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अल्पमत वाले निर्णयों को ऑर्डर में नहीं शामिल करने पर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने सुनील अरोड़ा को लिखी चिट्ठी

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New Delhi: निर्वाचन आयोग में मतभेद की खबरें अब खुलकर सामने आने लगी हैं. खबर है कि चुनाव आयुक्त अशोक लवासा अल्पमत निर्णय को ऑर्डर में नहीं शामिल करने से नाराज हैं. और उनके फैसलों की अनदेखी करने की बात को लेकर निर्वाचन आयोग की बैठकों से खुद को दूर रखा है.

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पूरे मामले को लेकर उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील अरोड़ा को चिट्ठी भी लिखी थी. दरअसल, ये पूरा विवाद पीएम मोदी के खिलाफ आदर्श आचार संहिता उल्लंघन के छह मामलों में आयोग द्वारा दी गयी क्लीन चिट से जुड़ा है.

आचार संहिता उल्लंघन की शिकायत पर फैसला तीन आयुक्तों की एक पैनल ने लिया था. जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील अरोड़ा, चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा और अशोक लवासा शामिल थे. उस दौरान भी चुनाव आयोग में मतभेद की खबर आयी थी.

जहां पीएम को दोषमुक्त करने तीन मामले में अशोक लवासा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त की बात से इत्तेफाक नहीं रखते थे. हालांकि, आयोग में प्राथमिकता सर्वसम्मति से होनेवाले निर्णय को दी जाती है. लेकिन ऐसा नहीं होने पर बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है.

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मुख्य निर्वाचन आयुक्त को लिखी चिट्ठी

मामले को लेकर चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने चीफ इलेक्शन कमीश्नर सुनील अरोड़ा को चार मई को ही एक चिट्ठी लिखी है. पत्र में उन्होंने कहा है कि, उन्हें पूर्ण आयोग (तीन सदस्यों वाली कमेटी, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त भी शामिल) की बैठक से दूर रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है. क्योंकि अल्पमत वाले निर्णय दर्ज नहीं किये जाते हैं.

उन्होंने पत्र में कहा कि इन बैठकों में मेरे शामिल होने का क्या औचित्य जब मेरे निर्णयों को शामिल ही नहीं किया जाता है. साथ ही पत्र में लिखा कि अल्पमत के फैसलों को दर्ज करने के लिए विधि-व्यवस्था के दूसरे उपायों पर विचार करना चाहिए.

पत्र में मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उन्होंने इस बात की भी शिकायत की कि मामलों की सुनवाई के दौरान रिकॉर्डिंग में पारदर्शिता समेत उनके कई अहम बातों की अनदेखी की गयी. जिसके कारण वो आयोग की बैठकों से दूर रहने को मजबूर हो गये है.

आयुक्त लवासा से मिले सुशील अरोड़ा

अशोक लवासा के पत्र लिखने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त अरोड़ा ने उनसे मुलाकात की है. चीफ इलेक्शन कमीश्नर का कहना है कि केवल अर्ध न्यायिक मामलों में पूरी कार्यवाही की रिकॉर्डिंग की जाती है. और आर्दश आचार संहिता उल्लंघन के मामले, अर्ध न्यायिक नहीं होते. इसलिए इनकी रिकॉर्डिंग की कोई जरुरत नहीं है.

ज्ञात हो कि चार मई को चुनाव आयोग ने पीएम मोदी को सेना के राजनीतिक इस्तेमाल के मामले में क्लीन चिट दी थी. लेकिन चुनाव आयुक्त लवासा इस बात से सहमत नहीं थे.

उस दौरान छह मामलों की शिकायत पर सुनवाई हुई थी, जिसमें से पीएम के पांच और अमित शाह का एक मामला था. और पीएम को दिये क्लीन चिट के तीन मामलों में अशोक लवासा की राय पैनल से अलग थी, वहीं अमित शाह के केस में भी वो पैनल से सहमत नहीं थे.

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