
London/kyiv : यूक्रेन को रूसी सेना का सामना करने में एक प्रतिबंधित समलैंगिक डेटिंग ऐप से जबर्दस्त मदद मिल रही है. इसके अलावा कई रूसी सोशल मीडिया साइट्स भी उनकी सहायता पहुंचाने में अहम रोल निभा रहे हैं. इन सब डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल ब्रिटिश जासूस कर रहे हैं और वह लगातार पुतिन की सेना की अगली हरकतों को लेकर यूक्रेन की सेना और सरकार को आगाह कर रहे हैं. अबतक उम्मीद से ज्यादा यूक्रेन ने रूस को इस जंग में जो नुकसान पहुंचाया है, उसमें ब्रिटिश जासूसों का बहुत बड़ा योगदान माना जा सकता है.
लगता है कि यूक्रेन की राजधानी की ओर बढ़ रही रूसी सेना के 64 किलोमीटर लंबे काफिले का कई दिनों से रास्ते में अटके रहने में भी इस ऐप का बहुत बड़ा रोल हो सकता है.
डेटिंग ऐप के चक्कर में फंस गई पुतिन की सेना!
ब्रिटिश जासूस लगातार उन रूसी सैनिकों पर नजर रख रहे हैं, जो गे डेटिंग ऐप ग्रिंडर और दूसरे सोशल नेटवर्किंग साइट का इस्तेमाल करते हैं. 11 दिन पहले रूस ने यूक्रेन पर हमला किया था और जानकारी के मुताबिक ब्रिटिश जासूसों को इसकी पुख्ता जानकारी पहले सी ही मिल रही थी. क्योंकि, वह रूसी सैनिकों के सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए पुतिन की योजनाओं का टोह लेने में लगे हुए थे.
जानकारी के मुताबिक यूक्रेन को इन खुफिया सूचनाओं से आक्रमण के बारे में पहले से ही काफी कुछ अंदाजा लग गया था और उसने इसपर काम भी किया था. नहीं तो यूक्रेन को इससे भी ज्यादा नुकसान हो सकता था.
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पुतिन ने बैन किया था, लेकिन फिर भी हो रहा है इस्तेमाल
वैसे रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ग्रिंडर जैसे गे डेटिंग ऐप को 2013 में ही बैन कर दिया था, लेकिन यह अभी भी चोरी-छिपे इस्तेमाल में है और रूसी सेना में बहुत ही ज्यादा लोकप्रिय है. यही ऐप इस मुश्किल वक्त में ब्रिटिश जासूसों के लिए बहुत बड़ा हथियार बन चुका है.
यही नहीं इंटेलीजेंस एजेंसियां फेसबुक की तरह के ही रूसी वीकोंटाक्टे पर डाले जा रहे संदेशों को भी ट्रैक कर रही हैं. डेली मेल से एक सूत्र ने बताया है कि ‘ये साइटें हमारे जासूसों के लिए एक खजाने की तरह थीं, और खासकर के डेटिंग ऐप्स – जवानों और मिलिट्री अभियानों में शामिल लोग विशेष रूप से असुरक्षित थे.’
यूक्रेन के काफी काम आए ब्रिटिश जासूस
उस सूत्र ने यह भी जानकारी दी है कि ‘इसका मतलब है कि हमें निश्चित रूप से होने वाले आक्रमण और योजनाओं की अच्छी तरह से जानकारी थी, यहां तक की रूसी सेना के लिए ब्लड सप्लाई के मूवमेंट को लेकर भी.’
सूत्र की पहचान छिपाने के लिए इससे जुड़ी कई जानकारी गुप्त रखे जाने की बात कही जा रही है.
लेकिन, इस तरह से जासूसी से जुटायी गई जानकारियों का फायदा ये हुआ कि मेलिटोपोल शहर में यूक्रेन के बहादुर लोगों को रूसी सेना का सामना करने का साहस मिला और वह उनसे उन्हें वापस ‘घर लौटने’ के लिए मजबूर कर सके. इससे नागरिकों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजने के लिए भी कुछ घंटों का समय मिल गया.
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यूक्रेन ने अभी तक रूस का किया है डटकर मुकाबला
यूक्रेन की सेना को इस तरह की खुफिया जानकारी से काफी सहायता मिली है और इसका इस्तेमाल करते हुए उसने अमेरिका और ब्रिटेन से मिले हथियारों की बदौलत रूसी सेना को अभी तक जबर्दस्त टक्कर दिया है और काफी नुकसान भी पहुंचाया है.
रूसी सेना के विशाल काफिले के बावजूद पुतिन आजतक कीव पर कब्जा नहीं कर पाए हैं और शहर-दर-शहर रूसी टैंक, बख्तरबंद गाड़ियां, सैन्य ट्रक और मिसाइल सिस्टम तबाह पड़े हुए नजर आ रहे हैं.
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