
Palamu : जिले में प्रकृति के पर्व सरहुल की मंगलवार को धूम रही. जिले के कई क्षेत्रों में प्रकृति प्रेमियों द्वारा पूजा का आयोजन किया गया. मुख्य समारोह जीएलए कॉलेज परिसर में आयोजित किया गया.
यहां आदिवासी छात्राओं द्वारा आकर्षक नृत्य किया गया और बाद में निकाली गयी शोभायात्रा ने समां बांध दिया. शोभायात्रा के दौरान पारंपरिक नृत्य पर थिरकते हुए प्रकृति प्रेमियों ने करम की डाली को विसर्जित किया.
मुख्य समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय के कुलपति डा. एसएन सिंह, सीआरपीएफ 134 बटालियन के कमांडेंट अरूण देव शर्मा के अलावा अन्य सीआरपीएफ अधिकारियों ने भाग लिया. अतिथियों ने एक साथ मांदर बजाया और प्रकृति की रक्षा का संकल्प लोगों को दिलाया.
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सरहुल पर लें जल-जंगल बचाने का संकल्प : लवली
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर जिला पार्षद लवली गुप्ता उपस्थित थीं. मौके पर उन्होंने कहा कि सरहुल प्रकृति का पर्व है. बसंत के मौसम में यह पावन पर्व साल के पेड़ की शाखाओं पर नए फूल खिलने के बाद मनाया जाता है.
यह गांव के देवता की पूजा है, जिन्हें इन जनजातियों का रक्षक माना जाता है. झारखंड में मुख्य रूप से 5 समुदाय सरहुल को अलग-अलग तरह से मनाते हैं. सरहुल का नृत्य बहुत मनमोहक होता है.
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प्रकृति का अनमोल पर्व है सरहुल : दिलीप नामधारी
प्रकृति का महान पर्व सरहुल सरना सरहुल समिति के तत्वावधान में सतबरवा प्रखंड मुख्यालय में आयोजित हुआ. सतबरवा प्रखंड मुख्यालय में धूमधाम से मनाया गया. झाविमो के युवा नेता दिलीप सिंह नामधारी ने नावाडीह कोल्पारा में मांदर बजाया और उसकी थाप पर झुमर खेला. महिलाएं उस पर थिरकती रहीं.
नामधारी ने सरहुल को प्रकृति का वरदान और अनमोल त्योहार बताया. दूसरी और सतबरवा में जल, जंगल और जमीन की पूजा विधि-विधान से चतरा से राजद के प्रत्याशी सुभाष यादव और झामुमो नेता शशिभूषण मेहता, संजय यादव, उदय सिंह ने की.
इसमे दर्जन भर से ज्यादा अखाडो़ं के महिला-पुरूष शामिल हुए. मौके पर अन्य लोगों के अलावा आयोजन समिति के अध्यक्ष अजय उरांव, कार्यकारी अध्यक्ष संतोष उरांव, विशुनदेव उरांव, शिवशंकर उरांव, गुठल उरांव मौजूद थे.
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चियांकी सरना स्थल पर लगा विधिक जागरूकता शिविर
सदर प्रखंड के चियांकी सरना स्थल के समीप जिला विधिक सेवा प्राधिकार, पलामू के तत्वावधान में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. मौके पर काफी संख्या में आदिवासी समाज के साथ-साथ स्थानीय लोग उपस्थित थे.
मौके पर अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कहा कि सरहुल प्रकृति से जुड़ा पर्व है. पूजा आस्था के साथ समाज को जोड़ने का काम करता .इस पर्व में पर्यावरण की सुरक्षा के उद्देश्य से पेड़ों की पूजा की जाती.
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