
Ranchi : राज्य में सौर उर्जा को बढ़ावा दिया जा रहा है. उर्जा विभाग और झारखंड रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी Jharkhand Renewable Energy Development Agency Ltd (JREDA) इस पर काम कर रही. जिसमें किसानों से लेकर सरकारी भवनों, एयरपोर्ट को सौर उर्जा लैस की जा रही है. इसी बीच, जरेडा की ओर से गाइडलाइन जारी की गयी है. जारी गाइडलाइन राज्य में सौर उर्जा को बढ़ावा देने. साथ ही जो उपभोक्ता पहले से सौर उर्जा का इस्तेमाल कर रहे हैं. उनके लिये सौर उर्जा के बचत के साथ बिजली बिल में कैसे बचत की जाए इसकी जानकारी दी गयी है. जारी गाइडलाइन की मानें तो राज्य में सबसे अधिक बिजली का उपयोग घरेलू उपभोक्ता करते हैं. जो प्रतिदिन 5664 मिलियन मेगावाट है. कुल बिजली उपभोग में घेरलू उपभोक्ताओं की भूमिका 60.48 प्रतिशत है.
इसे भी पढ़ें : JHARKHAND WINTER SESSION : गरमा धान के समर्थन मूल्य पर केंद्र सरकार से विमर्श करेगी राज्य सरकार : बादल
जरेडा के गाइडलाइन में घेरलू उपभोक्ताओं के लिये विशेष प्रावधान है. जिसके तहत उपभोक्ता एसी को 24 या 25 डिग्री सेल्सियस के बीच चलाते है तो बिजली की खपत कम होगी. फिर चाहे वो बिजली सौर उर्जा की हो या थर्मल. एक अनुमान है कि उपभोक्ताओं को इससे 36 से 40 फीसदी बिजली बिल में बचत हो सकती है. लेकिन ऐसा करने के लिये एसी को 24-25 या नियत तापमान में चलाना होगा. जरेडा से जानकारी मिली की जल्द राहत के लिये लोग गर्मियों में एसी फुल कर देते है. ऐसे में बिजली की खपत अधिक होती है. और बिजली की भी बर्बादी होती है. ऐसे में 24 डिग्री सेल्सियस में एसी चलाने से कुछ समय में सब नॉर्मल हो जाता है. इस गाइडलाइन की मानें तो, घरेलू उपभोक्ताओं के बाद, कॉमर्शिय सेक्टर में बिजली की खपत अधिक है. जो 877 मिलियन प्रति यूनिट है. इंडस्ट्रीज सेक्टर में 2445 और कृषि कार्यो में 194 मिलियन मेगावाट बिजली की खपत है.
इसे भी पढ़ें : JPSC PT परीक्षा रद्द करने की मांग को ले विधानसभा में विपक्ष का हंगामा, विधायकों ने वेल में जाकर की नारेबाजी
सौर उर्जा का अधिक से अधिक इस्तेमाल हो. सही बिजली उपकरणों का उपयोग किया जायें. गीजर या वाटर हीटर के लिये सही उपकरणों का इस्तेमाल करें. इससे बिजली की खपत अधिक है. थर्मल एनर्जी के स्रोत सीमित है. भारत में इसके संसाधान एक प्रतिशत है. जबकि सौर उर्जा के लिये संसाधन प्राकृतिक है, ऐसे में इस पर बल दिया जाना चाहिये. घर को इंसुलेट करें. सौर उर्जा का उपयोग, परिचालन लागत, बचत में है. ग्रीन एनर्जी के अधिकांश संसाधन दुबारा उपयोग हो सकता है. थर्मल एनर्जी वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में है, जो 83 प्रतिशत तक जिम्मेवार है.
इसे भी पढ़ें : Jharkhand Winter Session : जेपीएससी परीक्षा की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर विपक्ष ने किया प्रदर्शन




