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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी गंभीर समस्याओं की कर रहे अनदेखी : सरयू राय

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  • बोर्ड में अध्यक्ष और सचिव भी पूर्णकालिक नहीं, विभाग का भी देख रहे काम, विरोधाभास की है स्थिति
  • कैबिनेट मंत्री सरयू राय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यशैली पर उठाये सवाल, मुख्य सचिव को लिखा पत्र
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Ranchi : कैबिनेट मंत्री सरयू राय ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया है. उन्होंने कहा है कि बोर्ड के अफसर गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं. बोर्ड के अध्यक्ष और सचिव वन विभाग के अफसर हैं, पर बोर्ड में पूर्णकालिक नहीं हैं. उन्हें प्रदूषण बोर्ड के कार्यों के अतिरिक्त विभाग के दायित्व का भी निर्वहन करना पड़ता है. बोर्ड और विभाग के विभिन्न दायित्व भी परस्पर विरोधाभासी प्रकृति के हैं. दोनों दायित्वों का निर्वहन एक साथ करना प्रासंगिक कानून के अनुरूप नहीं है. इस मसले को लेकर सरयू राय ने मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को पत्र लिखा है.

पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया है हवाला

मंत्री सरयू राय ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया है. कहा है कि ‘जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम-1974’ तथा ‘वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम-1981’ के प्रासंगिक प्रावधानों की न्यायिक समीक्षा करते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण तथा सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष पद पर नियुक्त व्यक्ति को पर्यावरण का विशिष्ट ज्ञान होना चाहिए. उसे पर्यावरण में स्नातकोत्तर डिग्रीधारी होना जरूरी है.

कानून के प्रावधानों के अनुसार हो कार्रवाई

सरयू राय ने पत्र में लिखा है कि वर्तमान समय में झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष पद पर पदस्थापित वन विभाग के अधिकारी एवं पर्षद में पदस्थापित राज्य सरकार के अन्य विशिष्ट पदाधिकारियों ने इस तरह का विशिष्ट ज्ञान हासिल किया है या नहीं? ऐसे में यह आवश्यक है कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष एवं सचिव पद पर नियुक्तियां करते समय विशिष्ट ज्ञानयुक्त पूर्णकालिक पदाधिकारी को ही इन पदों पर पदस्थापित किया जाना चाहिए. इस संबंध में विधि एवं कानून के प्रावधानों तथा राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में पारित आदेश के आलोक में आवश्यक कार्रवाई अपेक्षित है.

खनन क्षेत्र में हो रहे वायु प्रदूषण की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराया

मंत्री ने पत्र में कहा है कि 28 सितंबर 2018 को हुई बैठक में विभाग के अपर मुख्य सचिव, पीसीसीएफ और प्रदूषण बोर्ड के अध्यक्ष का खनन क्षेत्र में हो रहे वायु प्रदूषण की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराया था. इसकी रोकथाम एवं अनुश्रवण के लिए प्रभावी कदम भी उठाने को कहा गया था.

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वायु प्रदूषण की मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं

मंत्री ने कहा कि झारखंड के खनन क्षेत्रों में कहीं भी वायु प्रदूषण के रियल टाइम ऑनलाइन डाटा मॉनिटरिंग की व्यवस्था नहीं है. आवश्यक संयंत्र भी नहीं लगे हैं. इस कारण वायु प्रदूषणग्रस्त क्षेत्रों को सूचीबद्ध नहीं किया जा सका है. युगांतर भारती की पर्यावरणीय प्रयोगशाला द्वारा केडीएच एरिया, डकरा के खनन क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर वायु प्रदूषण मापा गया. वहां पता चला कि हवा में पीएम-10 और पीएम 2.5 की सांद्रता भारतीय मानक से पांच गुणा से सात गुणा अधिक है.

नॉर्थ कर्णपुरा में भी यही हाल

उन्होंने कहा कि सीसीएल द्वारा भी नॉर्थ-कर्णपुरा कोयला खनन क्षेत्र में वायु प्रदूषण मापा गया. सीसीएल द्वारा एकत्र किये गये आंकड़ों के अनुसार हवा में पीएम-10 और पीएम 2.5 की सांद्रता मानक से पांच गुणा से सात गुणा अधिक है. आश्चर्य है कि झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष, सचिव एवं अन्य विशेषज्ञों ने अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं की है.

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