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आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए मोबाइल खरीदने का टेंडर फाइनल नहीं, 26 जून को पता चलेगा कौन कंपनी होगीः डॉ अमिताभ कौशल

26 को पता चलेगा कौन सी कंपनी का होगा मोबाइल

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Ranchi: आंगनबाड़ी सेविकाओं के देने के लिए मोबाइल की खरीद के टेंडर में गड़बड़ी को लेकर न्यूज विंग पिछले तीन दिनों से खबर प्रकाशित कर रहा है. टेंडर में गड़बड़ी को लेकर विभाग की मंत्री लुईस मरांडी ने भी आपत्ति दर्ज करायी है. इस बीच 22 जून को महिला और बाल विकास विभाग के सचिव डॉ अमिताभ कौशल ने सूचना भवन में एक प्रेस कांफ्रेंस किया. उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी सेविकाओं को मोबाइल देने की निविदा अब तक फाइनल नहीं हुई है. मोबाइल खरीद की प्रक्रिया गवर्नमेंट इलेक्ट्रॉनिक मार्केट (जेम) पोर्टल जरिए पूरी की जा रही है. टेंडर का टेक्निकल बिड हो चुका है. लेकिन टेंडर में कौन सी कंपनी एल-वन हुई है. इसकी जानकारी अभी तक किसी को नहीं है. अभी सिर्फ उसके रेट का पता चला है, जो सबसे कम है. जब टेंडर फाइनल होगा तो कंपनी के नाम का पता चलेगा. कौन कंपनी एल-वन है, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता.

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सचिव ने कहा कि मोबाइल टेंडर प्रक्रिया में रिवर्स ऑक्सन प्रक्रिया अपनायी जा रही है. इसकी अंतिम तिथि 26 जून है. 26 जून को शाम चार बजे यह पता चल पायेगा कि कौन सी कंपनी एल-वन है और कौन सी कंपनी एल-टू. प्रेस कांफ्रेंस में विभाग के सचिव अमिताभ कौशल के साथ विभाग के निदेशक मनोज कुमार भी मौजूद थे. उन्होंने कहा कि मीडिया में यह बात चल रही है कि विभाग सस्ते मोबाइल को ज्यादा कीमत पर खरीदने की तैयारी कर रहा है, जो गलत है.

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रिवर्स ऑक्सन के बाद विभाग तय करेगा, मोबाइल खरीदनी है या नहींः सचिव

प्रेस वार्ता से पहले विभाग के सचिव अमिताभ कौशल ने न्यूज विंग संवाददाता से बात की थी. उन्होंने कहा कि अभी टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है. रिवर्स ऑक्शन भी नहीं हुआ है. रिवर्स ऑक्शन के बाद अगर विभाग को एल-1 कंपनी का प्रोडक्ट, रेट और मॉडल ठीक लगेगा, तभी कंपनी से मोबाइल खरीदी जायेगी. यदि विभाग को कोई भी गड़बड़ी मिली तो, टेंडर कैंसिल कर दिया जायेगा. इसलिए ऐसा कहा जाना कि किसी सस्ते मोबाइल को विभाग खरीद कर आंगनबाड़ी सेविकाओं को बांट रहा है, गलत है.

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संवाददाता का पक्ष

आंगनबाड़ी सेविका के लिए मोबाइल खरीदने को लेकर टेंडर में गड़बड़ी और बाजार मूल्य से ज्यादा की कीमत पर मोबाइल खऱीदने के तैयारी के सिलसिले में न्यूज विंग ने दो खबरें प्रकाशित की हैं. खबरों के प्रकाशन का आधार तथ्यात्मक सूचनाएं और विभाग की मंत्री की आपत्तियां हैं.

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तथ्य, जिससे पूरे मामले को समझा जा सकता है

  • गड़बड़ियों की शिकायत मिलने पर टेंडर प्रक्रिया के दौरान मंत्री ने अपने आवास पर विभागीय अधिकारियों व जैम के अधिकारियों के साथ बैठक की. जिसमें कुछ निर्देश दिये.
  • 15 जून को मंत्री लुईस मरांडी ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए उसे कैंसिल करने के लिए विभाग को लिखा. लेकिन यह नहीं हुआ.
  • मंत्री की आपत्तियों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में मंत्री लुईस मरांडी ने 20 जून को एक और पत्र अधिकारियों को लिखा. जिसमें उन्होंने कहा है कि विभिन्न श्रोतों से प्राप्त शिकायतों के आलोक में तकनीकी रूप से योग्य पाये गये निविदादातओं की पुर्नसमीक्षा या मूल्यांकन कर निर्धारित अवधि में ही आगे की कार्रवाई करें.
  • 20 जून को दोबारा पत्र लिखने से पहले मंत्री ने विभाग के अधिकारियों और जैम के अधिकारियों के साथ बैठक भी की थी. समझा जा सकता है कि बैठक में आपत्ति करने के बाद भी मंत्री को दोबारा क्यों लिखित रूप से अधिकारियों को पत्र लिखना पड़ा.
  • टेंडर प्रक्रिया में चार कंपनियों के वेंडर्स शामल हुए हैं. Samsung कंपनी के दो वेंडर,  Vivo कंपनी के एक और Panasonic कंपनी के एक वेंडर.
  • Samsung और Vivo कंपनी के मोबाइल का बाजार मुल्य 9500-10000 तक का है. वहीं Panasonic Eluga I-7 की कीमत बाजार में 6200 रुपये है.
  • स्पष्ट है Panasonic ने टेंडर प्रक्रिया में सबसे कम रेट कोट किया है. जाहिर तौर पर Panasonic ही एल-वन कंपनी बनी है और बनेगी.
  • 26 जून को होनेवाली रिवर्स टेंडर की प्रक्रिया में भी Panasonic कंपनी के वेंडर के ही एल-वन बनने का पूरी गारंटी है. क्योंकि Panasonic की लागत सबसे कम है. और उसने अपने मोबाइल की बाजार मूल्य से भी बहुत अधिक राशि कोट किया है. इस कारण रिवर्स प्रक्रिया में भी Panasonic कंपनी का वेंडर ही सबसे रेट को और कम करने की स्थिति में होगा.
  • वित्त विभाग का भी सर्कुलर है कि टेंडर प्रक्रिया में कोई भी सामान या तो बाजार रेट पर खरीदा जाये, या उससे कम दर पर.

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