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MGNREGA: वित्तीय वर्ष 2021-22 में 45.57 फीसदी महिलाओं को उपलब्ध कराया गया रोजगार, 5.22 लाख परिसंपत्तियों का हुआ सृजन

Special correspondent

Ranchi: झारखंड में मनरेगा से वित्तीय वर्ष 2021-22 के समाप्ति 31 मार्च तक 3389 करोड़ की राशि व्यय की गयी. इतनी बड़ी राशि ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न कार्यो के लिए खर्च की गयी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था बेहतर प्रभाव पड़ा. ग्रामीणों की आजीविका में भी वृद्धि हुई. ग्रामीण विकास विभाग ने मनरेगा के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन पर रिपोर्ट तैयार करायी है, जिसमें लगभग 3400 करोड़ की राशि खर्च किए जाने की जानकारी मिली है. कोरोना काल में विभाग इसे अच्छी उपलब्धि मान रहा है.

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विभाग के पदाधिकारियों ने बताया कि वित्त वर्ष में मानवदिवस सृजन में बेहतर कार्य हुए जिससे बड़े पैमाने पर मनरेगा से निबंधित मजदूरों को रोजगार मिला. राज्य में 31 मार्च तक 44 लाख से अधिक एक्टिव मजदूर कार्य कर रहे थे, जिन्हें मनरेगा योजना से रोजगार उपलब्ध कराया गया. 1132.55 लाख मानव दिवस सृजन पिछले वित्तीय वर्ष में सृजित किया गया है. प्रतिदिन के हिसाब से इन मनरेगा मजदूरों को 225 रुपये का भुगतान भी किया गया.

मनरेगा से आधी आबादी को रोजगार देने में इस बार सफलता मिली. करीब 45.57 फीसदी महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया. यह प्रयास हो रहा है कि इनकी सहभागिता 50 फीसदी तक की जाये. वहीं, एसटी, एससी की भागीदारी इस बार कम हुई. करीब 33.04 प्रतिशत ही उन्हें रोजगार मिल पाया. जबकि प्राथमिकता से उनको रोजगार देने का लक्ष्य भारत सरकार ने भी दे रखा है. वित्तीय वर्ष के अंत तक करीब 5.22 लाख कुल परिसंपत्ति सृजित हुई. बिरसा हरित ग्राम, खेल मैदान निर्माण, पशु शेड बकरी शेड, समतलीकरण सहित अन्य कई योजनाएं ली गयी.

मनरेगा में एक्टिव वर्कर

44.50 लाख

मानव दिवस सृजन

1132.55 लाख

महिलाओं की भागीदारी-45.57 प्रतिशत

एसटी, एससी की भागीदारी-33.04 प्रतिशत

कुल सृजित परिसंपत्ति-5.122 लाख

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