
Ranchi: धनबाद के हाजरा मेमोरियल हॉस्पिटल में शुक्रवार की देर रात आग लग गई. इस दुर्घटना में प्रख्यात चिकित्सह डॉ. विकास हाजरा समेत 5 लोगों की मौत हो गई. जबकि हॉस्पिटल में आग से निपटने के इंतजाम थे. वहीं फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया. लेकिन राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में आग से निपटने के इंतजाम फेल है. ज्यादातर जगहों पर लगे फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर हो चुके हैं. ऐसे में रिम्स में अगर आग लगी तो मरीजों को बचाना मुश्किल हो जाएगा. वहीं जानमाल का कितना नुकसान होगा इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता. इससे साफ है कि रिम्स में इलाज करा रहे मरीज भगवान भरोसे हैं. बताते चलें कि हॉस्पिटल्स में आए दिन हादसों के बावजूद रिम्स प्रबंधन नींद में है.
1500 मरीज एडमिट है रिम्स में
रिम्स की इस लापरवाही की वजह से इलाजरत मरीज और उनके परिजनों को भी डर सताता रहता है. अगर शार्ट सर्किट हुआ तो फिर क्या होगा? चूंकि हॉस्पिटल में हमेशा 1500 से अधिक मरीज एडमिट रहते हैं. वहीं उनके साथ उतनी ही संख्या में परिजन भी हॉस्पिटल में होते हैं. इन सबके अलावा हॉस्पिटल में सैकड़ों डॉक्टर, स्टाफ, नर्स व सफाई कर्मी भी ड्यूटी में तैनात रहते हैं.
न्यू बिल्डिंग में स्थिति गंभीर
1960 के दशक में बने रिम्स के पुराने बिल्डिंग में अभी सेंट्रलाइज्ड फायर फाइटिंग की व्यवस्था की गई है. वहीं जगह-जगह पर फायर एक्सटिंग्विशर भी लगे हैं. लेकिन न्यू बिल्डिंग में कार्डियोलॉजी, ओंकोलॉजी और डेंटल कालेज में लगे फायर एक्सटिंग्विशर एक्सपायर हो चुके हैं. इतना ही नहीं एक्सपायर हुए 1 से लेकर पांच साल का समय बीत चुका है. इसके बावजूद प्रबंधन ने इसे बदलवाने को लेकर पहल नहीं की है. जिससे साफ है कि प्रबंधन को मरीजों की जान की कोई परवाह नहीं है.
इस मामले में न्यूजविंग ने जब पीआरओ डॉ राजीव कुमार से संपर्क किया तो उन्होंने कहा कि इसके लिए एजेंसी को काम दिया गया है. उन्हें टाइम से सभी एक्सटिंग्विशरों को रीफिल करना है और जरूरत पड़ने पर बदलना है. इस तरह की लापरवाही तो नहीं होनी चाहिए. इसकी सूचना डीएमएस को भी दे दी गई है.
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