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ECL को करना है कोयला खदानों का विस्तार, लगभग चार सौ लोगों को विस्थापित करना बड़ी समस्या

विस्थापन का असर कोयला खनन में, नुकसान में कपंनी

Ranchi : राज्य में भूमि अधिग्रहण नहीं हो पाने के कारण योजनाओं पर असर पड़ रहा है. ऐसा ही मामला कोयला खदान क्षेत्रों में भी है. जहां जमीन अधिग्रहण नहीं हो पाने के कारण बीसीसीएल, ईसीएल, सीसीएल जैसी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है. धनबाद क्षेत्र में ईसीएल की खदानें है. जहां राजपुरा और कापासारा माइंस एरिया में ईसीएल की परेशानियां बढ़ी हुई है. राजपुरा और कापासारा माइंस एरिया में ईसीएल प्रबंधन को खदानों का विस्तार करना है. लेकिन जमीन अधिग्रहण नहीं हो पाने के कारण ईसीएल प्रबंधन खदानों का विस्तार नहीं कर पा रही है. जानकारी हो कि राजपुरा और कापासारा दोनों माइंस मुगमा क्षेत्र में आते है. हालांकि इस संबध में ईसीएल प्रबंधन की ओर से राज्य खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन से भी मदद मांगी गयी है. लेकिन जमीन अधिग्रहण मामले में पिछले तीन चार महीने में ईसीएल प्रबंधन को विशेष सफलता नहीं मिली है.

चार सौ परिवारों को करना होगा विस्थापित

दोनों माइंस क्षेत्र के विस्तार के लिये ईसीएल प्रबंधन को लगभग चार सौ परिवारों को विस्थापित करना होगा. राजपुरा माइंस के विस्तार के लिये कालामाटी और कापासारा के विस्तार बिहार बार्डर तक होना है. ऐसे में कापासारा का क्षेत्र बिहार सरकार के अधीन है. दोनों क्षेत्रों का विस्तार के लिये गांवों को विस्थापित किया जाना है. ईसीएल प्रबंधन की मानें तो इन क्षेत्रों के स्थानीय निवासी जमीन के बदले मुआवजा और क्वार्टर की मांग कर रहे हैं. लंबे समय से लोगों की ये मांग रही है. वहीं, प्रबंधन इन मांगों को पूरा नहीं कर पा रहा. क्योंकि मांग पूरी करने में समय भी लगेगा. ऐसे में कापासारा और राजपुरा खदान से जितना कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था, उतना खनन नहीं हो पा रहा है. जिससे ईसीएल प्रबंधन को इन दो खदानों से नुकसान झेलना पड़ रहा है.

प्रबंधन ने की कोशिश लेकिन नहीं निकाला नतीजा

जानकारी मिली है कि ईसीएल प्रबंधन ने कुछ समय पहले राजपुरा मांइस के विस्तार का प्रयास किया था. इसके लिये स्थानीय निवासियों को कालीमाटी से विस्थापित कर मुगमा में रहने के लिये आवास उपलब्ध कराया गया. लेकिन स्थानीय निवासियों ने इससे इंकार कर दिया. स्थानीय लोगों ने प्रबंधन द्वारा दिये आवास को रहने लायक नहीं बताते हुए आवास नहीं बदला.  िजिसके बाद से प्रबंधन की समस्या और भी बढ़ गयी.

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