
Ranchi: संयुक्त ट्रेड यूनियनों के महापड़ाव का मंगलवार अंतिम दिन रहा. इसके साथ ही सभा में मुख्य वक्ता के रूप में किसान सभा के संयुक्त सचिव अवधेश कुमार शामिल हुए. सभा को संबोधित करते हुए अवधेश कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने अपने किसी भी वादे को पूरा नहीं किया. न ही किसान और मजूदरों के मामले में और न ही मूलभुत सुविधाओं से जुड़े मामले में. किसान आंदोलन के समय केंद्र सरकार न्यूनतम सर्मथन मूल्य के संबध में आश्वासन दिया था कि इस पर निर्णय लिया जायेगा. लेकिन अभी तक सरकार ने इस पर कोई पहल नहीं की.
यहां तक की किसान आंदोलन के दौरान किसानों की हत्या करने वाले अपराधी की गिरफ्तारी तक नहीं हुई है. मजदूरों से जुड़े कानून को तो केंद्र सरकार ने खत्म किया ही. वहीं, बिजली संशोधन अधिनियम भी सरकार ने वापस नहीं लिया है. अवधेश ने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में किसान और मजदूरों के लिये सरकार निर्णय नहीं ले सकती है. कॉरपोरेट को बढ़ावा देने के लिये सरकार किसान और मजदूरों के अधिकारों का हनन करती है.
देश में नहीं चलेगा ऐसा कानून
इस दौरान अवधेश ने कहा कि देश में जो भी कानून किसान और मजदूर विरोधी है, ऐसा कानून नहीं चलेगा. इसका विरोध किया जायेगा. सरकार को समझना होगा कि वोट का अधिकार हर वर्ग को है. जो आने वाले समय में सत्ता तय करेगी. ऐसे में सरकार को किसान और मजदूरों के हित में निर्णय लेना चाहिये. उन्होंने कहा कि किसानों और मजदूरों के साथ जुड़ा ये आंदोलन आगे और भी उग्र रूप लेगा. आगे भी इसकी रणनीति बनायी जायेगी.

संयुक्त ट्रेड यूनियनों की ओर से राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा गया. जिसमें 21 सूत्री मांगों की जानकारी दी गयी. इस दौरान सीटू के प्रकाश विप्लव, किसान सभा के सुरजीत सिन्हा, सुफल महतो समेत अन्य मौजूद रहे. महापड़ाव में सीटू, इंटक, एटक, एआईसीसीटीयू, एचएमएस, झारखंड राज्य किसान सभा, एआईकेएम समेत अन्य ट्रेड यूनियनों की सहभागिता रहीं. जिसमें हजारों की संख्या में छात्र, महिलाएं, किसान, मजदूर समेत अन्य वर्ग के लोग शामिल हुए.
21 सूत्री मांग: चार मजदूर लेबर संहिताओं को समाप्त करना, किसानों के लिए वैधानिक एमएसपी सुनिश्चित करना, विनिवेश और एनएमपी के प्रयासों को समाप्त करना, बिजली संशोधन विधेयक एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति वापस करना, अनौपचारिक क्षेत्र के कामगार ठेकेदार कामगार एवं स्कीम वर्करों के लिए कानूनी तथा सामाजिक सुरक्षा, समान काम के लिए समान वेतन, शहरी क्षेत्रों के लिए रोजगार गारंटी समेत अन्य मंाग है.




