
Ranchi: एक बार फिर हेमंत सोरेन राज्य के सीएम होंगे. सीएम हाउस में बुधवार को सीएम चंपाई सोरेन, सत्ता पक्ष के विधायकों और कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी गुलाम अहमद मीर की उपस्थिति में हुई बैठक में इस पर सहमति बनी. यह भी तय हुआ कि राजभवन जाकर इसकी सूचना आज ही दी जाए.
इस बैठक को लेकर लेकर संभावना जताई जा रही थी कि हेमंत को ही फिर से नेतृत्व की कमान थमाई जा सकती है. इसके साथ ही हेमंत राज्य में तीसरी बार सीएम पद का दायित्व संभालेंगे. हालांकि खबर लिखे जाने तक सत्ता पक्ष के किसी नेता, विधायक ने औपचारिक तौर पर इसकी घोषणा नहीं की है. इससे पहले जुलाई 2013, दूसरी बार 29 दिसंबर 2019 और अब एक बार फिर वे इस जिम्मेदारी को संभालने को तैयार हैं.
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न्यूज विंग की खबर पर मुहर
सीएम चेहरा बदले जाने और राज्य की कमान फिर से हेमंत सोरेन के हाथों जाने की न्यूज विंग की खबर पर मुहर लग गयी. न्यूज विंग ने इससे संबंधित खबरें लगातार चलाई थीं. यह बताया था कि चंपाई सरकार का कार्यकाल हेमंत की रिहाई तक ही रहेगा.
चार महीने के भीतर दूसरी बार नेतृत्व में बदलाव
गौरतलब है कि 31 जनवरी 2024 को जमीन घोटाला मामले में हेमंत सोरेन ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया था. इस केस में उन्हें ईडी की पड़ताल के बाद जेल जाना पड़ा था. इसके बाद 2 फरवरी को झामुमो के वरिष्ठ नेता और मंत्री चंपाई सोरेन ने सीएम पद की शपथ ली थी. इसके बाद हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से जब जून के आखिर में हेमंत को जमानत मिल गयी तो झारखंड में सियासी हलचल बढ़ती ही गयी. यह माना जाने लगा कि वे फिर से राज्य की बागडोर संभालेंगे. इसके बाद 3 जुलाई को इंडी गठबंधन दल के विधायकों की बैठक मुख्यमंत्री आवास में बुलायी गयी. इसमें कहा गया कि हेमंत ही फिर से सरकार की बागडोर संभालें. साथ ही इस पर भी बात हुई कि इसके लिए बुधवार को ही राजभवन जाया जाए और इसकी औपचारिक सूचना दी जाए.
निशिकांत ने भी ली चुटकी

दूसरी ओर भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने ट्वीट पर सियासी हवा को और गर्म कर दिया. दावा किया कि अब चंपाई सोरेन सरकार के युग खत्म होने वाला है.
निशिकांत ने सोशल साइट एक्स पर लिखा “झारखंड में @ChampaiSoren युग समाप्त, परिवारवादी पार्टी में परिवार के बाहर के लोगों का कोई राजनीतिक भविष्य नहीं है. काश आंदोलनकारी मुख्यमंत्री बिरसा भगवान से प्रेरित होकर भ्रष्टाचारी हेमंत सोरेन जी के खिलाफ खड़े हो पाते ?”
इस ट्वीट के बाद चर्चाओं का बाजार सुबह से ही गर्म हो गया. सियासी गलियारों में इसकी खूब चर्चा होने लगी. हेमंत सोरेन की ताजपोशी करने की तैयारी होने या कुछ और सियासी खिचड़ी पकने को लेकर चर्चा होती रही.
कुछ भी बोलने से परहेज करते रहे गठबंधन दल के नेता
सत्तारूढ दल का कोई भी नेता बैठक के बारे में बोलने से परहेज करते रहे. ऐसा लग रहा था कि सभी को साफ मना कर दिया गया है कि किसी तरह का कोई बयान मीडिया में न दे. इसके बाद बैठक खत्म होने के बाद ही इस पर स्पष्ट सूचना सामने आने की बात कही जाती रही.




