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न्यूज विंग ब्रेकिंग: झारखंड में फाइनांशियल क्राइसिस! ट्रेजरी में सिर्फ 200 करोड़, ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं की देनदारी महीनों से बंद

10,000 करोड़ की योजनाओं पर मंडरा रहे संकट के बादल, एजी से खर्च की गई राशि का मिलान भी नहीं

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Ravi Aditya

Ranchi: सरकार का दावा है कि किसी भी प्रोजक्ट में राशि की कमी नहीं होने दी जायेगी. खुले मंच से कई बार इसकी घोषणा भी की जा रही है. लेकिन हकीकत इससे कोसो दूर है. हकीकत यह है कि झारखंड फाइनांशियल क्राइसेस की ओर बढ़ रहा है. वित्त विभाग के सूत्रों के अनुसार खजाने में सिर्फ 200 करोड़ रुपये ही हैं. हालांकि राशि खजाने में आती-जाती रहती है, लेकिन अब तक की स्थिति यह है कि कोई भी बड़े प्रोजेक्ट के लिये राशि उपलब्ध नहीं है. ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं को पिछले तीन माह से कोई भुगतान नहीं हुआ है.

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10 हजार करोड़ के प्रोजेक्टों की रफ्तार धीमी

राज्य में चल रहे 10 हजार करोड़ से भी अधिक प्रोजेक्टों की रफ्तार धीमी हो गई है. इसमें पथ विभाग का 5000 करोड़ के प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है. डीपीआर बनने के बावजूद राशि के अभाव में बोकारो एक्सप्रेस-वे का प्रोजेक्ट ठंढ़े बस्ते में चला गया. इसी तरह आइएल एंड एफएस को लगभग 4000 करोड़ का काम दिया गया है. देनदारी बंद होने के कारण प्रोजेक्टों की रफ्तार भी धीमी हो गई है. ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं का भुगतान लंबित होने के कारण सड़क, बिजली, पानी सहित अन्य आधारभूत संरचनाओं का काम लंबित हो गया है.

इंफ्रास्ट्रक्चर का काम कर रही कंपनियों में भी वित्तीय संकट

राज्य में आधारभूत संरचनाओं का निर्माण करने वाली कंपनियां घाटे में चल रही हैं. जेआईआईसीएल, झारखंड मूरी रोड डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड, जेआरपीआइएल और जेएआरडीसीएल घाटे में चल रही हैं. कंपनी के ऑडिट वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी की देनदारियां 2013-14 से बढ़ गयी हैं. 2013-14 में जहां कंपनी की देनदारी 18,145 करोड़ थी, वहीं 2017-18 में बढ़कर 32,811 करोड़ पर पहुंच गयी है. पिछले पांच वर्षों में कंपनी का नेटवर्थ भी 5504 करोड़ से घटकर 4361 करोड़ पहुंच गया है.

80353.59 करोड़ कर्ज और खर्च

झारखंड पर 80353.59 करोड़ का कर्ज और खर्च भी है. इसमें लोक ऋण 3760.56 करोड़ है. कर्ज और उधार 1543 करोड़ रुपये है. पूंजीगत खर्च 12305.59 करोड़ पूंजीगत खर्च है. जबकि राजस्व खर्च 62744.44 करोड़ रुपये है.

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राशि का मिलान भी नहीं

एजी ने कई बार सरकार से राशि के मिलान का आग्रह भी किया. लेकिन अफसरों के उदासीन रवैये के कारण अब तक राशि का मिलान नहीं हो पाया है. दूसरी तरफ राजस्व वसूली भी कम हो रही है. एसी-डीसी बिल की बाध्यता खत्म होने के कारण भी वित्तीय संकट गहरा रहा है. अब अफसर उपयोगिता प्रमाण पत्र में सिर्फ लिखकर दे देते हैं कि पैसा का उपयोग हो गया है. लेकिन इसका कोई सत्यापन नहीं हो पा रहा है.

नये प्रोजेक्ट और जोड़-तोड़ का असर भी खजाने पर

राज्य सरकार ने कई और नये प्रोजेक्ट भी लिए हैं. इसका असर खजाने पर भी पड़ रहा है. वहीं कई प्रोजेक्ट्स में जोड़-तोड़ और फिर से निर्माण के कारण प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ गया है. उदाहरण के लिए रांची में पहले चरण में सीवरेज-ड्रेनेज के लिए 360 करोड़ का कार्यादेश कानपुर की कंपनी ज्योति बिल्डटेक को मिला था. कंपनी को 54 करोड़ रुपये की अग्रिम और चार करोड़ का बिल भुगतान भी किया गया. 18 महीने के अंदर न तो प्रोजेक्ट पूरा हुआ और ना ही काम आगे बढ़ा. अब कंपनी कह रही है कि प्रोजेक्ट कॉस्ट 8 फीसदी और बढ़ाया जाये साथ ही मियाद भी बढ़ाई जाये. इसी तरह एक दर्जन से भी अधिक प्रोजेक्ट्स का कॉस्ट बढ़ गया है. इसकी तरह बिरसा स्मृति पार्क, टाइम स्कॉवयर के डिजाइन भी फिर से बदले गये.

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इन प्रमुख प्रोजक्टों पर चल रहा है काम

योजना                                   प्रोजेक्ट की लागत (करोड़ में)

विस्थापित आवास योजना                   212 करोड़
रवींद्र भवन                                      155 करोड़
विधानसभा                                      450 करोड़
पथ विभाग(सड़क)                          5000 करोड़
हाईकोर्ट                                         699 करोड़
स्मार्ट सिटी                        3000 करोड़(लगभग)
हज हाउस                                      135 करोड़

किस कंपनी को कितने का घाटा

जेएआरडीसीएल – 0.14 करोड़
हजारीबाग-रांची एक्सप्रेसवे- 22.23 करोड़
जेआरआईपीएल – 28.61 करोड़
जेआईआईसीएल- 404.61 करोड़

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