
- औद्योगिक इकाइयों में पिछले चार साल में फूंके जा चुके हैं 230 करोड़ के डीजल
- 6000 औद्योगिक इकाइयां अगर बंद नहीं होती तो और 275 लाख लीटर डीजल की होती खपत
Ranchi: बिजली वितरण निगम की पावर सप्लाई बद से बदत्तर हो गई है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले चार साल में औद्योगिक इकाइयों में प्रतिमाह 1.10 लाख लीटर डीजल की खपत बढ़ी.
वर्ष 2015 में प्रतिमाह 6.90 लाख लीटर डीजल की खपत थी, जो 2018 तक बढ़कर प्रतिमाह 8 लाख लीटर हो गई. बिजली की लचर व्यवस्था के कारण पिछले चार साल में औद्योगिक इकाइयों में लगभग 231 करोड़ रुपये के डीजल फूंके जा चुके हैं.
अगर 6000 उद्योग बंद नहीं होती तो 275 लाख लीटर डीजल की खपत और होती. वर्तमान में 7345 लघु, मध्यम और बड़े उद्योग प्रदेश में संचालित किये जा रहे हैं.
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किस साल डीजल पर कितना हुआ खर्च
| साल | खर्च राशि (करोड़ में) |
| 2015 | 53.82 |
| 2016 | 54.6 |
| 2017 | 60.45 |
| 2018 | 62.40 |
साल दर साल इस तरह बढ़ी डीजल की खपत
2015 की तुलना में 2016 में प्रतितमाह 10 हजार लीटर डीजल की खपत बढ़ी. 2017 में प्रतिमाह यह बढ़कर 75 हजार लीटर हो गई. 2018 में डीजल की खपत में और इजाफा हुआ.
इस साल प्रतिमाह 25 हजार लीटर और डीजल की खपत बढ़ गई. 2015 में प्रतिमाह 6.90 लाख, 2016 में प्रतिमाह 7.00 लाख, 2017 में प्रतिमाह 7.75 लाख और 2018 में 8.00 लाख लीटर प्रतिमाह डीजल की खपत थी.
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सिर्फ सीएम के जिले में मेहरबान वितरण निगम
बिजली वितरण निगम सिर्फ सीएम रघुवर दास के जिले में मेहरबान है. वहां जुस्को के माध्यम से 24 घंटे बिजली की आपूर्ति हो रही है. जुस्को उद्योगों से फिक्स चार्ज के रूप में 195 रुपये लेता है, जबकि बिजली वितरण निगम अन्य जिले के औद्योगिक इकाइयों से फिक्स चार्ज के रूप में 350 रुपये लेता है.
जुस्को औद्योगिक इकाइयों को 5.15 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देता है. जबकि वितरण निगम औदेगिक इकाईयों को 5.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली देता है.
जुस्को औद्योगिक इकाईयों को दो फीसदी का रिबेट देता है. जबकि वितरण निगम अन्य जिलों के उद्यमियों पर पेनाल्टी लगाता है.
झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग का भी हस्तक्षेप नहीं
लचर बिजली व्यवस्था के खिलाफ झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग भी हस्तक्षेप नहीं कर रहा है.
सेक्शन 88 के प्वाइंट चार में प्रावधान है कि झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग उपभोक्ता हित का ध्यान रखे, कि गुणवत्तापूर्ण बिजली मिल रही है या नहीं.
बिजली की कटौती पर भी आयोग संज्ञान ले सकता है. जेसिया के मानद सचिव अंजय पचेरीवाल ने कहा कि आयोग को भी वितरण निगम के इस रवैये पर हस्तक्षेप करना चाहिये.
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आंदोलन की राह पर राज्य के उद्यमी
बिजली वितरण निगम की लचर व्यवस्था के खिलाफ प्रदेश के उद्यमी आंदोलन की राह पर निकल पड़े हैं. जेसिया के सचिव अंजय पचेरीवाल ने कहा कि मोमेंटम झारखंड के समय विभिन्न औद्योगिक घरानों ने 3 लाख 10 करोड़ का एमओयू उद्योग लगाने के लिये किया था.
लेकिन अब तक एक भी एमओयू जमीं पर नहीं उतरा. इसकी प्रमुख वजह है प्रदेश की लचर बिजली व्यवस्था. अब तो हालात यह है कि किसी भी उद्यमी यह भरोसा नहीं हो रहा है कि समय पर प्रोडक्ट का उत्पादन हो जायेगा.
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