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राष्ट्रव्यापी हड़ताल की पूर्व संध्या पर बैंक कर्मचारियों ने निकाला मशाल जुलूस, बैंकिंग लॉ संसोधन बिल वापस लेने की जोरशोर से उठायी मांग

Jamshedpur  : यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के बैनर तले बैंकों के राष्ट्रव्यापी हड़ताल की पूर्व संध्या पर शहर में बैंक कर्मियों ने मशाल जुलूस निकालकर अपनी आवाज बुलंद की. यह जुलूस बिष्टुपुर पोस्टल पार्क से निकलकर वोल्टास गोलचक्कर होते हुए आंध्रा बैंक के समक्ष सभा में बदल गया. इस दौरान केंद्र सरकार से बैंकिंग लॉ संशोधन बिल वापस लेने की मांग जोर शोर से की गई. वक्ताओं ने कहा कि उनके संज्ञान में लाया गया है कि सरकार संसद के चालू सत्र में ‘बैंकिंग कानून (संशोधन) विधेयक 2021’ पेश कर रही है ताकि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का निजीकरण कर सके. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सामान्य रूप से हमारे देश के आर्थिक विकास में और विशेष रूप से समाज के वंचित वर्गों और देश के पिछड़े क्षेत्रों के बीच भूमिका निभाई है.
इस प्रक्रिया में आम लोगों को बैंकिंग की कक्षा में लाया गया और इस तरह विकास हुआ. बहुत पहले 2008 में जब विश्व अर्थव्यवस्था एक गहरे वित्तीय संकट और मंदी में गिर गई थी, यह पीएसबी था, जिसने भारतीय अर्थव्यवस्था को बनाए रखने में मदद की थी. एक तर्क है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अच्छा नहीं कर रहे हैं और इसलिए बेहतर दक्षता सुनिश्चित करने के लिए इन बैंकों का निजीकरण करना होगा. हम सभी निजी बैंकों की दक्षता जानते हैं, जिनमें से कई गलत प्रबंधन के कारण अतीत में विफल और बंद हो गए है. दूसरी ओर, सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंक अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और पर्याप्त लाभ कमा रहे हैं. इससे पता चलता है कि यह बैंकों का राष्ट्रीयकरण नहीं है, जो विफल हो गया है, बल्कि यह कॉरपोरेट और बड़े व्यापारिक घरानों का विलफुल डिफॉल्ट है, जिसने बैंकों को इस संकट में घसीटा है. यहां तक ​​कि दिवाला और दिवालियापन संहिता के तहत, जबकि खराब ऋणों का समाधान किया गया है और बैंकों को ऋण का कुछ हिस्सा वापस मिल सकता है, यह बैंकों के लिए भारी कटौती के साथ रहा है.
यह भी वास्तविकता की बात है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का उपयोग बीमार निजी क्षेत्र के बैंकों जैसे ग्लोबल ट्रस्ट बैंक, यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक, बैंक ऑफ कराड आदि को राहत देने के लिए किया गया है. हाल के दिनों में यह यस बैंक था, जिसे सार्वजनिक क्षेत्र के एसबीआई ने बेल आउट कर दिया था. निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी एनबीएफसी, आईएल एंड एफएस, को सार्वजनिक क्षेत्र के एसबीआई और एलआईसी द्वारा फिर से जमानत दे दी गई. हाल के दिनों में आरबीएल बैंक, बंधन बैंक और चार छोटे वित्त बैंकों जैसे निजी क्षेत्रों ने घाटा दर्ज किया है. आरबीआई ने निजी क्षेत्र के लोकल एरिया बैंक, सुभद्रा लोकल एरिया बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया है. इस तरह आम लोग निजी क्षेत्र के बैंकों से डरने लगे हैं क्योंकि वे अपनी मेहनत की कमाई को बेनकाब कर देते हैं. वक्ताओं ने कहा कि सरकार का दावा है कि वह विभिन्न सामाजिक क्षेत्र के ऋण, पेंशन और बीमा योजनाओं जैसे जन धन, बेरोजगार युवाओं के लिए मुद्रा, रेहड़ी-पटरी वालों के लिए स्वाधान, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा योजना और प्रत्यक्ष लाभ को लागू कर रही है. समाज के वंचित वर्गों के लिए प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना, प्रधान मंत्री किसान कल्याण योजना, अटल पेंशन योजना आदि जैसी स्थानांतरण योजनाएं, जिनमें प्रमुख हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का है. महामारी की अवधि के दौरा यह सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक हैं जो निर्बाध ग्राहक सेवाएं दे रहे हैं. ऐसे में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण से देश के आम लोगों और पिछड़े क्षेत्रों के हितों को खतरा होगा. इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा. इसी को लेकर 16 और 17 दिसंबर को हड़ताल के दौरान बैकों के निजीकरण का विरोध करते हुए विधेयक को वापस लेने की मांग की जाएगी.

इन्होंने रखे अपने विचार

कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाले यूनियन के संयोजक कॉम पिंटू रजक के अलावा कॉम आर बी सहाय,कॉम हीरा अरकने,कॉम डी एन सिंह ,कॉम अमित मोइत्रा कॉम सपन दास का कॉम के.के.दुबे,कॉम मनतोष,कॉम पीयुष, बीएसआर यूनियन के कॉम विश्वजीत देव, जीएससीआईटीयूआई कोल्हान से जुड़े वक्ताओं ने मुख्य रूप से अपने विचार रखें.

इनकी रही सक्रिय भगीदारी

कार्यक्रम को सफल बनाने में कॉम सुबीर, ललीता,निशा,गौरी,निधी, शिल्पी,क्रितिका अनसुमा, अमृता कुलताज,रेनु रानी,बीरेश,भरत, गोपाल रजक,रवि, संजय सिंह चन्दन दत्ता पवन कुमार, एतवा सिंह, राशिद, प्रमोद, सौरभ,संजय,अनीता, शकुंतला, विमल राय,दिव्यांशु गुप्ता, श्रुति सरिता,अदिति प्रकाश,संजीव रेड्डी,पांडूराम सोरेन, प्रेमलाल साहू विवेक पराशर सिन्हा,संदीप कुमार,दुर्गा सोरेन राम जनम तिवारी, महेश भगत,रमाशंकर झा, रितेश सिंह ने सक्रिय भागीदारी निभाई.

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