
Surjit Singh
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 जून को भारतीय उद्योग संघ (सीआइआइ) को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहाः भारत फिर से हासिल करेगा आर्थिक वृद्धि. इसके लिए चाहिए, इच्छाशक्ति, समावेशन, निवेश, बुनियादी ढांचा और नवाचार. हालांकि प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि लक्ष्य हासिल करने के लिए उनकी सरकार कौन-कौन से कदम उठा रही है. बस, तुकबंदी करते रहे.
सवाल यह कि प्रधानमंत्री किस और किसके आर्थिक वृद्धि दर की बात कर रहे हैं. जाहिर है, देश की ही बात कर रहे होंगे. तो उन्हें यह बताना चाहिए था कि देश का नेतृत्व संभालने के बाद देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने के लिए क्या-क्या किया. किनकी नीतियों के कारण देश की जीडीपी 3.1 प्रतिशत के स्तर पर आ गयी. मूडीज ने भारत की आर्थिक स्थिति की जो ताजा रिपोर्ट जारी की है, उसके बाद कोई रैंकिंग नहीं है. बस कह सकते हैं कि कबाड़ बच गया है.
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प्रधानमंत्री को यह भी बताना चाहिए था कि क्यों उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही देश का आर्थिक दुर्भाग्य कैसे शुरू हो गया. किन लोगों की सलाह पर नोटबंदी जैसे फैसले लिये. जिसके कारण देश की अर्थव्यवस्था की कमर टूट गयी. किसकी सलाह से गैर नियोजित तरीके से जीएसटी को लागू किया. यहां गौर करें, दुनिया का शायद ही किसी अर्थशास्त्री ने मोदी सरकार की इन दोनों नीतियों को अच्छा बताया. देश को भी कोई लाभ नहीं हुआ. उद्योग धंधे तबाह हुए. बेरोजगारी ने 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया. फिर नोटबंदी जैसा विध्वसंक फैसला किसको लाभ पहुंचाने के लिए लिया गया.
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प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि जब वर्ष 2015-16 में देश की जीडीपी 8.2 प्रतशित थी. यह 2019-20 में 4.1 प्रतिशत पर कैसे पहुंच गयी. कौन है जिम्मेदार. देश का यह हाल किसने कर दिया.
प्रधानमंत्री को यह भी बताना चाहिए कि जब देश की जीडीपी लगातार नीचे जा रही थी, तब देश के कुछ गिने-चुने उद्योगपतियों की कुल संपत्ति कैसे बढ़ता जा रही थी. देश ने पिछले 70 सालों में जिन कंपनियों की नींव रखी, उनमें से 23 को क्यों बेचना पड़ा. क्यों बैंकों की हालत खराब है.
प्रधानमंत्री को यह बताना चाहिए कि देश ने जब लगातार दो बार उन्हें मौका दिया, तो उन्होंने ऐसा क्या किया कि अब उद्योगजगत या देशवासी उनकी बात पर विश्वास करें. क्यों जिस राहत पैकेज को वह 20 लाख करोड़ यानी जीडीपी का 10 प्रतिशत बताते हैं, उसे उद्योग जगत की एजेंसियां जीडीपी का सिर्फ 1 प्रतिशत बताती है. यह झूठ क्यों. क्या झूठ के सहारे हम तेज आर्थिक वृद्धि दर को हासिल कर पायेंगे. अंत में प्रधानमंत्री को यह साफ कर देना चाहिए कि तेज विकास किसका होगा. देश का या कुछ गिने-चुने लोगों का.
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