
Ranchi: राजधानी रांची की पुलिसिंग सिस्टम अब बिल्कुल बदल गई है. लोकसभा चुनाव को लेकर बड़े पैमाने पर राज्यभर में पुलिस अधिकारियों को एक जिला से दूसरे जिला में अदला-बदली किया गया है. राजधानी रांची में भी तैनात सभी पुलिस अधिकारियों का तबादला किया गया है.
राजधानी रांची में अलग-अलग जिलों से आए पुलिस अधिकारी इश्कबाज, गालीबाज और रंगबाज बन रहे हैं, जिसका कानून व्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है. हालांकि मामले की जानकारी सामने आने के बाद ऐसे पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई तो हुई है लेकिन सवाल यह कि यदि इस प्रकार की पुलिसिंग राजधानी रांची में होगी तो किस प्रकार से अपराधियों पर लगाम लगाया जाएगा.
रांची में बेखौफ होकर अपराधी आपराधिक वारदात को अंजाम दे रहा है. वहीं पुलिस अधिकारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं. राज्य के मुखिया ने खुद सभी अधिकारियों के साथ बैठक कर कहा था कि किसी भी व्यक्ति को थाना आने में संकोच नहीं करना चाहिए लेकिन थाना में जाने के बाद लोगों को कई परेशानियों को सामना करना पड़ रहा है. थाना जाने के बाद थानेदार गालीबाज, रंगबाज और इश्कबाज बन जा रहे हैं, जिसके कारण एक महिला ने आत्महत्या करने का प्रयास भी की है.
सुखदेव नगर थाना के तत्कालीन थानेदार निकले इश्कबाज
दूसरे जिले से आए रामाकांत ओझा को सुखदेव नगर थाना का थानेदार बनाया गया था, लेकिन थानेदार बनने के एक सप्ताह बाद ही उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया. फरवरी महीने में एक महिला ने रामाकांत ओझा पर गंभीर आरोप लगाए. रामाकांत ओझा पर महिला ने कमरे में अकेले बुलाने और मेंटल टॉर्चर करने, जानबूझ कर परेशान करने, फर्जी केस में फंसाने की धमकी देने के आरोप लगाए. पुलिस द्वारा टॉर्चर किए जाने से परेशान महिला ने सुसाइड अटेम्प भी किया.
सदर के तत्कालीन थानेदार निकले गालीबाज
सदर थाना में 22 फरवरी को जमीन विवाद में एक पक्ष के लोगों के साथ गाली-गलौज करते सदर थानेदार लक्ष्मीकांत का सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ था. यह मामला विधानसभा में भी उठाया गया, इसके बाद एसएसपी ने थानेदार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए लाइन हाजिर कर दिया था. आपको बता दें कि इस मामले को लेकर एससी-एसटी थाना में एफआईआर दर्ज किया गया है.
धुर्वा थानेदार के रवैये से परेशान होकर निलंबित करने की मांग
धुर्वा थानेदार के रवैये से परेशान होकर लोग निलंबित करने की मांग कर रहे हैं. उस इलाके के लोगों ने धुर्वा थाना का घेराव भी किया है. धुर्वा थानेदार पर आरोप है कि वह ठेकेदार के साथ मिले हुए हैं. थानेदार की मिलीभगत से ठेकेदार दुकानदारों से अधिक राशि वसूलना और थाने में जाने के बाद रंगबाजी करने का आरोप है.




