
Rahul Guru
Ranchi : झारखंड की क्षेत्रीय भाषाओं को विस्तार देने, पहचान दिलाने और इसमें अवसर पैदा करने को लेकर समय-समय पर राज्य सरकार की ओर से कई प्रयास किये गये. बेहतर भविष्य की संभावनों को देखते हुए इसकी पढ़ाई स्कूल से यूनिवर्सिटी स्तर तक हो रही है. पर सवाल उठ रहा है कि इन क्षेत्रीय भाषाओं को पढ़ानेवाले हैं कौन?
राज्य में स्कूल स्तर पर सात क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई कई सालों से चल रही है. हर साल इंटर स्तर पर राज्यभर से बच्चे परीक्षा में शामिल होते हैं. उनका रिजल्ट भी निकलता है. पर आश्चर्य की बात है कि राज्य के 510 प्लस टू स्कूलों में क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई कराने वाले शिक्षक ही नहीं हैं.
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पढ़ाई शुरू हुई, पर पद नहीं हुए सृजित
राज्य के प्लस टू उच्च विद्यालयों में बिना शिक्षक ही जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई होती है. विद्यालयों में जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा के शिक्षकों के तक सृजित नहीं है. राज्य में कुल 510 प्लस टू उच्च विद्यालय हैं.
इनमें जनजातीय व क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई के लिए नामांकन भी लिया जाता है, पर पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं. जब राज्य गठन हुआ तब राज्य में 59 प्लस टू स्कूल थे.
राज्य गठन के बाद 451 प्लस टू स्कूल की शुरुआत की गयी. इस तरह से राज्य में 510 प्लस टू स्कूल हो गये. इन सभी 510 प्लस टू स्कूलों में क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई हो रही है.
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इन भाषाओं की हो रही पढ़ाई
राज्य के 510 प्लस टू स्कूलों में मुंडारी, संताली, उरांव, पंचपरगनिया, नागपुरी, कुरमाली व खोरठा की पढ़ाई होती है. लेकिन इन भाषाओं की पढ़ाई बिना शिक्षकों के हो रही है. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय भाषाओं की पढ़ाई सही तरीके से हो इसके लिए क्षेत्रीय भाषा के शिक्षकों की बहाली को लेकर विभाग सजग रहा है.
लेकिन विभाग की शिक्षक नियुक्ति को लेकर मंशा कितनी है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि विभाग की ओर से प्रक्रिया सात साल पहले शुरू हुई थी. जानकारी के अनुसार शिक्षकों के पद सृजन का प्रयास 2013-14 में शिक्षा विभाग द्वारा की गयी थी.
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