न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

चुनाव से पहले प्रेशर में रघुवर सरकार, फिर से ‘संगठन’ ‘सरकार’ पर हावी!

राजनीति की समझदारी रखने वालों का कहना है कि अगर ऐसा होता है, तो कहीं ना कहीं सरकार को चुनाव में अच्छा परिणाम ना आने की चिंता सता रही होती है.

2,575

Akshay Kumar Jha

mi banner add

Ranchi: चुनाव को लेकर पार्टियां रंग बदले, राजनीति में यह कोई नयी बात नहीं. लेकिन सरकार चुनाव से पहले बैकफुट पर दिखे, इसे अच्छा संकेत नहीं माना जाता. राजनीति की समझदारी रखने वालों का कहना है कि अगर ऐसा होता है, तो कहीं ना कहीं सरकार को चुनाव में अच्छा परिणाम ना आने की चिंता सता रही होती है. और यही हो रहा है झारखंड में. झारखंड में रघुवर सरकार कई मामलों में बैकफुट पर दिख रही है. ऐसे मामले जिसमें सरकार ने सख्ती से कदम बढ़ाए अब उन्हीं मामलों में सरकार अपने कदम पीछे खींच रही है. ऐसे ही कुछ मामलों पर प्रकाश डालने की कोशिश हो रही है इस रिपोर्ट में.

मौखिक आदेश देकर सरकार ने रुकवा दिया स्कूलों का विलय 

यह सबसे ताजा और ज्वलंत उदाहरण है. स्कूलों की विलय करने सरकार के एजेंडे में कभी सबसे ऊपर था. लेकिन पुख्ता सूत्रों का कहना है कि सीएम कार्यालय से शिक्षा विभाग को यह मौखिक आदेश दे दिया गया है कि स्कूलों के विलय पर रोक लगे. हालांकि इस मामले पर शिक्षा विभाग का कोई अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहा है. हिंदी दैनिक प्रभात खबर ने दो दिन इस खबर को प्रमुखता से छापा. सरकार ने दो फेज में स्कूलों के विलय का कार्यक्रम चलाया. विभाग की माने तो इन दोनों फेज में करीब 5000 स्कूलों का विलय हुआ. स्कूलों के विलय को लेकर सांसद और विधायकों में काफी गुस्सा देखा गया है. कोडरमा के सांसद रविंद्र राय ने तो खुलकर इस बात का विरोध किया था. वहीं दूसरे विधायक भी कई फोरम पर शिकायत करते रहे हैं. लेकिन सरकार को जनप्रतिनिधियों के विरोध से फर्क नहीं पड़ा. लेकिन चुनाव के पहले अब स्कूलों के विलय पर रोक लगा दी गयी है.

पारा शिक्षक मामले में बैकफुट पर सरकार

राज्यभर में करीब 67 हजार पारा शिक्षक हैं. वोट बैंक की नजर से देखा जाए तो करीब तीन लाख वोट पारा शिक्षक प्रभावित कर सकते हैं. 15 नवंबर को जिस तरीके से पारा शिक्षकों को पीटा गया और गिरफ्तार किया गया. जेल भेजा गया. सीएम ने 15 नवंबर के कुछ दिनों के बाद ही एक सभा को संबोधित करते हुए जिस तरीके से पारा शिक्षकों को नतीजा भुगत लेने को कहा था. उससे साफ हो गया था कि पारा शिक्षकों पर सरकार कड़ी कार्रवाई करने वाली है. पारा शिक्षक वाली घटना के बाद विधायकों और सांसदों की क्षेत्र में काफी फजीहत हुई. खासकर विधायक अपने कार्यकर्ताओं को जवाब नहीं दे पा रहे थे. लेकिन कुछ ही दिनों में पारा शिक्षक मामले में सरकार बैकफुट पर दिखी. शिक्षा मंत्री मीडिया के सामने आकर पारा शिक्षकों को वार्ता के लिए बुलाया. हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया. 25 फीसदी मानदेय बढ़ाने का भरोसा दिया. लेकिन पारा शिक्षक अपनी मांगों को लेकर लगातार 60 दिनों से हड़ताल पर हैं. हड़ताल की वजह से राज्य के करीब 20 हजार स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित है. सरकार हर हफ्ते पारा शिक्षकों से वार्ता कर रही है.

अब विधायकों को कहा जा रहा है, अपने क्षेत्र के कमांडर हैं आप

Related Posts

शिक्षा विभाग के दलालों पर महीने भर में कार्रवाई नहीं हुई तो आमरण अनशन करूंगा : परमार

सैकड़ो अभिभावक पांच सूत्री मांगों को लेकर शनिवार को रणधीर बर्मा चौक पर एक दिवसीय भूख हड़ताल पर बैठे

यह बात किसी से छिपी नहीं है कि इस सरकार में विधायकों की कितनी चलती है. हालत यह है कि विधायक अपने क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को जवाब नहीं दे पाते. निश्चित तौर पर विधायकों का मनोबल टूटा है. विधायकों के साथ-साथ क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है. आगामी चुनाव में सांसद के लिए मैदान में उतरने वाले बीजेपी के उम्मीदवारों की सबसे बड़ी चिंता भी यही है कि कार्यकर्ताओं में कैसे दोबारा से उत्साह भरा जाए. नौ जनवरी को प्रभात खबर में रिपोर्ट छपी की बीजेपी के लोकसभा प्रभारी मंगल पांडे ने विधायकों और पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में साफ कहा कि आप अपने क्षेत्र के कमांडर इन चीफ हैं. क्षेत्र में डटें. संगठन के साथ तालमेल बनाकर चुनावी मुहिम में लगें. जमीनी स्तर पर सांगठनिक तैयारी का जायजा लें. केंद्र और राज्य सरकार की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाएं. साढ़े चार सालों में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने झारखंड को जो दिया है, उसे जनता तक ले जाए. उन्होंने विधायकों का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि वह ज्यादा से ज्यादा समय क्षेत्र में रहें. साथ ही कहा कि चुनाव में विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. अपने-अपने लोकसभा के लिए पूरी मेहनत करें. ऐसा माना जा रहा है कि मंगल पांडेय एक बार फिर से विधायकों में ऊर्जा डालने की कोशिश कर रहे हैं.

शाह ब्रदर्स का खनन पट्टा रद्द किया

शाह ब्रदर्स का मामला कोर्ट से लेकर बार काउंसिल से होकर राजनीतिक गलियारों में खूब घूमा. अच्छी-खासी फजीहत होने के बाद आखिर में सरकार को शाह ब्रदर्स का लाइसेंस रद्द कर दिया. मामले में हाइकोर्ट में अवमानना याचिका पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस डीएन पटेल की खंडपीठ ने राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद सुनवाई स्थगित कर दी. इसके पहले राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता अजीत कुमार ने बताया था कि पश्चिमी सिंहभूम स्थित शाह ब्रदर्स के आयरन और माइंस की लिस्ट को सरकार ने रद्द कर दिया है. लीज रद्द हो जाने के बाद अब प्रार्थी ने शाह ब्रदर्स की अवमानना याचिका पर सुनवाई का कोई औचित्य नहीं रह गया. प्रार्थी की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व में एकल पीठ ने किस्त में राशि जमा करने की छूट दी थी. दो किस्त के भुगतान के बाद परिवहन चालान जारी करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राज्य सरकार ने शाह ब्रदर्स के खनन पर रोक लगा दी थी.

इसे भी पढ़ें – ग्लोबल स्किल समिट : एक लाख युवाओं को मिली नौकरी, बलिया सोरेन को 11 लाख का पैकेज

इसे भी पढ़ें – राज्य सरकार ने केंद्र को सौंपी रिपोर्ट, कहा- एक भी मौत नहीं हुई भूख से

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: