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नहीं हो पा रहा ILO 189 के निर्देशों का पालन, घरेलू कामगारों के लिए बनाना था कानून

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  • 2011 में जेनेवा में आयोजित हुआ था कन्वेंशन
  • ILO 189 में भारत ने जतायी थी सहमति
  • 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने दिया पीएफ देने का निर्देश

Chhaya

Ranchi: घरेलू कामगारों की समस्या जगजाहिर हैं. ऐसी समस्याओं में अवकाश न मिलना, तय समय से अधिक काम लेना, छुआछुत आम है. साल 2011 में इंटरनेशनल  लेबर आर्गेनाइजेशन कन्वेंशन  189 में शामिल देशों  को यह निर्देष दिया गया था कि घरेलू कामगारों से संबधित कानून बनायें. भारत भी इस कन्वेंशन  में शामिल था. इसके बावजूद देश में अब तक कोई ठोस कानून घरेलू कामगारों के हित में नहीं बनाया गया. यहां तक कि कामगारों के हितों में कन्वेंशन  में जारी घोषणाओं का देश में समर्थन भी नहीं दिया जा रहा. जबकि भारतीय जनसंख्या की बड़ी आबादी घरेलू काम करके ही अपनी आजीविका चलाता है. राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन के आकंड़ों के अनुसार देश में लगभग 42 लाख घरेलू कामगार हैं. हालांकि कुछ संगठनों का मानना है कि देश में लगभग दो से तीन करोड़ लोग घरेलू कामगार के कार्य में लिप्त हैं. निबंधन नहीं होने कारण इनकी वास्तविक संख्या की जानकारी लेना कठिन है.

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था पीएफ देने का निर्देश

हालांकि साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने घरेलू कामगारों को पीएफ देने का निर्देश दिया था. जिसके बाद दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों ने इसे लागू किया. लेकिन अभी भी अधिकांश राज्यों में घरेलू कामगारों को पीएफ के दायरे से बाहर रखा गया है. झारखंड में इस संदर्भ में कोई घोषणा नहीं की गयी है. समाजिक सुरक्षा के तहत घरेलू कामगारों को नियत समय में उनके अधिकार भी राज्य में नहीं मिल पा रहे. इन्हें नियत अवकाश और काम के घंटे को लेकर भी केंद्र सरकार योजनाएं बना रही है, लेकिन इसमें काफी समय लग जाएगा.

समाजिक सुरक्षा नाम की

राज्य में घरेलू कामगारों को भले ही समाजिक सुरक्षा के दायरे में रखा जाता है. लेकिन कार्यस्थल पर इन्हें किसी तरह की सुरक्षा नहीं दी जाती है. इस क्षेत्र में काम रही नेशनल डोमेस्टिक वर्कर्स वेलफेयर ट्रस्ट ने जानकारी दी कि घरेलू कामगार समान्यतया महिलाएं ही होती हैं. ऐसे में किसी न किसी बहाने इन पर चोरी का इल्जाम लगाया जाता है. यहां तक कि दूसरे राज्यों में जाने पर महिलाओं के साथ दुर्व्यहार भी किया जाता है. पिछले दिनों कुछ अखबारों में भी घरेलू कामगारों के उपर चोरी के अधिक मामले होने की खबरें छपी थी.

क्या हैं कन्वेंशन 189 में दिये गये प्रावधान

इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन 189 के निर्देश के अनुसार घरेलू कामगारों को कार्यस्थल पर सुरक्षा दी जाएगी, छुआछुत, भेदभाव आदि नहीं किया जाएगा, देश के कानून के अनुसार न्यूनतम उम्र घोषित की जाएगी, घरेलू कामगारों के बच्चों से काम नहीं लिया जाएगा, घरेलू कामगारों की शिक्षा और नौकरी संबधी समेत अन्य प्रावधान हैं.

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