
Giridih: गिरिडीह के चैताडीह-बक्सीडीह रोड स्थित मातृत्व शिशु केन्द्र में नवजात की सांसे बिजली बोर्ड के हाथ में टिकी है, क्योंकि अस्पताल में बिजली की वैकेल्पिक व्यवस्था नहीं है जिससे ऑक्सीजन की सप्लाई ठप हो जाती है. ऑक्सीजन सप्लाई होने से मरीजों की परेशानी बढ़ जती है. इसके अलावे नवजात को जिस बेबी वार्मर मशीन में रखकर सामान्य किया जाता है वहां 24 घंटे ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है. बिजली गुल होने से वार्मर में रखे बच्चे की जान भी जा सकती है.
बेबी वार्मर में ऑक्सीजन ठप
घटना 10 मार्च सोमवार की है, शिशु केन्द्र के वार्मर रूप में छह से अधिक नवाज इलाजरत थे. सभी वार्मर में रखे गए थे उन्हें कृत्रिम ऑक्सिजन दिया जा रहा था. तभी झारखंड सरकार की बिजली बोर्ड की आंखमिचौली शुरू हो गयी. बार बार पावरकट होता रहा और बच्चों की सांसें अटकती रही. जानकारी के मुताबिक वार्मर को ऑपरेट करने के लिए 24 घंटे नॉनस्टॉप बिजली की जरूरत होती है ताकि ऑक्सिजन की सप्लाई ना रुके.
बेपरवाह जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन को दूसरों के बच्चे की जिंदगी की कोई परवाह नहीं है. कहने को ये मातृत्व शिशु स्वास्थ केन्द्र जिला मुख्यालय में संचालित है लेकिन यहां बच्चे को चूहा कुतर कुतर कर मार डालने की घटना हो चुकी है. इसके बाद भी अस्पताल में कोई सुधार नहीं हुआ. हालात ऐसे हैं कि अब कोई गरीब यहां अपने बच्चे की डिलीवरी कराना नहीं चाहता.
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