार्किंग से भी भगा दिया. तो वहां से निकलकर सभी मजदूर रांची स्थित खादगढ़ा बस स्टैंड पहुंचे. लेकिन सभी बसों का परिचालन भी बंद होने की वजह से कई गुटों में बंटकर मजदूर बस स्टैंड पर ही बैठे हैं.

लेकिन बस स्टैंड पर भी यही आलम देखने को मिला. ना तो चेकअप की कोई व्यवस्था थी और ना ही कोई स्वास्थ्यकर्मी ही मौजूद दिखे. ऐसे में चाहकर भी मजदूर अपना चेकअप आखिर कैसे करवायें.

वहीं कोडरमा जाने के लिए बैठे कुछ लोगों ने खादगढ़ा स्थित टीओपी में थाना प्रभारी से कहा कि वे चाहते हैं कि उनका कोरोना चेकअप हो. क्योंकि वे नहीं चाहते कि यदि वे कोरोना पॉजिटिव हों तो उनके माध्यम से किसी और इस महामारी का शिकार हो.

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अलग-अलग राज्यों से आये हैं मजदूर

ट्रेन से उतरे सभी मजदूर चेन्नई, महाराष्ट्र के अलावा ओडिशा से भी आये थे. सभी कोरोना अलर्ट के बाद अपने घर लौट रहे हैं. ज्यादातर मजदूर बिहार के हैं, जो घर वापसी करने की तैयारी में हैं. न्यूज विंग की टीम ने जब मजदूरों से बात की तो उन्होंने कहा कि वे सभी कोरोना वायरस को लेकर जरे हुए हैं. सभी चाहते हैं कि उनका भी चोकअप कर लिया जाये, तभी वे निश्चिंत होकर अपने परिवार के पास जाये. साथ ही कहा कि यदि हममे से कोई भी कोरोना पॉजिटिव है तो उसे इलाज के लिए ले जाया जाये. ताकि बीमारीउनके परिवार या अन्य किसी को ना फैले.

लोग जागरूक लेकिन लापरवाह सिस्टम

कोरोना को महामारी घोषित करने के वाबजूद जिला प्रशासन और रेलवे के इस लापरवाह रवैये ने सभी आदेशों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं. लोग जागरुक हैं और एक जिम्मेवार नागरिक बनकर कोरोना चेकअप के लिए तैयार भी हैं. लेकिन लापरवाह सिस्टम के आगे बेबस हैं.

लेकिन प्रशासन को भूलना नहीं चाहिए कि रविवार को ही पटना के एम्स में एक 38 साल के शख्स की मौत कोरोना से हो गयी है. वहीं महाराष्ट्र में भी महामारी से प्रभावितों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रही है. ऐसे में रेलवे की लापरवाही से झारखंड में भी कोई अनहोनी होती है तो जिम्मेवार किसे माना जायेगा.

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