
- झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन ने कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र को बताया किसान हितैषी
Ranchi : बीजेपी के प्रमंडल स्तरीय किसान सम्मेलन व चौपाल पर तंज कसते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा है कि दर्द देने वाले ने अब दवा बांटने के लिए किसानों के बीच जाने का कार्यक्रम बनाया है. कोरोनाकाल में विगत विधानसभा चुनाव में जनता द्वारा नकारे और राजनीतिक प्रपंचों में व्यस्त रहने के बाद अब जाकर बीजेपी को किसानों की याद आयी है.
उन्होंने कहा कि बीजेपी लाख कोशिश कर लें, लेकिन देश के किसी राज्य के किसान अब इनके झांसे में आनेवाली नही हैं. कांग्रेसी प्रवक्ता ने कहा कि अन्नदाता किसान जो देश का पेट पालता है, आज उसे अपनी फसलों का समर्थन मूल्य पाने के लिए सड़कों पर संघर्षरत रहना पड़ा है. उन्होंने पूछा है कि जब मंडियां खत्म हो जाएगी तो उनको न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि MSP कौन देगा?
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कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र को गलत तरीके से पेश कर रही है बीजेपी
राजीव रंजन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के लोकसभा चुनाव के दौरान जारी घोषणापत्र को बीजेपी नेता गलत तरीके से पेश कर रहे है. घोषणापत्र में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि बड़े गांव और छोटे कस्बों में किसान भाइयों के लिए कृषक बाजार बनाये जाएंगे.
कृषि उत्पाद की कीमतों को निर्धारित करने के लिए वर्तमान कृषि आयोग के स्थान पर National Commission on Agricultural Development & Planning की स्थापना की जाएगी. इसमें किसानों को शामिल किया जाएगा तथा इसकी सिफारिशों को लागू करना बाध्यकारी होगा.
घोषणा पत्र में इस बात का उल्लेख था कि सीमांत कृषकों एवं कृषि मज़दूरों के लिए एक आयोग की स्थापना की जाएगी जो इनकी आय वृद्धि को लेकर नीतियों और कार्यक्रमों के बारे में सुझाव देगा.
सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कांग्रेस पार्टी ने न्याय योजना लागू करने का आश्वासन दिया था, जिसके तहत गरीब परिवारों को प्रतिवर्ष 72,000 रुपये देने का प्रावधान था. इसके लागू होने से सबसे ज्यादा लाभ लघु एवं सीमांत कृषक परिवारों को मिलता.
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कांग्रेस ने समझी कृषकों की पीड़ा
उन्होंने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ही वो पार्टी है जिसने कृषकों की पीड़ा को समझ कर उनकी हर प्रकार से सहायता की पहल की है. किसानों को भाजपा के समान कभी भी पूंजीपतियों के दया के भरोसे नहीं छोड़ा है.
कांग्रेस पार्टी के 2019 के घोषणा पत्र में इसके लिए रोड मैप का उल्लेख था. इसमें किसानों को कर्ज मुक्ति, किसानों की आय सुनिश्चित करने का पर्याप्त प्रावधान, किसानों को एमएसपी लाभ जारी रहना और कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए आवश्यक संरचनाओं के साथ आवश्यक व्यवस्था बनाना है.
जबकि मोदी सरकार की भेदभावपूर्ण व पक्षपातपूर्ण नीतियों के कारण आज कृषि क्षेत्र को लगातार नुकसान हो रहा है. कृषि उपकरणों पर खाद पर अधिक GST लगाया जाना मोदी सरकारी की गलत नीतियों का ही परिणाम है.
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