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प्रस्तावित राष्ट्रीय शिक्षा नीति छात्रों और आम जनता के हित में नहीं, प्रमुख मुद्दों की हो रही उपेक्षा: एआइ खान

Ranchi:  बीते कुछ सालों से देश की शिक्षा प्रणाली व्यवसायीकरण, केन्द्रीकरण और साम्प्रदायीकरण की चुनौतियों का सामना कर रही है. कई बार लोकतंत्र और शिक्षा की गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को छात्रों ने उठाया. इसके बाद भी सरकार शिक्षा क्षेत्र में बदलाव कर रही है. उक्त बातें गिरिडीह कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ एआइ खान ने कहीं. वे सोमवार को नामकुम, बागईचा में एसएफआइ (Students Federation of India) की ओर से आयेाजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.

इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रस्तावित राष्ट्रीय शिक्षा नीति छात्र एवं जन हित में नहीं है. सरकार नयी व्यवस्था लागू कर शिक्षा का निजीकरण का देगी. जिससे गरीबों की पहुंच से शिक्षा दूर हो जायेगी. जिस राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए सरकार जनहित की बात करती है, वास्तव में सिर्फ आई वाश है. क्योंकि इसका सीधा असर आम जन जीवन में देखा जायेगा.

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प्रमुख क्षेत्रों की उपेक्षा की गयी

इसकी जानकारी देते हुए एसएफआइ की संयुक्त सचिव दीपशिखा धर ने कहा कि प्रस्तावित राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मामले में देश में व्यापक विचार विमर्श किये जा रहे हैं. जो एसएफआइ की ओर से की ओर से जारी हैं. सभी राज्यों में और अधिक भागीदारी के साथ इस प्रक्रिया को जारी रखा जायेगा. लोगों से विचार विमर्श के बाद वृहत रिर्पोट तैयार की जायेगी.

विशेषकर इस विचार विमर्श में इन बातों का ध्यान रखा जायेगा कि कैसे नई शिक्षा नीति राज्यों को प्रभावित कर रही है. जिसमें दस्तावेजों के माध्यम से महत्वपूर्ण तथ्यों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया जायेगा. दीपशिखा ने कहा कि ड्राफ्ट पॉलिसी पढ़ने से जानकारी हो रही है कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में कुछ प्रमुख क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है.

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नयी पॉलिसी प्रगतिशील नहीं

दीपशिखा ने कहा कि एसएफआइ की ओर से पॉलिसी का अध्ययन किया गया है. जिसमें पाया गया है कि जिस पॉलिसी को सरकार नीतिगत दस्तावेज बता रही है, वह लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, संवैधानिक और प्रगतिशील दृष्टिकोण से रहित है. जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मसौदा अनुचित है.

जनता को इस पॉलिसी को पढ़ने के लिए जो समय दिया गया है, वो भी दो माह से कम का है. जबकि अंग्रेजी में यह 484 और हिंदी में 650 पेज का है. जनता को इतने कम समय में इतने बड़े दस्तावेज को पढ़ना मुश्किल हो सकता है.

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