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न्यूज विंग का खुलासा : FCI में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से करोड़ों ठग रहा अंतरराज्यीय गिरोह

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Rahul Jha

Dhanbad : न्यूज विंग आज एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा करने जा रहा है, जो बेरोजगार युवकों को अपना शिकार बनाकर उनसे करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा है. दरअसल, यह अंतरराज्यीय गिरोह पहले बेरोजगार युवकों को चिह्नित करता है, उसके बाद गिरोह के सदस्य युवकों को भरोसे में लेकर उन्हें एफसीआई (फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) में अच्छे पद पर नौकरी का झांसा देता है. बेरोजगार युवकों के जाल में फंसते ही यह गिरोह उनसे लाखों-करोड़ों रुपये की ठगी कर लेता है. इसी गिरोह का शिकार बने बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी आलोक कुमार. न्यूज विंग से बात करते हुए आलोक कुमार ने बताया कि युवकों से गिरोह के सदस्य दर्जनों फॉर्म भरवाते हैं, ताकि झांसे में आये युवक और उनके परिजनों को किसी तरह का कोई शक न हो. आलोक ने बताया कि झांसे में आये दर्जनों युवकों की एक टोली बनाकर गिरोह द्वारा उन्हें छह महीने की ट्रेनिंग के लिए झारखंड के चतरा जिला के कुल्लू मोड़ स्थित एफसीआई गोदाम भेज दिया गया. वहां एफसीआई के एमओ प्रमोद कुमार मंडल द्वारा सभी युवकों को ट्रेनिंग भी दी गयी. इसके बाद शुरू हुआ ठगी का खेल.

न्यूज विंग का खुलासा : एफसीआई में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों से करोड़ों ठग रहा अंतरराज्यीय गिरोह
ठगी का शिकार युवक.

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आलोक से साढ़े आठ लाख कैश लिये, साढ़े 17 हजार डलवाये बैंक खाते में

पीड़ित युवक के मुताबिक, इस गिरोह के सरगना का नाम है रजनीश श्रीवास्तव. रजनीश बिहार के सीतामढ़ी निवासी कामेश्वर प्रसाद का पुत्र है. पीड़ित युवक आलोक ने बताया कि नौकरी दिलाने को लेकर कुल 11 लाख रुपये में बात हुई थी. ट्रेनिंग के बाद गिरोह का सरगना रजनीश श्रीवास्तव लगातार पीड़ित युवकों और उनके परिजनों के संपर्क में रहता था. उसने हमें तय राशि में से साढ़े आठ लाख रुपये पहले देने को कहा और बाकी रकम नौकरी ज्वॉइन करने के बाद देने की बात तय हुई. पैसे लेने के लिए रजनीश श्रीवास्तव ने मुजफ्फरपुर निवासी आलोक कुमार और उसके पिता संजय ठाकुर को झारखंड के हजारीबाग स्थित आम्रपाली होटल बुलाया. वहां आलोक कुमार और उसके पिता संजय ठाकुर ने रजनीश को आठ लाख रुपये से भरा बैग दिया. इसके बाद 17 हजार पांच सौ रुपये पीड़ित द्वारा ही बैंक अकाउंट संख्या 482610110006735 में डाला गया. यह बैंक अकाउंट नंबर ठग गिरोह के सरगना का ही बताया जा रहा है.

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फर्जी ज्वॉनिंग लेटर और आई कार्ड भेजकर गायब हो गया रजनीश

पैसा लेने के बाद गिरोह ने अचानक से चुप्पी साध ली. वहीं, जब पीड़ित युवक आलोक के पिता संजय ठाकुर ने बार-बार फोन कर आरोपी रजनीश श्रीवास्तव पर नौकरी दिलाने का दबाव डाला, तब इस गिरोह द्वारा गिरिडीह के सरिया स्थित एफसीआई गोदाम का ज्वॉइनिंग लेटर डाक के माध्यम से बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित उनके घर पर भेजा गया. इसमें आलोक का फर्जी पहचानपत्र भी बनाकर डाला गया था, जिसे देख परिजनों को लगा कि चलो भले पैसे लगे, पर उनके पुत्र को सरकारी नौकरी मिल गयी. इसके बाद ज्वॉइनिंग लेटर में तय तारीख के अनुसार आलोक गिरिडीह स्थित एफसीआई गोदाम पहुंचे और लेटर वहां के मैनेजर को दिखाया, तो उन्होंने कहा कि यह प्राइवेट लिमिटेड है. आपका सरकारी एफसीआई गोदाम का ज्वॉइनिंग लेटर है. इसके बाद आलोक के पिता ने गिरोह के सरगना रजनीश को फोन कर सारी बात बतायी, तो उसने उन्हें धनबाद जाने की सलाह दी, जहां उसने उनसे मिल नौकरी ज्वॉइन कराने की बात कही. इसके बाद पीड़ित परिवार धनबाद पहुंचा.

बिहार के मुजफ्फरपुर से गिरिडीह और फिर धनबाद पहुंचे ठगे गये परिवार ने एफसीआई धनबाद के अधिकारी से मिल लेटर दिखाया, जिसके बाद उन्हें इस ज्वॉइनिंग लेटर की सारी सच्चाई का पता चला. दरअसल, अब तक गिरोह द्वारा दिये गये सारे डॉक्युमेंट नकली थे. उन्हें बुरी तरह ठगा गया था. इसके बाद धनबाद के एक होटल में रुके इस परिवार ने कई बार गिरोह के सरगना रजनीश से संपर्क साधने की कोशिश की, पर सफलता नहीं मिली. अंततः ठगी के शिकार बने परिवार ने धनबाद में ही न्यूज विंग से संपर्क साधा और पूरी आपबीती सुनायी.

गिरोह द्वारा भेजा गया फर्जी आई कार्ड.
गिराेह द्वारा डाक से भेजा गया ज्वॉइनिंग लेंटर.

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पीड़ित ने मुजफ्फरपुर लौटकर दर्ज करायी एफआईआर

इस मामले में मंगलवार को बिहार लौटे पीड़ित युवक आलोक कुमार ने मुजफ्फरपुर स्थित मुफस्सिल थाना में तीन लोगों पर एफसीआई में नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने और धोखाधड़ी करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज करायी है. इस मामले में पीड़ित ने मास्टरमाइंड बिहार के सीतामढ़ी निवासी रजनीश श्रीवास्तव, झारखंड के चतरा निवासी प्रमोद कुमार मंडल और चतरा निवासी कथित एफसीआई के एमओ राजू गिरि पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है. साथ ही, पीड़ित परिवार ने बिहार-झारखंड के आलाधिकारियों को बताया है कि इस गिरोह ने बिहार झारखंड के कई जिलों में अपना नेटवर्क चला रखा है. साथ ही इस गिरोह में एफसीआई के कई अधिकारियों की भी संलिप्तता है. इस गिरोह ने अब तक दर्जनों युवकों से यूं ही करोड़ों रुपये ठगे हैं. इसलिए इसका जल्द से जल्द पर्दाफाश किया जाये, ताकि आगे कोई बेरोजगार युवक इनके झांसे में आकर बर्बाद न हो.

पीड़ित द्वारा मुजफ्फरपुर के मुफस्सिल थाना में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए दिया गया आवेदन.

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