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नेताजी तो बहाना हैं, प. बंगाल निशाना है…

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Kumar Saurav

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद सरकार की स्थापना के 75 साल पूरे होने पर तिरंगा फहराकर कांग्रेस को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि आज से 75 साल पहले देश के बाहर बनी आजाद हिंद सरकार अखंड भारत की सरकार थी. देश के सपूत को वह सम्मान नहीं मिला जो मिलना चाहिए था. वह भी सिर्फ इसलिए कि एक परिवार को बड़ा बनाने की कोशिश की जा रही थी. राजनीति के मंजे खिलाड़ी नरेंद्र मोदी ने भले ही मुख्य रूप से कांग्रेस को निशाने पर लिया पर उनका असली निशाना लोकसभा चुनाव है, जो अगले साल होने जा रहा है. प. बंगाल में ममता बनर्जी और वाम दलों से निपटने के लिए मोदी को एक ऐसे हथियार की जरूरत है जो मां, माटी और मानुष के किले की दीवार को भेद सके. सवाल बंगाली अस्मिता का भी है. इस वक्त केंद्र की सत्ता पर आसीन भाजपा को इस बात की चिंता भी सता रही है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात औऱ राजस्थान के संभावित झटकों को कैसे संभाला जाये.

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सीटों की भरपाई की कोशिश

लोकसभा चुनाव में इन राज्यों से जितनी सीटों के नुकसान की आशंका पार्टी को दिख रही है उसकी भरपाई करने के लिए प. बंगाल पर पूरा जोर लगाया जा रहा है. पार्टी का मानना है कि इस बार प. बंगाल में पार्टी का प्रदर्शन अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन होगा. बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को केंद्र में रख कर ममता बनर्जी की सरकार को घेरने के सारे उपाय किये जा रहे हैं.

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बोस को याद किया जाना जरूरी है या उनके आदर्शों पर अमल

यूं तो नेताजी को मौके बेमौके याद किया जाता है. कभी उनकी मौत के रहस्य पर खबरें आती हैं तो कभी गुमनामी बाबा के बहाने उनके होने-न होने की बात की जाती रही है. पर सबसे अहम सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उनकी सरकार के 75 साल पूरे होने के मौके पर कांग्रेस को खरी-खोटी सुनाने से उनका सम्मान बढ़ जायेगा या देश के हालात बदल जायेंगे. देश के हालात तो तब बदलेंगे जब कथनी औऱ करनी का फर्क मट जाये. बोस को याद किया जाना औऱ उनके नाम पर राजनीति करना जरूरी नहीं है, देश को जरूरत है उनके आदर्शों पर अमल करने की. क्या इस पावन दिन पर यह संकल्प लिया जा सकता था कि उनके सपनों का भारत हम बनायेंगे.

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