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बोकारो डीसी ने नियम विरुद्ध जाकर दी बियाडा की जमीन, उद्योग निदेशक ने खारिज किया आदेश, कहा – नियम के इतर लिया फैसला

Akshay Kumar Jha

Ranchi/Bokaro: बोकार-चास की जमीन. वो भी फोरलेन के पास. कीमत का अंदाजा लगाया जा सकता है. ऐसे में किसी कंपनी को औने-पौने कीमत पर जमीन बियाडा देने लगे तो, संदेह जरूर पैदा होता है. ये संदेह और किसी को नहीं बल्कि राज्य उद्योग निदेशक को हुआ. उन्होंने साफ तौर से जमीन आवंटन की प्रक्रिया को नियम से इतर माना और कहा कि इस तरह का काम संदेह पैदा करता है. सरकारी भाषा में संदेह पैदा करना, ऐसा लिखने का मतलब साफतौर से निजी हितों के लिए काम करना होता है. उद्गोय निदेशक ने और किसी पर नहीं बल्कि बोकारो डीसी मृत्युंजय कुमार बर्णवाल, जो कि बियाडा के आरडी (रिजनल डॉयरेक्टर) भी हैं, पर संदेह जाहिर किया है.

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बियाडा की सारी दलील निदेशक ने खारिज की

चास अंचल के कमलाडीह मौजा में फोरलेन के पास दो एकड़ जमीन के लिए बियाडा की तरफ से निविदा निकाली गयी. निविदा में मेसर्स बोकारो होटल एवं रिसोर्ट प्रा.लि. और मेसर्स अविध्न कृषि ट्रेडर्स प्रा.लि. ने हिस्सा लिया. यहां बताते चलें कि मेसर्स बोकारो होटल एवं रिसोर्ट प्रा.लि. बोकारो के मशहूर शराब कारोबारी अनिल सिंह की कंपनी है. इन्होंने इस जमीन पर होटल खोलने के लिए टेंडर भरा. वहीं मेसर्स अविध्न कृषि ट्रेडर्स प्रा.लि. ने होटल मैनेजमेंट के लिए जमीन लेने की बात टेंडर में कही. जमीन को लेकर 26 मार्च को पीसीसी (प्रपोजल क्लियरेंस कमेटी) की बैठक हुई. बैठक की अध्यक्षता बोकारो डीसी मृत्युंजय कुमार बर्णवाल जो कि बियाडा के आरडी (रिजनल हेड) भी होते हैं, ने की. बर्णवाल की अध्यक्षता में हुई बैठक में मेसर्स अविध्न कृषि ट्रेडर्स प्रा.लि. का टेंडर चार कारणों की वजह से रद्द कर दिया गया. चूंकि इस जमीन के लिए दो ही आवेदन आखिरी दौर तक आए, तो सिंगल टेंडर होने की वजह से जमीन अनिल सिंह वाली कंपनी को दे दी गयी.

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दूसरी कंपनी ने की निदेशक के पास शिकायत

मेसर्स अविध्न कृषि ट्रेडर्स प्रा.लि. कंपनी ने निदेशक उद्योग के विजय कुमार के पास मामले को लेकर शिकायत की. निदेशक ने दोनों पक्षों और पीसीसी बैठक में लिए गए निर्णयों के आलोक में जो फैसला सुनाया, वो चौंकाने वाला है. निदेशक ने पीसीसी की उन सभी दलीलों को खारिज कर दिया. जिन्हें पीसीसी ने देते हुए मेसर्स अविध्न कृषि ट्रेडर्स प्रा.लि. जमीन आवंटन से मना कर दिया था. निदेशक ने साफ तौर से कहा कि सभी तथ्यों के आलोक में ही यह निष्कर्ष निकलता है कि पीसीसी में पारदर्शी तरीके से जियाडा (झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण) विनियमन के मुताबिक भूमि आवंटन संबंधी प्रावधानों का अनुपालन नहीं किया है. साथ ही उन्होंने अपनी रिपोर्ट में ये भी कहा कि पीसीसी को इस बात से अवगत होना चाहिए था कि यह जमीन फोरलेन पर है और जमीन की मांग काफी अधिक है. यदि कमेटी नियम को नहीं मानते हुए किसी ऐसे आवेदक को जमीन आवंटन करने के लिए दूसरे कंपनी की ऐसी खामियां निकालती हैं, जिससे जमीन आवंटन का कोई मामला नहीं है, तो इससे संदेह पैदा होता है. नतीजतन जमीन मेसर्स अविध्न कृषि ट्रेडर्स प्रा.लि. को मिली.

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