
Palamu : पलामू जिले के पिपरा में शनिवार को नक्सलियों के हमले में जान गंवाने वाले जेएमएम नेता मोहन गुप्ता एमसीसी (भाकपा माओवादी का पूर्ववर्ती संगठन- माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर) के कैडर रह चुके थे.
यह जानकारी छतरपुर के एसडीपीओ शंभू सिंह ने रविवार को दी.
एसडीपीओ ने यह भी कहा कि पूर्व में हुए हमले के बाद भी मोहन गुप्ता ने कभी भी सुरक्षा की मांग नहीं की, इसलिए उन्हें सुरक्षा मुहैया नहीं करायी गयी थी.
बता दें कि 2012 में मोहन गुप्ता के वाहन पर नक्सलियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी लेकिन वह उस समय बाल-बाल बच गये थे.
एसडीपीओ ने कहा कि चुनाव और पुराना टारगेट रहने के कारण नक्सलियों ने मोहन गुप्ता की हत्या की, ताकि मतदान या उससे पहले दहशत फैलायी जा सके.
उन्होंने बताया कि मोहन गुप्ता और सूरज सोनी की हत्या के बाद नक्सलियों की धर पकड़ तेज की गयी है. कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.
जख्मी युवकों का बयान लिया गया है. दाह संस्कार की वजह से मृतकों के परिजनों का बयान नहीं लिया जा सका है. बयान लेने के बाद प्राथमिकी दर्ज की जायेगी.
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चुनावी गहमा-गहमी के बीच पिपरा में मातमी सन्नाटा
विधानसभा चुनाव को लेकर पलामू जिले में गहमा-गहमी का माहौल है, लेकिन पिपरा में मातमी सन्नाटा पसरा है. रविवार को बाजार स्वतः स्फूर्त बंद रहा और लोगों में नक्सलियों की दहशत देखने को मिली.
हालांकि पूरे पिपरा इलाके में सुरक्षा बलों को तैनात किया गया है. नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है. एरिया डामिनेशन का कार्य चल रहा है.
मृतकों का अंतिम संस्कार
रविवार को मेदिनीनगर पीएमसीएच से जैसे ही मोहन गुप्ता और सूरज सोनी के शव पिपरा पहुंचा. लोगों की भारी भीड़ जमा हो गयी. परिजन दहाड़ मार कर रो रहे थे.
मोहन गुप्ता के घर पर दिन भर लोगों का आना-जाना लगा रहा. हर कोई नक्सलियों की इस घटना से सकते में था. दोपहर में मोहन गुप्ता और सूरज सोनी के शवों का अंतिम संस्कार पास के घाट पर किया गया.

लंबे समय बाद नक्सली धमक
बिहार की सीमा से सटे नक्सल प्रभावित पिपरा में लंबे समय बाद प्रतिबंधित भाकपा माओवादी के नक्सलियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी.
एक मोटरसाइकिल पर सवार तीन नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर मोहन गुप्ता एवं एक फल व्यवसायी को मौत की नीद सुला दी. घटना के बाद मौके पर पर्चा छोड़ा और भाग निकले. पर्चा में विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने की अपील की गयी थी.
दो अन्य युवकों को भी गोली लगी है. दोनों युवक रांची रिम्स में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे हैं.
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खुफिया तंत्र की खुली पोल
शनिवार की शाम घटना से एक घंटे पहले जिले के पुलिस अधीक्षक अजय लिंडा और उपायुक्त डा. शांतनु कुमार अग्रहरि ने संयुक्त रूप से पीसी की थी. पुलिस अधीक्षक ने बताया था कि पलामू में स्थिति सामान्य है.
इस बयान के एक घंटे भी नहीं बीते कि पिपरा में नक्सलियों की धमक सामने आयी. ऐसे में यहां कहना गलत नहीं होगा कि पुलिस का खुफिया तंत्र भी मान कर चल रहा है कि पलामू से नक्सलियों का सफाया हो गया है.
नक्सलियों का एके 47 से लैस होकर भीड़ भाड़ वाले इलाके में घुस जाना और फिर फायरिंग करना, बड़ी वारदात है. ऐसे में पुलिस के सूचना तंत्र पर सवाल उठना लाजिमी है.
लातेहार के चंदवा में नक्सलियों के हमला के पीछे भी पुलिस के खुफिया विभाग की पोल खुल गयी है. पलामू प्रमंडल में 24 घंटे के बीच नक्सलियों की दो बड़ी घटनाएं इसकी पुष्टि करने के लिए काफी है.
घने जंगल और पहाड़ों से घिरा है पिपरा
एसडीपीओ ने बताया कि पिपरा क्षेत्र का इलाका घने जंगल और पहाड़ों से घिरा हुआ है. घटनास्थल से दो किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ और घना जंगल है. ऐसे में इससे इंकार नहीं किया जा सकता है कि नक्सलियों की एक्टिविटीज नहीं रहती होगी.
इस क्षेत्र में बोदराम और रमण जी का दस्ता भ्रमण करता है. हालांकि घटना से पहले इनके दस्ते की कोई गतिविधि इलाके में पायी नहीं गयी है.
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