
Ranchi : वन विभाग को अब तक एके-47 और रायफल नहीं मिल पाया है. विभाग की हथियार खरीदने की योजना ठंडे बस्ते में चली गयी है. एके-47 और रायफल के लिये वन विभाग ने मद्रास ऑडेनेंश ( हथियार बनाने वाली भारत सरकार की फैक्ट्री) के पास राशि जमा की थी. इसके बाद मद्रास ऑडेनेंश ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को इसकी जानकारी दी. गृह मंत्रालय ने वन विभाग से इस पर अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा. लेकिन वन विभाग ने अब तक इसका जवाब नहीं दिया है.
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क्यों फंसा पेंच
राज्य के वन विभाग ने हथियार रखने के लिये अब तक नियमावली नहीं बनायी है. नियमावली नहीं बनने की वजह से पद का सृजन भी नहीं हुआ. वहीं लाइसेंस के लिये प्रशिक्षण भी अनिवार्य है. यही वजह है कि लाइसेंस भी नहीं मिल पाया. दूसरी ओर फॉरेस्ट एक्ट में हथियार रखने का प्रावधान नहीं है. इसके लिये भी अलग से नियमावली की जरूरत है. हथियार खरीदने के लिये जमा की गई राशि का उपयोग नहीं होने पर एजी ने भी आपत्ति जतायी है. साथ ही एजी की ओर से कहा गया है कि जब राशि का उपयोग ही नहीं हुआ और हथियारों की आपूर्ति भी नहीं की गयी तो राशि वापस लौटानी चाहिए थी.
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अफसर बढ़े, कर्मचारी घटे, जंगल की सुरक्षा में खड़े हो गये सवाल
वन विभाग में जहां एक ओर कर्मचारी घटते चले गये, वहीं दूसरी ओर नये कैडर रिव्यू के तहत 14 आईएफएस अफसरों की संख्या में इजाफा हो गया. नये कैडर रिव्यू के अनुसार आईएफएस के पदों की संख्या 142 हो गयी है. लेकिन वन क्षेत्र का दायरा नहीं बढ़ पाया. अब भी राष्ट्रीय मानक से पांच फीसदी वन क्षेत्र कम है. 31 साल बाद भी रेंजरों की नियुक्ति नहीं हो पायी है.
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दूसरे राज्यों की तुलना में झारखंड में अधिक हैं आईएफएस
कम वन क्षेत्र होने के बावजूद झारखंड में आईएफएस अफसरों की संख्या ज्यादा है. लगभग 24 हजार वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र के लिये 95 आईएफएस झारखंड में पदस्थापित हैं. वहीं पड़ोसी राज्य ओडिशा का वन क्षेत्र 57184 वर्ग किलोमीटर है. इसके लिये 86 आईएफएस पदस्थापित हैं. राजस्थान में 31700 वर्ग किलोमीटर में वन क्षेत्र है. इसके लिये 89 आईएफएस पदस्थापित हैं.
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