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डीपीआर बनाने में एक करोड़ खर्च, फिर भी नहीं जुड़ी प्रदेश की चार नदियां

नदियों के जुड़ने से 3050 क्यूबिक मीटर जल उपलब्ध होता, 50 हजार हेक्टयर भूमि में सिंचाई क्षमता में होती वृद्धि

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Ranchi : विकास योजनाओं में डीपीआर का भी जबरदस्त खेल चल रहा है. डीपीआर बनता है फिर संशोधन होता है. योजनायें कागजों में ही सिमट कर रह जाती हैं. ऐसी ही फेर में प्रदेश की चार नदियों को जोड़ने की योजना पर अब तक केंद्र की मुहर नहीं लग पायी है. उड़ीसा और बिहार के बीच विवाद में यह योजना उलझ कर रह गयी है. डीपीआर बनाने में लगभग एक करोड़ रुपये भी खर्च हो गये. पर अब तक इस योजना को एनओसी नहीं मिल पाया है. सरकार ने यह भी घोषणा की थी कि आस्ट्रेलिया के तर्ज पर दक्षिणी कोयल और शंख नदी को मर्रे डार्लिंग बेसिन की तरह विकसित किया जायेगा.

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नदियों के जुड़ने से 50 हजार हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा मिलती

नदियों के जुड़ने से 3050 क्यूबिक मीटर सिंचाई और पेयजल के लिये पानी उपलब्ध होता. 50 हजार हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई सुविधा उलब्ध होती. साथ ही 653 मेगावाट बिजली का भी उत्पादन होता. लेकिन पिछले तीन साल से यह प्री -फिजिबिलिटी रिपोर्ट और भौतिक सत्यापन के फेर में फंसा हुआ है. केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से भी कई दौर की वार्ता भी हो चुकी है, लेकिन नतीजा सिफर रहा. इस योजना के तहत दक्षिणी कोयल लिंक के तहत नागफेनी को नगर स्थित स्वर्णरेखा के उद्गम स्थल तक भी जोड़ा जाना था.

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ऐसे बनी है चार नदियों को जोड़ने की योजना

दक्षिणी कोयल-खरकई लिंक (स्वर्णरेखा बेसिन)

  • नगर निगम क्षेत्र, सिंचाई, उद्योग के लिये – 1684 क्यूबिक मीटर पानी की उपलब्धता.
  • सिंचाई के लिये – 38 क्यूबिक मीटर.
  • ट्रांसमिशन लॉस (पानी का नुकसान)- 40 क्यूबिक मीटर.
  • कुल 1792 क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध होता.
  • इसमें लिंक नहर की लंबाई 76.25 किलोमीटर होती.
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शंख- दक्षिणी कोयल लिंक

  • पानी की उपलब्धता- 498 क्यूबिक मीटर.
  • गुमला जिला में सिंचाई के लिये पानी की उपलब्धता- 55 क्यूबिक मीटर.
  • दक्षिणी कोयल नदी में पानी का ट्रांसफर 403 क्यूबिक मीटर होता.
  • नगर निगम क्षेत्र में 30 क्यूबिक मीटर पानी दिया जाता.
  • पानी का नुकसान 10 क्यूबिक मीटर होता.

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बराकर-दामोदर-स्वर्णरेखा लिंक

  • कुल पानी की उपलब्धता 760 क्यूबिक मीटर होती.
  • गिरिडीह और धनबाद जिले को सिंचाई के लिये 207 क्यूबिक मीटर पानी मिलता.
  • स्वर्णरेखा नदी में पानी का ट्रांसफर 493 क्यूबिक मीटर होता.
  • नगर निगम क्षेत्र में 30 क्यूबिक मीटर पानी मिलता.
  • पानी का नुकसान 30 फीसदी होता.

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