
Deepak
Ranchi: झारखंड सरकार ने नन प्रोफिटेबल संस्थानों, ट्रस्ट और धार्मिक संगठनों को राज्य के पिछड़े और ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल और अस्पताल खोलने के लिए रियायती दर पर जमीन देने का फैसला लिया है. ऐसे संस्थानों को एक रुपये की टोकन मनी पर 30 वर्षों के लिए लीज पर जमीन उपलब्ध करायी जायेगी. सरकार का कहना है कि ऐसे संस्थानों का प्रस्ताव उच्चतर शिक्षा और कौशल विकास विभाग के जरिये भूमि राजस्व एवं निबंधन विभाग तक भेजा जायेगा. सरकार का कहना है कि शहरी क्षेत्र से लेकर पिछड़े इलाकों तक की जमीन में ऐसे संस्थानों को न्यूनतम 50 फीसदी और अधिकतम 75 फीसदी तक की रियायत भूमि के बाजार मूल्य पर दी जायेगी. शहरी क्षेत्र में जमीन के बाजार मूल्य पर 50 फीसदी तक की छूट दी जायेगी. शेष 50 फीसदी राशि संस्थानों को लगान और शेस के रूप में सरकार के खाते में जमा करना होगा. जमीन पर यदि पहले से किसी तरह का निर्माण कार्य होगा अथवा वहां पेड़ लगे होंगे, तो इसके लिए अलग से राजस्व की भरपाई संस्थानों को करनी होगी.
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ग्रामीण क्षेत्रों में 75 फीसदी रियायत
ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में स्कूल और अस्पताल खोलनेवाले नन प्रोफिटेबल संस्थानों को जमीन की कीमत में 75 फीसदी तक की रियायत दी जायेगी. सरकार की तरफ से पिछड़े प्रखंडों की सूची जारी की जायेगी. इसके बाद ही संस्थानों से टोकन मनी लिया जायेगा. स्कूल और अस्पताल खोलने के लिए ऐसे संस्थानों को कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना जरूरी होगा. सरकार का मानना है कि वन भूमि, जंगल-झाड़ी भमि के गैर वानिकी उपयोग पर फारेस्ट एक्ट 1980 मान्य होगा. सरकार की ओर से कहा गया है कि उच्चतर और तकनीकी शिक्षा विभाग की तरफ से नन प्रोफिटेबल ऑर्गेनाइजेशन का प्रस्ताव तैयार कर संबंधित जिलों को भेजा जायेगा. सरकार की तरफ से हर तरह का एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) मिलने के बाद ही संस्थान सत्रों का संचालन करने के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और नेशनल काउंसिल ऑफ टीचर्स एजुकेशन की तरफ मान्यता लेना होगा. दो वर्षों बाद दी गयी जमीन की सरकार के स्तर पर समीक्षा की जायेगी.




